Dhanvantara Gutika: गुणों से भरपूर है धान्वन्तर गुटिका- Acharya Balkrishan Ji

धान्वन्तर गुटिका (सहस्रयोगम् 8/130-134) क्र.सं. घटक द्रव्य प्रयोज्यांग अनुपात
  1. एला (सूक्ष्मैला) (Elettaria cardmomum Maton.) बीज भाग
  2. विश्वा (शुण्ठ) (Zingiber officinale Rosc.) कन्द भाग
  3. अभया (हरीतकी) (Terminalia chebula Retz.) फली भाग
  4. जाती (जातीफल) (Myristica fragrans Houtt.) बीज भाग
  5. बृहती (Solanum indicum Linn.) पंचांग भाग
  6. आर्य (चन्द्रिका) (Lepidium sativum Linn.) बीज भाग
  7. जीरक (श्वेतजीरक) (Cuminum cyminum Linn.) फल भाग
  8. कंकोल (Piper cubaba Linn.) बीज भाग
  9. भूनिम्ब (किराततिक्त ) (Swertia chirayita (Roxb.ex.Flem.)पंचांग भाग
  10. रुद्राक्ष बीज भाग
  11. सुरदारु (देवदारु) (Cedrus deodara (Roxb.) Loud.) सार भाग
  12. कर्पूर (Cinnamomum camphora Nees & Eberm.) निर्यास भाग
  13. मृगरेतस भाग
  14. जीरक क्वाथ (Cuminum cyminum Linn.) फल Q.S भावनार्थ
  15. हिमामभासा (षटपत्रिका) (Rosa centifollia.) पुष्प Q.S भावनार्थ
मात्रा ग्राम
अनुपान पनस पत्रभूनिम्बजीरकइन सबका क्वाथ।
गुण और उपयोग– यह गुटिका विशेष रूप से वायु का अनुलोमन करती है अर्थात् वायु को सम्पूर्ण शरीर से अच्छी प्रकार से गति कराती है जिस कारण शरीर में वातरोग उत्पन्न नहीं होते हैं। इसके साथ ही यह गुटिका श्वासरोगखांसीक्षय रोगहिचकी तथा वमन आदि रोगों में लाभ पहुँचाती है। इसके सेवन से कफ की लार आना भी बन्द हो जाता है।

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