Halaman

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क्र.सं. घटक द्रव्य प्रयोज्यांग अनुपात
1. शुद्ध पारद (Mercury) 1 भाग
2. शुद्ध गन्धक(Sulphur) 1 भाग
3. लौह भस्म 1 भाग
4. अभ्रक भस्म 1 भाग
5. शुद्ध सिंगिया 1 भाग
6. विष (Aconitum ferrox Wallex Seringe) फल 1 भाग
7. लवङ्ग (Syzygium aromaticum Linn.Merr.&Per.) पुष्प 1 भाग
8. शुण्ठी (Zingiber officinale Rosc.) कन्द 1 भाग
9. मरिच (Piper nigrum Linn.) फल 1 भाग
10. पिप्पली (Piper longum Linn.) फल 1 भाग
11. कुष्ठ (Acacia catechu Willd.) मूल 1 भाग
12. नागरमोथा (Cyperus rotundus Linn.) 1 भाग
13. हींग (Ferula narthex Boiss.) निर्यास 1 भाग
14. बृहत् एला (Amomum subulatum Roxb.) बीज 1 भाग
15. जाय फल (Myristica fragrans Houtt) 1 भाग
16. कायफल (Myrica esculenta Buch – Ham.) 1 भाग
17. हरीतकी (Terminalia chebula Retz.) फलमज्जा 1 भाग
18. विभीतकी (Terminalia bellirica Roxb.) फलमज्जा 1 भाग
19. आमलकी (Emblica officinalis Gaertn.) फलमज्जा 1 भाग
20. श्वेत जीरा (Cuminum cyminum Linn.) फल 1 भाग
21. कृष्ण जीरा (Carum bulbocastanum W.Koch.) फल 1 भाग
22. स्वर्जिका क्षार 1 भाग
23. यवक्षार 1 भाग
24. सैंधव लवण 1 भाग
25. काला नमक 1 भाग
26. सांभर लवण 1 भाग
27. सामुद्र लवण 1 भाग
28. निर्गुण्डी (Vitex negundo Linn.) पत्र Q.S. मर्दनार्थ
29. गूमा (Leucas cephalotes Spreng.) Q.S. मर्दनार्थ
30. अपामार्ग (Swertia chirayita (Roxb.ex Flem.) Q.S. मर्दनार्थ
31. आर्द्रक (Zingiber officinale Rosc.) कन्द Q.S. मर्दनार्थ
मात्रा- 250 मिली ग्राम
अनुपान- दशमूल क्वाथ, दुग्ध, जल।
गुण और उपयोग- प्रसूत रोग की यह सर्वोत्तम दवा है, स्वस्थ रहने के लिए स्त्रियों को साल में एक या दो सप्ताह इस वटी का सेवन करना चाहिए। प्रसूताओं में होने वाले ज्वर, मन्दाग्नि, आमदोष, शूल, वात प्रकोप, अतिसार, कफदोष में यह लाभदायक है।

Saubhagya Vati Prasuta: अमृत के सामान है सौभाग्य वटी- Acharya Balkrishan Ji (Patanjali)


क्र.सं. घटक द्रव्य प्रयोज्यांग अनुपात
1. शुद्ध पारद (Mercury) 1 भाग
2. शुद्ध गन्धक(Sulphur) 1 भाग
3. लौह भस्म 1 भाग
4. अभ्रक भस्म 1 भाग
5. शुद्ध सिंगिया 1 भाग
6. विष (Aconitum ferrox Wallex Seringe) फल 1 भाग
7. लवङ्ग (Syzygium aromaticum Linn.Merr.&Per.) पुष्प 1 भाग
8. शुण्ठी (Zingiber officinale Rosc.) कन्द 1 भाग
9. मरिच (Piper nigrum Linn.) फल 1 भाग
10. पिप्पली (Piper longum Linn.) फल 1 भाग
11. कुष्ठ (Acacia catechu Willd.) मूल 1 भाग
12. नागरमोथा (Cyperus rotundus Linn.) 1 भाग
13. हींग (Ferula narthex Boiss.) निर्यास 1 भाग
14. बृहत् एला (Amomum subulatum Roxb.) बीज 1 भाग
15. जाय फल (Myristica fragrans Houtt) 1 भाग
16. कायफल (Myrica esculenta Buch – Ham.) 1 भाग
17. हरीतकी (Terminalia chebula Retz.) फलमज्जा 1 भाग
18. विभीतकी (Terminalia bellirica Roxb.) फलमज्जा 1 भाग
19. आमलकी (Emblica officinalis Gaertn.) फलमज्जा 1 भाग
20. श्वेत जीरा (Cuminum cyminum Linn.) फल 1 भाग
21. कृष्ण जीरा (Carum bulbocastanum W.Koch.) फल 1 भाग
22. स्वर्जिका क्षार 1 भाग
23. यवक्षार 1 भाग
24. सैंधव लवण 1 भाग
25. काला नमक 1 भाग
26. सांभर लवण 1 भाग
27. सामुद्र लवण 1 भाग
28. निर्गुण्डी (Vitex negundo Linn.) पत्र Q.S. मर्दनार्थ
29. गूमा (Leucas cephalotes Spreng.) Q.S. मर्दनार्थ
30. अपामार्ग (Swertia chirayita (Roxb.ex Flem.) Q.S. मर्दनार्थ
31. आर्द्रक (Zingiber officinale Rosc.) कन्द Q.S. मर्दनार्थ
मात्रा- 250 मिली ग्राम
अनुपान- दशमूल क्वाथ, दुग्ध, जल।
गुण और उपयोग- प्रसूत रोग की यह सर्वोत्तम दवा है, स्वस्थ रहने के लिए स्त्रियों को साल में एक या दो सप्ताह इस वटी का सेवन करना चाहिए। प्रसूताओं में होने वाले ज्वर, मन्दाग्नि, आमदोष, शूल, वात प्रकोप, अतिसार, कफदोष में यह लाभदायक है।

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