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आप तरबूज (tarbooz) जरूर खाते होंगे। जब भी बाजार में तरबूज बिक्री के लिए आता है तो तरबूज के दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी जाती है। तरबूज का स्वाद ही इतना मीठा होता है कि सभी लोगों को बहुत पसंद आता है। आप जब भी तरबूज खरीदते हैं तो इसके अंदर का गूदा खा लेते हैं, और छिलके या बीजों को फेंक देते हैं। है ना! क्या आपको पता है कि तरबूज का गूदा शरीर के लिए जितना फायदेमंद (tarbooz ke fayde) होता है, उतना ही इसके बीज भी होते हैं? क्या आप जानते हैं कि कई रोगों में तरबूज के सेवन से लाभ मिलता है, या तरबूज के फायदे से कई रोगों का इलाज किया जा सकता है।
आयुर्वेद में तरबूज को एक बहुत ही गुणकारी फल बताया गया है। पतंजलि के अनुसार, तरबूज के सेवन से रोगों को

तरबूज क्या है? (What is Tarbuj in Hindi?)

तरबूज एक फल है। यह खरबूजे (karbooja) के जैसा होता है। इसकी लता खरबूजे से अधिक लम्बी और दूर तक फैलती है। तरबूज का तना  खांचयुक्त होता है। इसके पत्ते सीधे, पंचखण्डयुक्त और किनारों पर कटे हुए, और लम्बे तथा गहरे होते हैं। इसके फूृल पीले रंग के होते हैं। इसके फल गोलाकार या अण्डाकार होते हैं। फलों में चिकनापन तो होता ही है।
फल के अन्दर का गूदा लाल या पीला-सफेद रंग का होता है। फल का छिलका हरे रंग का होता है। छिलके में धब्बेदार कई धारियां होती हैं। तरबूज के बीज चपटे, नुकीले, काले या सफेद रंग के होते हैं। तरबूज के पौधे में फूल और फल लगने का समय अप्रैल से अगस्त तक होता है।
तरबूज के इस्तेमाल से दस्त, शुक्राणु रोग, वीर्य रोग, मूत्र रोग, मल रोग, आंखों की बीमारी, खून की कमी आदि में लाभ (tarbooz ke fayde) लिया जा सकता है।
और पढ़ें: खून की कमी दूर करे प्रभाकर वटी

अन्य भाषाओं में तरबूज के नाम (Name of Tarbuj in Different Languages)

भारत में तरबूज (tarbooj) को मुख्यतः तरबूज के नाम से ही जानते हैं, लेकिन इसके और भी नाम है। तरबूज का वानस्पतिक नाम सिट्रुलस लेनेटस (Citrullus lanatus (Thunb.) Mats. & Nakai, Syn-Citrullus vulgaris Schrad. है और यह कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) कुल का है। इसके अन्य नाम ये हैंः-
Tarbuj in-
  • Hindi (tarbuj in Hindi) – तरबूज, तरबूजा, हिनमाना
  • English- वाटर मेलन (Water melon), व्हाइट वाटर मेलन (White water melon)
  • Sanskrit – कालिन्द, तरंबूजा, कालिङ्ग, सुवर्त्तुल
  • Urdu – तरबूज (Turbuj)
  • Gujarati – तड़बूज (Tadbuj), तरबुच (Tarbuch)
  • Tamil – कोंमाट्टि (Komantti), पुल्लुम (Pullum)
  • Telugu – पुञ्चकाया (Punchkaya), तरबूं (Tarbujam)
  • Bengali – तरमुज (Tarmuj), तरबुज (Tarbuza), कालिन्गढ़ (Kalingarh)
  • Nepali – तर्बुजा (Tarbuja)
  • Punjabi – हिंडवाना (Hindwana), माथिरा (Mathira)
  • Marathi (tarbuj in marathi) – कलिगड (Kalingada), करिंग (Karing)
  • Arabic- बतिख हिन्दी (Batikh Hindi), जकी (Zki), बातिघेहिन्दी (BatigheHindi); Persian – हिन्दबाना (Hindbana), दिलपसन्द (Dilpasand) हिन्दानह (Hindanah)

तरबूज के फायदे और उपयोग (Tarbuj Fruit Benefits and Uses in Hindi)

अब तक आपने जाना कि तरबूज के कितने नाम है। आइए अब जानते हैं कि तरबूज के इस्तेमाल से कितनी सारी बीमारियों में लाभ (tarbooz ke fayde लिया जा सकता है। तरबूज के औषधीय प्रयोग, औषधीय प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

उल्टी में तरबूज के फायदे (Watermelon Benefits to Stop Vomiting in Hindi)

उल्टी को रोकने के लिए तरबूज का इस्तेमाल फायदा पहुंचाता है। आप 5-10 मिली तरबूज के फल के रस में नींबू का रस मिलाकर पिएं। इससे उल्टी में लाभ होता है।

अधिक प्यास लगने की समस्या में तरबूज के सेवन से लाभ (Tarbuj Fruit Benefits for Excessive Thirst Problem in Hindi)

अनेक लोग अधिक प्यास लगने की समस्या से परेशान रहते हैं। अधिक प्यास लगने की परेशानी में तरबूज के फल का रस पिएं। इसे 20-50 मिली की मात्रा में पीने से समस्या ठीक होती है।

शारीरिक कमजोरी में तरबूज के सेवन से लाभ (Benefits of Watermelon to Treat Body Weakness in Hindi)

शारीरिक कमजोरी में भी तरबूज का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है। तरबूज (tarbooj) के बीज का 5-10 ग्राम चूर्ण बनाएं। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाएं। इसे खाने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

खुजली में तरबूज के औषधीय गुण से फायदा (Watermelon Benefits to Treat Itching in Hindi)

जो भी खुजली से परेशान रहते हैं, वे तरबूज फल को पीसकर खुजली वाले स्थान पर लगाएं। इससे खुजली ठीक हो जाती है। अधिक लाभ के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।

तरबूज के औषधीय गुण से बुखार का इलाज (Tarbuj Fruit Benefits in Fighting with Fever in Hindi)

  • तरबूज फल के छिलके को पीसकर लेप करें। इससे बुखार और बुखार के कारण होने वाली शरीर में जलन (benefits of kalingas) ठीक हो जाती है।
  • इसी तरह 10-40 मिली फल के रस में चीनी एवं मधु मिलाकर पीने से बुखार में लाभ होता है।

तरबूज के सेवन से कंठ रोग का उपचार (Benefits of Watermelon for Throat Disorder in Hindi)

तरबूज फल के रस का गरारा करने से कण्ठ रोग में लाभ होता है। बेहतर लाभ के लिए किसी आयुर्वदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें। ( और पढ़ें: कंठ रोग में वन तुलसी के फायदे )

तरबूज के औषधीय गुण से सिरदर्द का इलाज (Watermelon Benefits in Relieves from Headache in Hindi)

सिरदर्द में तरबूज का इस्तेमाल उपयोगी साबित होता है। 30-40 मिली तरबूज (tarbooz) फल के रस में मिश्री मिलाकर पिएं। इससे सिर दर्द से आराम मिलता है।

आंखों की जलन में तरबूज का औषधीय गुण फायदेमंद (Benefits of Watermelon to Treat Eye Disease in Hindi)

आंखों में जलन की समस्या से परेशान लोग तरबूज का उपयोग कर सकते हैं। तरबूज के फलों को पीसकर आंखों के चारों तरफ (बाहर की ओर) लगाने से आंखों की जलन मिटती है।

तरबूज के सेवन से मुंह के छाले का इलाज (Benefits of Tarbuj Fruit for Mouth Ulcers in Hindi)

आप मुंह के छाले का इलाज तरबूज से कर सकते हैं। तरबूज (tarbooz) फल के रस से गरारा करने से मुंह के छाले की समस्या में भी लाभ मिलता है।

खांसी के इलाज में तरबूज का औषधीय गुण लाभदायक (Kalingad Uses for Cough Treatment in Hindi)

खांसी को ठीक करने के लिए 30-40 मिली तरबूज फल के रस में 1 ग्राम सोंठ चूर्ण तथा शहद मिलाएं। इसे पिएं। इससे खांसी में लाभ होता है।

आंतों की बीमारी (आंतों की सूजन) में तरबूज के फायदे (Kalingad Benefits for Intestinal Disease in Hindi)

आंतों के रोग का इलाज करने करने के लिए तरबूज के बीज के साथ पत्तों को पीस लें। इसे पेट पर बांधने से आंतों के रोग जैसे आंतों की सूजन खत्म होती है।

तरबूज के औषधीय गुण से दस्त पर रोक (Benefits of Kalingad to Stop Diarrhea in Hindi)

तरबूज का सेवन दस्त में लाभ पहुंचाता है। दस्त को रोकने के लिए 5-10 मिली फल के रस में नींबू का रस मिलाकर पिएं। इससे दस्त पर रोक लगती है। 

एसिडिटी की समस्या में तरबूज का औषधीय गुण फायदेमंद (Kalingad Uses to Treat Acidity in Hindi)

बहुत सारे लोग एसिडिटी से पीड़ित रहते हैं। इसमें तरबूज के सेवन से लाभ मिलता है। तरबूज (tarbooz) के फल का रस निकाल लें। इसे 20-50 मिली की मात्रा में पिएँ। इससे एसिडिटी की समस्या ठीक होती है।

पीलिया की आयुर्वेदिक दवा है तरबूज (Benefits of Kalingad in Fighting with Jaundice in Hindi)

  • तरबूज फल के रस में समान मात्रा में छाछ और स्वाद के अनुसार नमक मिलाकर सेवन करें। इसे पीलिया में लाभ होता है।
  • इसी तरह 10-30 मिली फल के रस को पीने से भी पीलिया में फायदा (tarbooz ke fayde) होता है।

सुजाक की आयुर्वेदिक दवा है तरबूज (Benefits of Tarbuj Fruit Uses for Gonorrhea in Hindi)

तरबूज फल के रस में समान मात्रा में छाछ तथा स्वाद के अनुसार नकम मिलाकर सेवन करने से सुजाक रोग में लाभ होता है।

मूत्र विकार में जलन की आयुर्वेदिक दवा है तरबूज (Benefits of Kalingad to Treat Urinal Disease in Hindi)

  • तरबूज के बीज का चूर्ण बनाएं। इसे 2-4 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेशाब में जलन की बीमारी ठीक होती है। इससे पेशाब न आने की परेशानी भी ठीक होती है।
  • तरबूज फल के रस में समान मात्रा में छाछ और स्वाद के अनुसार नमक मिलाकर सेवन करने से मूत्राशय के विकारों में लाभ होता है।
  • आप 10-20 मिली तरबूज फल के रस का सेवन करेंगे तो पेशाब में दर्द की समस्या, रुक-रुक कर पेशाब आने की परेशानी सहित मूत्र संबंधी अन्य रोग में भी लाभ होता है।
  • तरबूज के बीजों का चूर्ण बनाएं, और 1-2 ग्राम चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से मूत्र संबंधी विकारों में बहुत लाभ होता है।

तरबूज के सेवन से पित्तज विकारों का उपचार (Benefits of Tarbuj for Pittaj Disorder in Hindi)

तरबूज (tarbuj) फल के रस को 20-50 मिली में पीने से पित्तज विकार ठीक होते हैं। उपाय करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

गठिया में तरबूज के फायदे (Tarbuj Fruit Benefits for Arthritis in Hindi)

गठिया एक गंभीर बीमारी है। इसमें जोड़ों में बहुत दर्द होता है। इसमें भी तरबूज के इस्तेमाल से लाभ होता है। तरबूज फल को पीसकर जोड़ों में लगाएं। गठिया में लाभ होता है।

तरबूज के उपयोगी भाग (Useful Parts of Tarbuj in Hindi)

तरबूज का प्रयोग इस तरह से किया जाना चाहिएः-
  • तरबूज का फल
  • तरबूज के बीज
  • तरबूज के पत्ते

तरबूज का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Tarbuj?)

एक औषधि के रूप में तरबूज के इस्तेमाल की मात्रा ये होनी चाहिएः-
  • तरबूज (tarbuj) का रस – 10-40 मिली
  • तरबूज का चूर्ण – 5-10 ग्राम
अधिक लाभ के लिए तरबूज का औषधि के रूप में प्रयोग किसी चिकित्सक के परामर्शानुसार ही करें।

तरबूज कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Tarbuj Found or Grown?)

तरबूज (tarbuj) की खेती भारत में नदियों के किनारे होती है। इसकी खेती मुख्यतः उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं आसाम में की जाती है। यह उष्णकटिबंधीय देशों एवं दक्षिण अफ्रिका में भी पाया जाता है।

Water Melon: कई बिमारियों की काट है तरबूज

आप तरबूज (tarbooz) जरूर खाते होंगे। जब भी बाजार में तरबूज बिक्री के लिए आता है तो तरबूज के दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ लगी जाती है। तरबूज का स्वाद ही इतना मीठा होता है कि सभी लोगों को बहुत पसंद आता है। आप जब भी तरबूज खरीदते हैं तो इसके अंदर का गूदा खा लेते हैं, और छिलके या बीजों को फेंक देते हैं। है ना! क्या आपको पता है कि तरबूज का गूदा शरीर के लिए जितना फायदेमंद (tarbooz ke fayde) होता है, उतना ही इसके बीज भी होते हैं? क्या आप जानते हैं कि कई रोगों में तरबूज के सेवन से लाभ मिलता है, या तरबूज के फायदे से कई रोगों का इलाज किया जा सकता है।
आयुर्वेद में तरबूज को एक बहुत ही गुणकारी फल बताया गया है। पतंजलि के अनुसार, तरबूज के सेवन से रोगों को

तरबूज क्या है? (What is Tarbuj in Hindi?)

तरबूज एक फल है। यह खरबूजे (karbooja) के जैसा होता है। इसकी लता खरबूजे से अधिक लम्बी और दूर तक फैलती है। तरबूज का तना  खांचयुक्त होता है। इसके पत्ते सीधे, पंचखण्डयुक्त और किनारों पर कटे हुए, और लम्बे तथा गहरे होते हैं। इसके फूृल पीले रंग के होते हैं। इसके फल गोलाकार या अण्डाकार होते हैं। फलों में चिकनापन तो होता ही है।
फल के अन्दर का गूदा लाल या पीला-सफेद रंग का होता है। फल का छिलका हरे रंग का होता है। छिलके में धब्बेदार कई धारियां होती हैं। तरबूज के बीज चपटे, नुकीले, काले या सफेद रंग के होते हैं। तरबूज के पौधे में फूल और फल लगने का समय अप्रैल से अगस्त तक होता है।
तरबूज के इस्तेमाल से दस्त, शुक्राणु रोग, वीर्य रोग, मूत्र रोग, मल रोग, आंखों की बीमारी, खून की कमी आदि में लाभ (tarbooz ke fayde) लिया जा सकता है।
और पढ़ें: खून की कमी दूर करे प्रभाकर वटी

अन्य भाषाओं में तरबूज के नाम (Name of Tarbuj in Different Languages)

भारत में तरबूज (tarbooj) को मुख्यतः तरबूज के नाम से ही जानते हैं, लेकिन इसके और भी नाम है। तरबूज का वानस्पतिक नाम सिट्रुलस लेनेटस (Citrullus lanatus (Thunb.) Mats. & Nakai, Syn-Citrullus vulgaris Schrad. है और यह कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) कुल का है। इसके अन्य नाम ये हैंः-
Tarbuj in-
  • Hindi (tarbuj in Hindi) – तरबूज, तरबूजा, हिनमाना
  • English- वाटर मेलन (Water melon), व्हाइट वाटर मेलन (White water melon)
  • Sanskrit – कालिन्द, तरंबूजा, कालिङ्ग, सुवर्त्तुल
  • Urdu – तरबूज (Turbuj)
  • Gujarati – तड़बूज (Tadbuj), तरबुच (Tarbuch)
  • Tamil – कोंमाट्टि (Komantti), पुल्लुम (Pullum)
  • Telugu – पुञ्चकाया (Punchkaya), तरबूं (Tarbujam)
  • Bengali – तरमुज (Tarmuj), तरबुज (Tarbuza), कालिन्गढ़ (Kalingarh)
  • Nepali – तर्बुजा (Tarbuja)
  • Punjabi – हिंडवाना (Hindwana), माथिरा (Mathira)
  • Marathi (tarbuj in marathi) – कलिगड (Kalingada), करिंग (Karing)
  • Arabic- बतिख हिन्दी (Batikh Hindi), जकी (Zki), बातिघेहिन्दी (BatigheHindi); Persian – हिन्दबाना (Hindbana), दिलपसन्द (Dilpasand) हिन्दानह (Hindanah)

तरबूज के फायदे और उपयोग (Tarbuj Fruit Benefits and Uses in Hindi)

अब तक आपने जाना कि तरबूज के कितने नाम है। आइए अब जानते हैं कि तरबूज के इस्तेमाल से कितनी सारी बीमारियों में लाभ (tarbooz ke fayde लिया जा सकता है। तरबूज के औषधीय प्रयोग, औषधीय प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

उल्टी में तरबूज के फायदे (Watermelon Benefits to Stop Vomiting in Hindi)

उल्टी को रोकने के लिए तरबूज का इस्तेमाल फायदा पहुंचाता है। आप 5-10 मिली तरबूज के फल के रस में नींबू का रस मिलाकर पिएं। इससे उल्टी में लाभ होता है।

अधिक प्यास लगने की समस्या में तरबूज के सेवन से लाभ (Tarbuj Fruit Benefits for Excessive Thirst Problem in Hindi)

अनेक लोग अधिक प्यास लगने की समस्या से परेशान रहते हैं। अधिक प्यास लगने की परेशानी में तरबूज के फल का रस पिएं। इसे 20-50 मिली की मात्रा में पीने से समस्या ठीक होती है।

शारीरिक कमजोरी में तरबूज के सेवन से लाभ (Benefits of Watermelon to Treat Body Weakness in Hindi)

शारीरिक कमजोरी में भी तरबूज का सेवन बहुत लाभ पहुंचाता है। तरबूज (tarbooj) के बीज का 5-10 ग्राम चूर्ण बनाएं। इसमें बराबर मात्रा में मिश्री मिलाएं। इसे खाने से शारीरिक कमजोरी दूर होती है।

खुजली में तरबूज के औषधीय गुण से फायदा (Watermelon Benefits to Treat Itching in Hindi)

जो भी खुजली से परेशान रहते हैं, वे तरबूज फल को पीसकर खुजली वाले स्थान पर लगाएं। इससे खुजली ठीक हो जाती है। अधिक लाभ के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लें।

तरबूज के औषधीय गुण से बुखार का इलाज (Tarbuj Fruit Benefits in Fighting with Fever in Hindi)

  • तरबूज फल के छिलके को पीसकर लेप करें। इससे बुखार और बुखार के कारण होने वाली शरीर में जलन (benefits of kalingas) ठीक हो जाती है।
  • इसी तरह 10-40 मिली फल के रस में चीनी एवं मधु मिलाकर पीने से बुखार में लाभ होता है।

तरबूज के सेवन से कंठ रोग का उपचार (Benefits of Watermelon for Throat Disorder in Hindi)

तरबूज फल के रस का गरारा करने से कण्ठ रोग में लाभ होता है। बेहतर लाभ के लिए किसी आयुर्वदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें। ( और पढ़ें: कंठ रोग में वन तुलसी के फायदे )

तरबूज के औषधीय गुण से सिरदर्द का इलाज (Watermelon Benefits in Relieves from Headache in Hindi)

सिरदर्द में तरबूज का इस्तेमाल उपयोगी साबित होता है। 30-40 मिली तरबूज (tarbooz) फल के रस में मिश्री मिलाकर पिएं। इससे सिर दर्द से आराम मिलता है।

आंखों की जलन में तरबूज का औषधीय गुण फायदेमंद (Benefits of Watermelon to Treat Eye Disease in Hindi)

आंखों में जलन की समस्या से परेशान लोग तरबूज का उपयोग कर सकते हैं। तरबूज के फलों को पीसकर आंखों के चारों तरफ (बाहर की ओर) लगाने से आंखों की जलन मिटती है।

तरबूज के सेवन से मुंह के छाले का इलाज (Benefits of Tarbuj Fruit for Mouth Ulcers in Hindi)

आप मुंह के छाले का इलाज तरबूज से कर सकते हैं। तरबूज (tarbooz) फल के रस से गरारा करने से मुंह के छाले की समस्या में भी लाभ मिलता है।

खांसी के इलाज में तरबूज का औषधीय गुण लाभदायक (Kalingad Uses for Cough Treatment in Hindi)

खांसी को ठीक करने के लिए 30-40 मिली तरबूज फल के रस में 1 ग्राम सोंठ चूर्ण तथा शहद मिलाएं। इसे पिएं। इससे खांसी में लाभ होता है।

आंतों की बीमारी (आंतों की सूजन) में तरबूज के फायदे (Kalingad Benefits for Intestinal Disease in Hindi)

आंतों के रोग का इलाज करने करने के लिए तरबूज के बीज के साथ पत्तों को पीस लें। इसे पेट पर बांधने से आंतों के रोग जैसे आंतों की सूजन खत्म होती है।

तरबूज के औषधीय गुण से दस्त पर रोक (Benefits of Kalingad to Stop Diarrhea in Hindi)

तरबूज का सेवन दस्त में लाभ पहुंचाता है। दस्त को रोकने के लिए 5-10 मिली फल के रस में नींबू का रस मिलाकर पिएं। इससे दस्त पर रोक लगती है। 

एसिडिटी की समस्या में तरबूज का औषधीय गुण फायदेमंद (Kalingad Uses to Treat Acidity in Hindi)

बहुत सारे लोग एसिडिटी से पीड़ित रहते हैं। इसमें तरबूज के सेवन से लाभ मिलता है। तरबूज (tarbooz) के फल का रस निकाल लें। इसे 20-50 मिली की मात्रा में पिएँ। इससे एसिडिटी की समस्या ठीक होती है।

पीलिया की आयुर्वेदिक दवा है तरबूज (Benefits of Kalingad in Fighting with Jaundice in Hindi)

  • तरबूज फल के रस में समान मात्रा में छाछ और स्वाद के अनुसार नमक मिलाकर सेवन करें। इसे पीलिया में लाभ होता है।
  • इसी तरह 10-30 मिली फल के रस को पीने से भी पीलिया में फायदा (tarbooz ke fayde) होता है।

सुजाक की आयुर्वेदिक दवा है तरबूज (Benefits of Tarbuj Fruit Uses for Gonorrhea in Hindi)

तरबूज फल के रस में समान मात्रा में छाछ तथा स्वाद के अनुसार नकम मिलाकर सेवन करने से सुजाक रोग में लाभ होता है।

मूत्र विकार में जलन की आयुर्वेदिक दवा है तरबूज (Benefits of Kalingad to Treat Urinal Disease in Hindi)

  • तरबूज के बीज का चूर्ण बनाएं। इसे 2-4 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से पेशाब में जलन की बीमारी ठीक होती है। इससे पेशाब न आने की परेशानी भी ठीक होती है।
  • तरबूज फल के रस में समान मात्रा में छाछ और स्वाद के अनुसार नमक मिलाकर सेवन करने से मूत्राशय के विकारों में लाभ होता है।
  • आप 10-20 मिली तरबूज फल के रस का सेवन करेंगे तो पेशाब में दर्द की समस्या, रुक-रुक कर पेशाब आने की परेशानी सहित मूत्र संबंधी अन्य रोग में भी लाभ होता है।
  • तरबूज के बीजों का चूर्ण बनाएं, और 1-2 ग्राम चूर्ण में शहद मिलाकर सेवन करने से मूत्र संबंधी विकारों में बहुत लाभ होता है।

तरबूज के सेवन से पित्तज विकारों का उपचार (Benefits of Tarbuj for Pittaj Disorder in Hindi)

तरबूज (tarbuj) फल के रस को 20-50 मिली में पीने से पित्तज विकार ठीक होते हैं। उपाय करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह जरूर लें।

गठिया में तरबूज के फायदे (Tarbuj Fruit Benefits for Arthritis in Hindi)

गठिया एक गंभीर बीमारी है। इसमें जोड़ों में बहुत दर्द होता है। इसमें भी तरबूज के इस्तेमाल से लाभ होता है। तरबूज फल को पीसकर जोड़ों में लगाएं। गठिया में लाभ होता है।

तरबूज के उपयोगी भाग (Useful Parts of Tarbuj in Hindi)

तरबूज का प्रयोग इस तरह से किया जाना चाहिएः-
  • तरबूज का फल
  • तरबूज के बीज
  • तरबूज के पत्ते

तरबूज का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Tarbuj?)

एक औषधि के रूप में तरबूज के इस्तेमाल की मात्रा ये होनी चाहिएः-
  • तरबूज (tarbuj) का रस – 10-40 मिली
  • तरबूज का चूर्ण – 5-10 ग्राम
अधिक लाभ के लिए तरबूज का औषधि के रूप में प्रयोग किसी चिकित्सक के परामर्शानुसार ही करें।

तरबूज कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Tarbuj Found or Grown?)

तरबूज (tarbuj) की खेती भारत में नदियों के किनारे होती है। इसकी खेती मुख्यतः उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान, बिहार, पश्चिम बंगाल एवं आसाम में की जाती है। यह उष्णकटिबंधीय देशों एवं दक्षिण अफ्रिका में भी पाया जाता है।

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