Turai: तोरई के हैं अद्भुत फायदे

आप सभी तोरई (Turai) से अच्छी तरह  परिचित होंगे। इसकी सब्जी (tori ki sabji)भी जरूर खाएं होंगे। जो लोग हरी सब्जियां खाना पसंद करते हैं वे तोरई का सेवन बहुत अधिक मात्रा में करते हैं। आमतौर पर लोग तोरई का उपयोग केवल सब्जी (tori vegetable) के रूप में ही करते हैं और यह नहीं जानते हैं कि तोरई का प्रयोग एक औषधि के रूप में भी किया जाता है।

आयुर्वेद में यह बताया गया है कि तोरई (Ridge gourd in hindi) पचने में आसान होती है, पेट के लिए थोड़ी गरम होती है। कफ और पित्त को शांत करने वाली, वात को बढ़ाने वाली होती है। वीर्य को बढ़ाती है, घाव को ठीक करती है, पेट को साफ करती है, भूख बढ़ाती है और हृदय के लिए अच्छी (ridge gourd benefits)होती है। इतना ही नहीं यह कुष्ठ, पीलिया, तिल्ली (प्लीहा) रोग, सूजन, गैस, कृमि, गोनोरिया, सिर के रोग, घाव, पेट के रोग, बवासीर में भी उपयोगी होती है। कृत्रिम विष, दमा, सूखी खाँसी, बुखार को ठीक करती है।

तोरई क्या है (What is Torai?)

तोरई (ridge gourd in hindi) की तरह ही तोहई तेल भी गुणों से युक्त होता है। इसकी तीन प्रजातियां होती हैं। जिनका प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है। इसे बिहार में नेनुआ भी कहा जाता है और बिहार में इसकी सब्जी (turai ki sabzi) बहुत ही पसंद से खाई जाती है। इसकी एक और प्रजाति होती है जिसे हिंदी में झींगा और अंग्रेजी में रिज गॉर्ड (Ridge Gourd) कहा जाता है।

अनेक भाषाओं में तोरई के नाम (Torai Called in Different Languages)

तोरई (zucchini in hindi) का वानस्पतिक नाम लूफा ऐकटेंगुला (Syn-Luffa amara Roxb., Luffa acutangula (Linn.) Roxb.) है और यह कुकुरबिटेसी (Cucurbitaceae) कुल का है। तोरई को देश विदेश में अनेक नामों से भी जाना जाता है, जो ये हैंः-
Torai in-
  • English – रिजड् गुऍर्ड (Ridged gourd), एंगल्ड लूफाह (Angled loofah) Ribbed gourd (रिब्ड गुऍर्ड)
  • Sanskrit  – पीतपुष्पा, जालिनी, कृतवेधना, कोशातकी तथा राजिमत्फला
  • Hindi – झिगानी, झींग्रा तोरी, काली तोरी, तोरई, तरोई, तुरई
  • Urdu- तोरई(Torai)
  • Oriya – जान्ही (Janhi)
  • Gujarati – तुरिया (Turiya), घिसोडा (Ghisoda), तुरीन (Turin)
  • Tamil – पिरकान्कई (Pirkankai), पिकून्कई (Pikunkai), पेयप्पीचुक्कू (Peyppichukku);
  • Telugu – बीराकया (Birakaya), बुरकई (Burkai)
  • Bengali – घोषा लता (Ghosha lata), झिंगा (Jhinga)
  • Nepali – रामतोरई (Ramtorai)
  • Marathi – दोडकी (Dodaki), शिरोला (Shirola)
  • Malayalam – द्जीन्जी (Djinji) पुइचेन्ग्गाह (Puichenggah)
  • Persian – खियार (Khiyar)

तोरई के फायदे (Torai Benefits and Uses)

तोरई (ridge gourd) का औषधीय प्रयोग, प्रयोग के तरीके और विधियां ये हैं–

सिर के रोग में फायदेमंद तोरई का प्रयोग (Benefits of Torai in Relief from Headache in Hindi)

तोरई (turai ki sabzi) के पत्तों के रस से गेहूँ के आटे को गूँथ कर उसकी बाटियाँ बनाकर उन्हें चूर लें। उसमें घी और शक्कर मिलाकर लड्डू की तरह बना लें। इसे खाने से अनन्त वात नामक सिर के रोग में लाभ होता है। कच्ची कड़वी तोरई (ridge gourd) को पीसकर कनपटी पर लगाने से भी सिर के दर्द से आराम (ridge gourd benefits) मिलता है। सिर दर्द में तुरई के फायदे बहुत आराम पहुँचाते हैं।
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आँखों के रोग में तोरई के इस्तेमाल से फायदा (Torai Benefits in Cure Eye Disease in Hindi)

कड़वी तोरई (zucchini in hindi) के बीजों को मीठे तोरई तेल में घिसकर आंखों में काजल की भांति लगाने से काला मोतियाबिंद ठीक होता है। तोरई के पत्तों (taroi) को पीसकर उसका रस निकाल लें।  इसे 1-2 बूंद आँखों में लगाने से आँखों के विभिन्न रोगों में लाभ होता है।
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तोरई के चूर्ण को बवासीर के मस्सों पर लगाएं या गुड़ के साथ चूर्ण की बत्ती बनाकर गुदा में रखने से बवासीर समाप्त हो जाता है। कड़वी तुम्बी, इंद्रवारुणी तथा तोरई चूर्ण में गुड़ मिलाकर उसकी बत्ती बनाकर गुदा में रखने से बवासीर में लाभ होता है।
बैंगन के फल को तोरई (tori ki sabji)के क्षारीय जल में पकाने के बाद घी में भूनकर खाएं। इसके साथ में छाछ पीने से पुरानी बवासीर में बहुत लाभ होता है।
कड़वी तोरई (turai) के रस में हल्दी चूर्ण मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से बवासीर में लाभ होता है।
तोरई के पत्तों (zucchini in hindi) को पीसकर बवासीर के मस्सों में लगाने से दर्द समाप्त होता है।
इसे लगाने से शीतपित्त, दाद और कुष्ठ आदि त्वचा के विभिन्न रोगों में भी लाभ (ridge gourd benefits)होता है।
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तोरई के उपयोग से पीलिया का उपचार (Uses of Torai in Fighting with Jaundice in Hindi)

तोरई फल (taroi) के चूर्ण को नाक में डालने से पीलिया रोग में लाभ होता है। तोरई का चूर्ण पीलिया के लक्षणों से राहत दिलाने में मदद (ridge gourd benefits)करती है।

तिल्ली बढ़ने पर करें तोरई का सेवन (Turai Uses in Spleen Treatment in Hindi)

तोरई के बीजों (zucchini in hindi)को पीसकर गर्म करके पेट पर लेप करने से बढ़ी हुई तिल्ली ठीक होती है।
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मधुमेह (डायबिटीज) में तोरई से फायदा (Benefits of Torai in Control Diabetes in Hindi)

तोरई की सब्जी (zucchini in hindi)अथवा तोरई के ताजे फल के 10-15 मि.ली. रस का सेवन करें। इससे मधुमेह (डायबिटीज) तथा एडरिनल ग्लैंड यानी अधिवृक्क-ग्रन्थि से जुड़े विकार दूर होता है।
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पेट के रोग में तोरई से लाभ (Turai Benefits in Treating Abdominal Problem in Hindi)

तोरई की जड़ के चूर्ण का 1-2 ग्राम खाने से जलोदर रोग ठीक होता है। तोरई के पत्ते को पीसकर लहसुन के साथ मिलाकर लेप करने से जलोदर रोग में लाभ होता है।
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तोरई के प्रयोग से यौन रोग का इलाज (Torai is Beneficial in Sexual Disease in Hindi)

हरड़, तोरई (turai) तथा समुद्रफेन चूर्ण से बनी बत्ती को घिसकर लगाएं। इससे पुरुष के लिंग पर हुए घाव ठीक हो जाता है।
10-15 मि.ली. तोरई के फल के रस को दही में मिलाकर प्रयोग करने से महिलाओं की योनि के घाव (योन्यर्श) ठीक होते हैं।
तोरई के जड़ के चूर्ण, सारिवा जड़ का चूर्ण तथा जपा जड़ के चूर्ण को समान मात्रा में मिला लें। उसमें जीरा मिला लें और इस चूर्ण को 1-2 ग्राम मात्रा में शक्कर मिलाए दूध के साथ सेवन करने से सूजाक यानी गोनोरिया में लाभ होता है।
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मासिक धर्म विकार में फायदेमंद तोरई का उपयोग (Torai Help in Menstrual Disorder in Hindi)

10-20 मिली तोरई (turai) पत्ते के काढ़ा का सेवन करने से रुके हुए मासिक धर्म की परेशानी ठीक होती है। इससे पेशाब में खून का आना भी बंद होता है।
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गर्भनिरोधक के रूप में काम करता है तोरई (Turai Act as a Contraceptive in Hindi)

तोरई (ribbed gourd) के चूर्ण में शहद मिलाकर योनि में लेप करने से गर्भ नहीं ठहरता है।

कुष्ठ रोग के इलाज में करें तोरई का इस्तेमाल (Torai Treats Leprosy in Hindi)

तोरई तेल की मालिश करने से कुष्ठ रोगों में लाभ होता है। तोरई के फल से बीज एवं गूदा निकालकर उसमें जल भरकर रात भर रख दें। सुबह 10-15 मिली की मात्रा में इस जल को पीने से कुष्ठ रोग में फायदा होता है। सर्षप, करंज, कोशातकी, इंगुदी तथा खदिर चूर्ण को मिलाकर लेप बनाकर लगाने से भी कुष्ठ रोग में लाभ होता है।

अनचाहे बाल को हटाने में तोरई का प्रयोग लाभदायक (Torai is Beneficial in Waxing in Hindi)

गुप्त स्थानों से बालों को हटा कर वहां तोरई (turai) की बीज के तेल को लगाने से बाल दोबारा नहीं आते हैं।

त्वचा रोग में तोरई से लाभ (Turai Uses in Skin Disease in Hindi)

तोरई के बीजों (zucchini in hindi)को पीसकर लगाने से त्वचा रोगों में लाभ होता है। तोरई पञ्चाङ्ग को पीसकर लेप करने से त्वचा की जलन, खुजली आदि विकार ठीक होते हैं।

हृदय को स्वस्थ बनाने में तोरई फायदेमंद (Turai Beneficial for Healthy Heart in Hindi)

एक रिसर्च के अनुसार नेनुआ में पाए जाने वाले फ्लेवनॉइड्स और टैनिन हृदय रोगों के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है।  

कैंसर के लक्षणों से लड़ने में फायदेमंद तोरई (Torai Benefits to Treat Cancer in Hindi)

एक रिसर्च के अनुसार नेनुआ में पाए जाने वाले फ्लेवनॉइड्स और टैनिन कैंसर रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है। इसके एंटी कैंसर गुण के कारण यह इस रोग में फायदेमंद होता है।  

आँखों को स्वस्थ रखने में लाभकारी तोरई (Torai Beneficial for Healthy Eye in Hindi)

एक रिसर्च के अनुसार तुरई में बीटा कैरोटीन तत्त्व पाए जाने के कारण यह आँखों के लिए अच्छा होता है। 

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण करने में लाभकारी तोरई (Turai is Beneficial to Control Cholesterol in Hindi)

कोलेस्ट्रॉल जैसी परेशानी पाचन तंत्र के खराब होने के कारण होती है और शरीर में आम एकत्रित होना शुरू हो जाता है। तुरई में पाए जाने वाले दीपन-पाचन गुण इस आम को पचाने में मदद करते है साथ ही इसमें मौजूद भेदन गुण मल को आसानी से बाहर निकालने में मदद करता है जिससे इस अवस्था में राहत मिलती है। 

 अस्थमा के इलाज में फायदेमंद तोरई (Torai Beneficial to Treat Asthma in Hindi)

अस्थमा एक ऐसा रोग है जिसमें वात और कफ दोष के असंतुलित होने के कारण श्वसन नली में बलगम के रूप में अवरोध उत्पन्न होता है। तुरई के उष्ण गुण के कारण यह इस बलगम को पिघला कर बाहर निकाल कर आराम दिलाता है।  

हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में लाभकारी तोरई (Turai Beneficial to Control High Blood Pressure in Hindi)

एक रिसर्च के अनुसार तुरई में सोडियम की मात्रा कम होने के कारण यह हाई ब्लड प्रेशर को भी कम या नियंत्रित करने में मदद करता है।  

स्वास्थ्य को उत्तम बनाता है तोरई (Turai is Beneficial for Good Health in Hindi)

तोरई (turai), आँवला तथा वच चूर्ण को बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। इसे 1-2 ग्राम की मात्रा में ले, उसमें घी तथा मधु मिलाकर सेवन करने से बुद्धि, स्मृति आदि रसायन गुणों की वृद्धि होती है।

कीड़े-मकौड़ों के विष को उतारने के लिए करें तोरई का प्रयोग (Torai Benefits in Insect Biting in Hindi)

  • यदि चूहा काट ले तो 10-20 मि.ली. तोरई के काढ़े में दो ग्राम देवदाली फल चूर्ण तथा दही मिलाकर पिएं। इससे उलटी के रास्ते विष बाहर निकल जाता है
  • बराबर मात्रा में कूठ, वच, मदनफल तथा तोरई फल के चूर्ण को मिला लें। इस 2-4 ग्राम चूर्ण को गोमूत्र के साथ पीने से अथवा 10-20 मिली तोरई फल काढ़े को पीने से सभी प्रकार के चूहे के विष का असर खत्म हो जाता है।
  • तोरई (ribbed gourd) के तने को पीसकर काटे हुए स्थान पर लगाने से दर्द, जलन और सूजन आदि जहरीला प्रभाव नष्ट होते हैं।
  • तोरई के फल के रस को काटे गए स्थान पर लगाने से कई प्रकार के विषैले जानवरों के विष का प्रभाव नष्ट हो जाता है।
  • कुत्ते के काटने पर कड़वी तोरई के गूदे को पीस लें। इसे पिलाने से उलटी तथा शौच कुत्ते का विष उतर जाता है।

तोरई के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Turai?)

रस – 10-20 मि.ली.

तोरई के सेवन का तरीका (How to Use Torai?)

औषधि के रूप में तोरई (ribbed gourd) का प्रयोग करने के लिए चिकित्सक के परामर्शानुसार इस्तेमाल करें।

तोरई कहां पाई या उगाई जाती है (Where is  Torai Found or Grown?)

भारत के सभी स्थानों जैसे- बिहार, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, आसाम, तमिलनाडू एवं उत्तर-पश्चिमी हिमालयी आदि भागों में इसकी खेती की जाती है। भारत में इसके फलों का प्रयोग सब्जी (tori vegetable) बनाने के लिए किया जाता है।

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