Halaman

    Social Items

चावल का परिचय (Introduction of Chawal or Rice)

शायद ही कोई ऐसा होगा जो चावल न खाता हो। पूरे दक्षिण भारत, बिहार, बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, असम आदि प्रदेशों का मुख्य भोजन चावल ही है। भारत में प्राचीन काल से ही भोजन के रूप में चावल का सेवन किया जा रहा है। चावल को पकाकर तो खाया ही जाता है, साथ ही इससे अनेक प्रकार के व्यंजन भी बनाए जाते हैं। क्या आपको पता है कि चावल एक अनाज के साथ-साथ एक उत्तम औषधि भी है, और चावल के सेवन से ढेर सारे फायदे (Rice Ke Fayde) होते हैं। क्या आपको यह पता है कि सफेद चावल से ब्राउन राइस (Brown rice) अधिक फायेदमंद होता है।
आयुर्वेदिक के अनुसार, चावल में तत्काल उर्जा प्राप्त करने, ब्लड शुगर को स्थिर करने और बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने की क्षमता (chawal ke fayde) होती है। चावल के इस्तेमाल से पीलिया, बवासीर, उल्टी और दस्त सहित अनेक रोगों का इलाज किया जाता है। आइए जानते हैं कि आप रोगों में कैसे चावल के फायदे ले सकते हैं।

चावल क्या है? (What is Rice in Hindi?)

  • चावल एक प्रकार का अनाज है। धान के बीजों को चावल (Chaval in Hindi) कहते हैं। यह सीधा, छोटा, घास की प्रजाति का पौधा होता है। इसका तना 60-120 सेमी लम्बा, रेशेदार जड़ वाला, पत्तेदार, गोल एवं पीले रंग का होता है। इसके पत्ते सीधे, 30-60 सेमी लम्बे एवं 6-8 मिमी चौड़े अथवा अत्यधिक चपटे, रेखित तथा खुरदरे होते हैं।
  • इसके फूल 8-12 मिमी लम्बे गुच्छों में होते हैं। इसकी बाली 7.5-12.5 सेमी लम्बी, एकल या 2-7 के गुच्छों में प्रायः नीचे की ओर झुकी हुई, हरी तथा पकने पर चमकीली सुनहली पीली होती है।
  • घास जैसा हरा अथवा पके हुए धूसर रंग के फल को ही धान कहते हैं। इसी धान से चावल निकालते हैं। इनके दाने सफेद रंग के होते हैं, जिन्हें चावल कहते हैं। 
  • भारत में अधिकांश स्थानों पर वर्ष में एक बार, तथा कुछ स्थानों पर धान की फसल वर्ष में दो या तीन बार भी ली जाती है। चावल के अलावा धान के और भी कई उत्पाद हैं जैसे, चूड़ा या पोहा, लावा आदि। 
  • ब्राउन राइस को भूरा चावल (Brown rice) भी कहा जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी. मैंगनीज, फास्फोरस, आयरन, फाइबर, फैटी एसिड आदि सफेद चावल की तुलना में दोगुने मात्रा में होते हैं। 
  • धान के पौधे की आयु तीन से चार महीने की होती है। यहां चावल या  ब्राउन राइस से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों (Brown rice in hindi) में लिखा गया है ताकि आप चावल से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं।

अन्य भाषाओं में चावल के नाम (Name of Rice in Different Languages)

चावल का वानस्पतिक (लैटिन) नाम ओराइजा सैटाइवा (Oryza sativa Linn. & Syn- Oryza plena (Prain) Chowdhury) है। यह पोएसी (Poaceae) कुल का पौधा है। अन्य भाषाओं में चावल के नाम नीचे दिए गए हैः-
Rice in –
  • Hindi – चावल, धान 
  • English – Rice (राइस), एशियन राइस (Asian rice), वाइल्ड राइस (Wild rice), पैडी (Paddy) 
  • Sanskrit – शालिधान्यम्, व्रीहि, तण्डुल, षष्टिक
  • Oriya – चाउल (Chaul), धान (Dhan) 
  • Kannada – भट्टा (Bhatta)
  • Gujarati – भात (Bhat), चोखा (Chokha)
  •  Tamil – अरशी (Arishi), नेल्लु (Nellu)
  • Telugu – धान्यमु (Dhanyamu), वडलु (Vudlu)
  • Bengali – धान (Dhan), चांवोल (Chanvol)
  • Nepali – धान (Dhan)
  • Punjabi – धाम (Dham), मुंजी (Munji), ताइ (Tai) 
  • Marathi – तांदूल (Tandula), भात (Bhat)
  • Malayalam – अरी (Ari), नेल्लु (Nellu)
  • Arabic – अर्रूज (Arruz), अर्ज (Arz)
  • Persian – बिरांज (Biranj)

चावल का औषधीय गुण (Medicinal Properties of Rice in Hindi)

आयुर्वेदिक के अनुसार, चावल में तत्काल उर्जा प्राप्त करने, ब्लड शुगर को स्थिर करने और बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने की क्षमता (chawal ke fayde) होती है। चावल के इस्तेमाल से पीलिया, बवासीर, उल्टी और दस्त सहित अनेक रोगों का इलाज किया जाता है। 
  • शालि चावल पचने पर मधुर, पेट को ठण्डा करता है। यह फाइवरयुक्त, तैलीय, जल्द पचने वाला और वात तथा कफ को बढ़ाने वाला होता है। यह पित को शान्त करता है। यह शरीर को बल देता है और मेद तथा माँस की वृद्धि करता है। यह वीर्य को पुष्ट करता है। यह मल को बान्धता है और पेशाब को बढ़ाता है। यह गले की आवाज को ठीक करता है।
  • लाल शालि चावल सभी शालि धान्यों में श्रेष्ठ तथा वात पित और कफ तीनों दोषों को शान्त करने वाला होता है। उपरोक्त गुणों के अलावा यह भूख बढ़ाता है। हृदय को प्रसन्न करता है। यह आँखों के लिए लाभकारी है। यह बुखार और बुखार के कारण लगने वाली प्यास को समाप्त करता है। यह दम फुलना, खाँसी और जलन को समाप्त करता है। इसकी जड़ में भी लगभग यही गुण होते हैं।

चावल के फायदे और उपयोग (Rice Benefits and Uses in Hindi)

चावल खाने के अनेक फायदे (Chawal Ke Fayde) हैं। सफेद चावलों के मुकाबले भूरे चावल (Brown Rice) ज्यादा फायदेमन्द होते हैं। विभिन्न बीमारियों में चावल के प्रयोग की विधि ये हैंः-

चावल के औषधीय गुण से स्तनों में दूध की वृद्धि (Benefits of Rice in Breastfeeding in Hindi)

शालि चावल के बारीक टुकड़ों को दूध के साथ पकाकर पतली खीर बना लें। इस खीर को खाने से स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध की वृद्धि होती है।

उल्टी रोकने में चावल का औषधीय गुण फायदेमंद  (Benefits of Rice to Stop Vomiting in Hindi)

  • चावल का धान पेट के लिए काफी लाभकारी होता है। धान के लावा का सेवन करने से उल्टी बन्द होती है।
  • धान के लावे से बने सत्तू् में मधु तथा घी मिलाकर सेवन करने से उल्टी पर रोक लगती है।
  • शालिधान के लावे की दलिया में मधु मिलाकर सेवन करने से उल्टी बन्द हो जाती है।
  • धान का लावा, कपित्थ, मधु और पिप्पली की जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण (rice flour) बना लें। इस चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करने से सभी प्रकार की उल्टी तथा भूख न लगने की समस्या ठीक होती है।

चावल के औषधीय गुण से दस्त पर रोक (Benefits of Rice to Treat Dysentery in Hindi)

  • गन्ने से बने शक्कर को घी में भूनकर पीस लें। इसमें लावे का चूर्ण, मिश्री एवं मधु मिलाकर सेवन करने से खून और पेट की गर्मी से होने वाली दस्त पर रोक (chawal ke fayde) लगती है।
  • चावल को पकाकर (भात बनाकर) तक्र (छाछ) के साथ सेवन करने से गर्मी, अत्यधिक प्यास, जी मिचलाने की समस्या तथा दस्त में लाभ होता है।

पेट में कीड़े होने पर चावल के फायदे (Rice Benefits to Treat Stomach Bugs in Hindi)

पेट में कीड़े हो जाए तो यह बहुत ही दुखदायी होता है। यह समस्‍या सबसे अधिक बच्‍चों को होती है। बड़ों को भी आंतों में भी कीड़े हो सकते हैं। ये कीड़े लगभग 20 प्रकार के होते हैं। चावल को भूनकर उनको रातभर के लिए पानी में भिगो दें। सुबह छानकर चावल के पानी को पीने से पेट के सभी प्रकार के कीड़े मर (chawal ke fayde) जाते हैं।

पीलिया में चावल के फायदे (Rice Benefits in Jaundice in Hindi)

लिवर तथा तिल्ली से जुड़ी समस्या होने से पीलिया रोग होता है। रोजाना भोजन में शालि चावल का भात खाएँ। इससे लीवर और तिल्ली दोनों ही ठीक होते हैं, और पीलिया रोग दूर होता है।

बवासीर में चावल के फायदे (Rice Benefits in Piles Treatment in Hindi)

बवासीर मुख्यतः पेट की खराबी के कारण होने वाली बीमारी है। भोजन के सही से न पचने और पेट की गर्मी से बवासीर रोग को बढ़ावा मिलता है। शालि एवं साठी चावल का सेवन खूनी बवासीर में लाभकारी होता है।

मूत्र रोग (पेशाब की समस्याएं) में ब्राउन राइस से लाभ (Brown Rice Benefits in Urinal Disease in Hindi)

पेशाब में होने वाली जलन तथा पेशाब में दर्द आदि की समस्याओं में चावल काफी फायदेमंद (Chawal Ke Fayde) हैं। शतावर, काश, कुश, गोखरू, विदारीकन्द, शालिधान (शालिचावल), ईख तथा कसेरू को बराबर मात्रा में लें। इसे चार गुने पानी में रात भर भिगो दें। इस पानी की 20-40 मिली हिम, मधु एवं शर्करा मिलाकर सेवन करें। इससे पित के कारण पेशाब में होने वाली परेशानियों में लाभ होता है।

हड्डियों के टूटने पर ब्राउन राइस से लाभ (Brown Rice Benefits in Bone Fracture in Hindi)

टूटी हुई हड्डियों के स्थान पर घास बांधकर, शालि चावल के आटे और शतधौत घी को मिलाकर लेप कर दें। इससे टूटी हड्डियां जुड़ जाती हैं।

मासिक धर्म विकार में ब्राउन राइस से लाभ (Brown Rice Benefits in Metrorrhagia Treatment in Hindi)

मासिक धर्म के दौरान ज्यादा रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हो रही हो तो यह उपाय करें। रोजाना दूध में भिगोए हुए लाल शालि चावल को पीस (brown rice flour ke fayde) लें। इसमें मधु मिलाकर सेवन करने से तेज रक्तप्रदर में जल्द लाभ होता है।

पैरों की जलन और सूजन में ब्राउन राइस के फायदे (Benefits of Brown Rice in Foot Inflammation in Hindi)

चावल विशेषकर ब्राउन राइस में फेनोलिक यौगिक और एंटी-इंफ्लामैट्री गुण होते हैं, इसलिए यह त्‍वचा की जलन और लाली को भी दूर करने में मदद करते हैं।
  • शालि चावल के धुले हुए पाने से पैरों को धोने पर पैरों की जलन शांत होती है।
  • शालि चावल को पीसकर पैरों में लगाने से पैरों की सूजन तथा जलन मिट (brown rice benefits) जाती है।
  • आग से जले हुए स्थान पर शालि चावल को पीसकर लेप करने से जलन शान्त होती है।

फोड़ा होने पर ब्राउन राइस से लाभ (Benefits of Brown Rice to Cure Abscess in Hindi)

शालि चावल को पीसकर लगाने से फोड़े, फुन्सी तथा रोमकूप शोथ (बलतोड़) में लाभ होता है।

चेहरे की झाई की परेशानी में ब्राउन राइस से लाभ (Benefits of Brown Rice in Pigmentation  in Hindi)

चावलों में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। सफेद चावलों को पानी में भिगो दें। उस पानी से चेहरे को धोने से चेहरे की झुर्रियाँ तथा झाइयां मिटती हैं।

रक्तपित्त (नाक-कान आदि से खून बहना) में चावल के फायदे (Rice Uses for Haemoptysis in Hindi)

  • रक्तपित्त यानी खूनी पित्त में शरीर गर्म हो जाता है। इससे खून नाक, गुदा और मूत्रद्वार आदि स्थानों से बाहर आने लगता है। इस रोग अंग्रेजी में हैमेटाइसिस कहते हैं। धान के लावा के चूर्ण (rice flour) में गाय का घी एवं मधु मिलाकर खाने से रक्तपित्त (खून की गर्मी) में लाभ होता है।
  • शालि चावल तथा साठी चावल का भोजन में प्रयोग रक्तपित्त के रोगियों के लिए फायदेमंद है।

बुखार में चावल के फायदे (Rice Uses in Fighting with Fever in Hindi)

बुखार होते ही लोग चावल का सेवन बंद कर देते हैं, लेकिन यदि हम शालि चावल का प्रयोग करें तो यह बुखार को दूर करने में भी लाभकारी होता है।
  • गोक्षुर तथा छोटी कटेरी के काढ़े से लाल शालि-चावल की पेय बनाकर सेवन करें। इससे बुखार के कारण उत्पन्न होने वाली पसलियों के दर्द, पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द तथा सरदर्द की समस्या आदि में लाभ (brown rice benefits) होता है।
  • जलन, उल्टी तथा अत्यधिक प्यास से पीड़ित रोगी को धान के लावे के सत्तू में शक्कर तथा मधु मिलाकर सेवन कराने से लाभ होता है।
  • पुराने शालि चावल तथा साठी चावल से बनाए गए दलिया तथा भात आदि का सेवन बुखार में फायदेमंद होता है।

दस्त होने पर चावल खाने के फायदे (Benefits of Rice to Get Relief from Diarrhoea in Hindi)

अगर आप को डायरिया की समस्या है और आप कुछ ऐसा खाने की सोच रहे है जो कि  आपको फ़ायदा करे तो चावल का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार मधुर और कषाय रस होता है जो कि डायरिया होने वाली मल प्रवृति को नियंत्रित करता है साथ ही लघु होने  से जल्दी पच भी जाता है । 


ग्लूटेन मुक्त होने में चावल फायदेमंद (Rice Beneficial in Gluten free Diet in Hindi)

जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी होती है वो ग्लूटेन मुक्त खाने की खोज करते है।  उनके लिए चावल एक अच्छा ग्लूटेन मुक्त आहार है यानि वह चावल को अपनी खाने की सूची में जोड़ सकते है। 

बॉडी बिल्डिंग में चावल खाने के फायदे (Benefits of Rice in Body Building in Hindi)

चावल का प्रयोग आप शरीर को पुष्ट बनाने के लिए कर सकते है, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार चावल में वृष्य और बृहण गुण होते है जो कि शरीर को पुष्ट करने में मदद करते है। 

पाचन समस्याओं में चावल खाने के फायदे (Rice Beneficial in Digestive System in Hindi)

अगर आपको पाचन संबंधी समस्या है तो चावल का प्रयोग आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार चावल लघु यानि पचने में हल्के होते है जो कि पाचक अग्नि के कमजोर होने पर भी शीघ्र पच कर आपको फायदा पहुंचा सकते हैं।

पेचिश में फायदेमंद चावल (Benefit of Rice in Dysentry in Hindi)

आप पेचिश की समस्या से परेशान है और खाने में क्या ले, ये सोच रहे है तो आपके लिए चावल का सेवन फ़ायदा दे सकता है। इसमें कषाय और लघु गुण होने से ये पेचिश में मल प्रवृति को नियंत्रित करता है साथ ही लघु यानि हल्का होने से ये जल्दी  पच जाता है।

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में चावल खाने के फायदे (Rice Beneficial to Treat High Blood Pressure in Hindi)


ब्लड प्रेशर की समस्या वाले लोगों के लिए चावल का सेवन फायदेमंद हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार चावल का सेवन ब्लड प्रेशर में फ़ायदेमंद होता है। 

बालों के लिए चावल के पानी के फायदे (Benefit of Rice Water for Hair in Hindi)

बालों से संबंधी समस्याओं को दू करने के लिए चावल के पानी का प्रयोग फायदेमंद होता है, क्योंकि चावल के कषाय गुण के कारण चावल का पानी बालों की जड़ों को मजबूती प्रदान करता है। 

चावल के उपयोगी हिस्से (Useful Parts of Rice in Hindi)

आप चावल के पेड़ इन भागों का इस्तेमाल कर सकते हैंः-
  • धान के पौधे की जड़
  • बीज यानी चावल
  • चावल का आटा (rice flour)

सफेद चावल या ब्राउन राइस का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Rice or Brown Rice?)

यहां चावल या  ब्राउन राइस से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों (Brown rice in hindi) में लिखा गया है ताकि आप चावल से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं, लेकिन औषधि के रूप में चावल का प्रयोग करने के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

सफेद चावल या ब्राउन राइस के नुकसान और सावधानियाँ (Chawal ke Nuksan in Hindi)

हालांकि चावल काफी लाभकारी धान्य है, लेकिन चावल को खाने के कुछ नुकसान (Rice Khane Ke Nuksan) भी हैं, जो ये हैंः-
  • पथरी तथा मधुमेह के रोगियों को चावल नहीं खाना चाहिए।
  • हालांकि चावल खून में रक्तशर्करा यानी चीनी के स्तर को नियंत्रित करता है, लेकिन मधुमेह के रोगियों को चावल का सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए। उन्हें केवल लाल या भूरे चावल (brown rice) ही खाने चाहिए।
  • मधुमेह (डायबिटीज) रोगियों को सफेद चावल बिल्कुल भी नहीं खाने चाहिए।
  • चावल खाने से शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है, इसलिए यह मोटापे को नियंत्रित करने में सहयोगी होता है, लेकिन इसका अधिक सेवन करने से मोटापा बढ़ भी सकता है।

चावल कहाँ पाया या उपजाया जाता है? (Where to Rice Found or Grown?)

चावल के कई अलग-अलग प्रकार के चावल जैसे-लम्बे चावल, सफेद चावल, ब्राउन चावल, बासमती चावल आदि होते हैं। अकेले भारत में लगभग 4000 प्रकार के चावल उपजाए जाते हैं। चावल मूलतः भारत एवं चीन में पाया जाता है। विश्व के सभी उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्ण-कटिबंधीय देशों में धान यानी चावल की खेती की जाती है। भारत में सर्वत्र उष्ण प्रदेशों में मुख्यत उत्तर भारत, राजस्थान, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, पहाड़ी क्षेत्रों एवं मध्य भारत में इसकी खेती की जाती है।

Rice: करिश्माई ढंग से फायदा करता है चावल

चावल का परिचय (Introduction of Chawal or Rice)

शायद ही कोई ऐसा होगा जो चावल न खाता हो। पूरे दक्षिण भारत, बिहार, बंगाल, झारखंड, उड़ीसा, असम आदि प्रदेशों का मुख्य भोजन चावल ही है। भारत में प्राचीन काल से ही भोजन के रूप में चावल का सेवन किया जा रहा है। चावल को पकाकर तो खाया ही जाता है, साथ ही इससे अनेक प्रकार के व्यंजन भी बनाए जाते हैं। क्या आपको पता है कि चावल एक अनाज के साथ-साथ एक उत्तम औषधि भी है, और चावल के सेवन से ढेर सारे फायदे (Rice Ke Fayde) होते हैं। क्या आपको यह पता है कि सफेद चावल से ब्राउन राइस (Brown rice) अधिक फायेदमंद होता है।
आयुर्वेदिक के अनुसार, चावल में तत्काल उर्जा प्राप्त करने, ब्लड शुगर को स्थिर करने और बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने की क्षमता (chawal ke fayde) होती है। चावल के इस्तेमाल से पीलिया, बवासीर, उल्टी और दस्त सहित अनेक रोगों का इलाज किया जाता है। आइए जानते हैं कि आप रोगों में कैसे चावल के फायदे ले सकते हैं।

चावल क्या है? (What is Rice in Hindi?)

  • चावल एक प्रकार का अनाज है। धान के बीजों को चावल (Chaval in Hindi) कहते हैं। यह सीधा, छोटा, घास की प्रजाति का पौधा होता है। इसका तना 60-120 सेमी लम्बा, रेशेदार जड़ वाला, पत्तेदार, गोल एवं पीले रंग का होता है। इसके पत्ते सीधे, 30-60 सेमी लम्बे एवं 6-8 मिमी चौड़े अथवा अत्यधिक चपटे, रेखित तथा खुरदरे होते हैं।
  • इसके फूल 8-12 मिमी लम्बे गुच्छों में होते हैं। इसकी बाली 7.5-12.5 सेमी लम्बी, एकल या 2-7 के गुच्छों में प्रायः नीचे की ओर झुकी हुई, हरी तथा पकने पर चमकीली सुनहली पीली होती है।
  • घास जैसा हरा अथवा पके हुए धूसर रंग के फल को ही धान कहते हैं। इसी धान से चावल निकालते हैं। इनके दाने सफेद रंग के होते हैं, जिन्हें चावल कहते हैं। 
  • भारत में अधिकांश स्थानों पर वर्ष में एक बार, तथा कुछ स्थानों पर धान की फसल वर्ष में दो या तीन बार भी ली जाती है। चावल के अलावा धान के और भी कई उत्पाद हैं जैसे, चूड़ा या पोहा, लावा आदि। 
  • ब्राउन राइस को भूरा चावल (Brown rice) भी कहा जाता है। इसमें कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी. मैंगनीज, फास्फोरस, आयरन, फाइबर, फैटी एसिड आदि सफेद चावल की तुलना में दोगुने मात्रा में होते हैं। 
  • धान के पौधे की आयु तीन से चार महीने की होती है। यहां चावल या  ब्राउन राइस से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों (Brown rice in hindi) में लिखा गया है ताकि आप चावल से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं।

अन्य भाषाओं में चावल के नाम (Name of Rice in Different Languages)

चावल का वानस्पतिक (लैटिन) नाम ओराइजा सैटाइवा (Oryza sativa Linn. & Syn- Oryza plena (Prain) Chowdhury) है। यह पोएसी (Poaceae) कुल का पौधा है। अन्य भाषाओं में चावल के नाम नीचे दिए गए हैः-
Rice in –
  • Hindi – चावल, धान 
  • English – Rice (राइस), एशियन राइस (Asian rice), वाइल्ड राइस (Wild rice), पैडी (Paddy) 
  • Sanskrit – शालिधान्यम्, व्रीहि, तण्डुल, षष्टिक
  • Oriya – चाउल (Chaul), धान (Dhan) 
  • Kannada – भट्टा (Bhatta)
  • Gujarati – भात (Bhat), चोखा (Chokha)
  •  Tamil – अरशी (Arishi), नेल्लु (Nellu)
  • Telugu – धान्यमु (Dhanyamu), वडलु (Vudlu)
  • Bengali – धान (Dhan), चांवोल (Chanvol)
  • Nepali – धान (Dhan)
  • Punjabi – धाम (Dham), मुंजी (Munji), ताइ (Tai) 
  • Marathi – तांदूल (Tandula), भात (Bhat)
  • Malayalam – अरी (Ari), नेल्लु (Nellu)
  • Arabic – अर्रूज (Arruz), अर्ज (Arz)
  • Persian – बिरांज (Biranj)

चावल का औषधीय गुण (Medicinal Properties of Rice in Hindi)

आयुर्वेदिक के अनुसार, चावल में तत्काल उर्जा प्राप्त करने, ब्लड शुगर को स्थिर करने और बुढ़ापे की प्रक्रिया को धीमा करने की क्षमता (chawal ke fayde) होती है। चावल के इस्तेमाल से पीलिया, बवासीर, उल्टी और दस्त सहित अनेक रोगों का इलाज किया जाता है। 
  • शालि चावल पचने पर मधुर, पेट को ठण्डा करता है। यह फाइवरयुक्त, तैलीय, जल्द पचने वाला और वात तथा कफ को बढ़ाने वाला होता है। यह पित को शान्त करता है। यह शरीर को बल देता है और मेद तथा माँस की वृद्धि करता है। यह वीर्य को पुष्ट करता है। यह मल को बान्धता है और पेशाब को बढ़ाता है। यह गले की आवाज को ठीक करता है।
  • लाल शालि चावल सभी शालि धान्यों में श्रेष्ठ तथा वात पित और कफ तीनों दोषों को शान्त करने वाला होता है। उपरोक्त गुणों के अलावा यह भूख बढ़ाता है। हृदय को प्रसन्न करता है। यह आँखों के लिए लाभकारी है। यह बुखार और बुखार के कारण लगने वाली प्यास को समाप्त करता है। यह दम फुलना, खाँसी और जलन को समाप्त करता है। इसकी जड़ में भी लगभग यही गुण होते हैं।

चावल के फायदे और उपयोग (Rice Benefits and Uses in Hindi)

चावल खाने के अनेक फायदे (Chawal Ke Fayde) हैं। सफेद चावलों के मुकाबले भूरे चावल (Brown Rice) ज्यादा फायदेमन्द होते हैं। विभिन्न बीमारियों में चावल के प्रयोग की विधि ये हैंः-

चावल के औषधीय गुण से स्तनों में दूध की वृद्धि (Benefits of Rice in Breastfeeding in Hindi)

शालि चावल के बारीक टुकड़ों को दूध के साथ पकाकर पतली खीर बना लें। इस खीर को खाने से स्तनपान कराने वाली महिलाओं में दूध की वृद्धि होती है।

उल्टी रोकने में चावल का औषधीय गुण फायदेमंद  (Benefits of Rice to Stop Vomiting in Hindi)

  • चावल का धान पेट के लिए काफी लाभकारी होता है। धान के लावा का सेवन करने से उल्टी बन्द होती है।
  • धान के लावे से बने सत्तू् में मधु तथा घी मिलाकर सेवन करने से उल्टी पर रोक लगती है।
  • शालिधान के लावे की दलिया में मधु मिलाकर सेवन करने से उल्टी बन्द हो जाती है।
  • धान का लावा, कपित्थ, मधु और पिप्पली की जड़ को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण (rice flour) बना लें। इस चूर्ण में मधु मिलाकर सेवन करने से सभी प्रकार की उल्टी तथा भूख न लगने की समस्या ठीक होती है।

चावल के औषधीय गुण से दस्त पर रोक (Benefits of Rice to Treat Dysentery in Hindi)

  • गन्ने से बने शक्कर को घी में भूनकर पीस लें। इसमें लावे का चूर्ण, मिश्री एवं मधु मिलाकर सेवन करने से खून और पेट की गर्मी से होने वाली दस्त पर रोक (chawal ke fayde) लगती है।
  • चावल को पकाकर (भात बनाकर) तक्र (छाछ) के साथ सेवन करने से गर्मी, अत्यधिक प्यास, जी मिचलाने की समस्या तथा दस्त में लाभ होता है।

पेट में कीड़े होने पर चावल के फायदे (Rice Benefits to Treat Stomach Bugs in Hindi)

पेट में कीड़े हो जाए तो यह बहुत ही दुखदायी होता है। यह समस्‍या सबसे अधिक बच्‍चों को होती है। बड़ों को भी आंतों में भी कीड़े हो सकते हैं। ये कीड़े लगभग 20 प्रकार के होते हैं। चावल को भूनकर उनको रातभर के लिए पानी में भिगो दें। सुबह छानकर चावल के पानी को पीने से पेट के सभी प्रकार के कीड़े मर (chawal ke fayde) जाते हैं।

पीलिया में चावल के फायदे (Rice Benefits in Jaundice in Hindi)

लिवर तथा तिल्ली से जुड़ी समस्या होने से पीलिया रोग होता है। रोजाना भोजन में शालि चावल का भात खाएँ। इससे लीवर और तिल्ली दोनों ही ठीक होते हैं, और पीलिया रोग दूर होता है।

बवासीर में चावल के फायदे (Rice Benefits in Piles Treatment in Hindi)

बवासीर मुख्यतः पेट की खराबी के कारण होने वाली बीमारी है। भोजन के सही से न पचने और पेट की गर्मी से बवासीर रोग को बढ़ावा मिलता है। शालि एवं साठी चावल का सेवन खूनी बवासीर में लाभकारी होता है।

मूत्र रोग (पेशाब की समस्याएं) में ब्राउन राइस से लाभ (Brown Rice Benefits in Urinal Disease in Hindi)

पेशाब में होने वाली जलन तथा पेशाब में दर्द आदि की समस्याओं में चावल काफी फायदेमंद (Chawal Ke Fayde) हैं। शतावर, काश, कुश, गोखरू, विदारीकन्द, शालिधान (शालिचावल), ईख तथा कसेरू को बराबर मात्रा में लें। इसे चार गुने पानी में रात भर भिगो दें। इस पानी की 20-40 मिली हिम, मधु एवं शर्करा मिलाकर सेवन करें। इससे पित के कारण पेशाब में होने वाली परेशानियों में लाभ होता है।

हड्डियों के टूटने पर ब्राउन राइस से लाभ (Brown Rice Benefits in Bone Fracture in Hindi)

टूटी हुई हड्डियों के स्थान पर घास बांधकर, शालि चावल के आटे और शतधौत घी को मिलाकर लेप कर दें। इससे टूटी हड्डियां जुड़ जाती हैं।

मासिक धर्म विकार में ब्राउन राइस से लाभ (Brown Rice Benefits in Metrorrhagia Treatment in Hindi)

मासिक धर्म के दौरान ज्यादा रक्तस्राव (ब्लीडिंग) हो रही हो तो यह उपाय करें। रोजाना दूध में भिगोए हुए लाल शालि चावल को पीस (brown rice flour ke fayde) लें। इसमें मधु मिलाकर सेवन करने से तेज रक्तप्रदर में जल्द लाभ होता है।

पैरों की जलन और सूजन में ब्राउन राइस के फायदे (Benefits of Brown Rice in Foot Inflammation in Hindi)

चावल विशेषकर ब्राउन राइस में फेनोलिक यौगिक और एंटी-इंफ्लामैट्री गुण होते हैं, इसलिए यह त्‍वचा की जलन और लाली को भी दूर करने में मदद करते हैं।
  • शालि चावल के धुले हुए पाने से पैरों को धोने पर पैरों की जलन शांत होती है।
  • शालि चावल को पीसकर पैरों में लगाने से पैरों की सूजन तथा जलन मिट (brown rice benefits) जाती है।
  • आग से जले हुए स्थान पर शालि चावल को पीसकर लेप करने से जलन शान्त होती है।

फोड़ा होने पर ब्राउन राइस से लाभ (Benefits of Brown Rice to Cure Abscess in Hindi)

शालि चावल को पीसकर लगाने से फोड़े, फुन्सी तथा रोमकूप शोथ (बलतोड़) में लाभ होता है।

चेहरे की झाई की परेशानी में ब्राउन राइस से लाभ (Benefits of Brown Rice in Pigmentation  in Hindi)

चावलों में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। सफेद चावलों को पानी में भिगो दें। उस पानी से चेहरे को धोने से चेहरे की झुर्रियाँ तथा झाइयां मिटती हैं।

रक्तपित्त (नाक-कान आदि से खून बहना) में चावल के फायदे (Rice Uses for Haemoptysis in Hindi)

  • रक्तपित्त यानी खूनी पित्त में शरीर गर्म हो जाता है। इससे खून नाक, गुदा और मूत्रद्वार आदि स्थानों से बाहर आने लगता है। इस रोग अंग्रेजी में हैमेटाइसिस कहते हैं। धान के लावा के चूर्ण (rice flour) में गाय का घी एवं मधु मिलाकर खाने से रक्तपित्त (खून की गर्मी) में लाभ होता है।
  • शालि चावल तथा साठी चावल का भोजन में प्रयोग रक्तपित्त के रोगियों के लिए फायदेमंद है।

बुखार में चावल के फायदे (Rice Uses in Fighting with Fever in Hindi)

बुखार होते ही लोग चावल का सेवन बंद कर देते हैं, लेकिन यदि हम शालि चावल का प्रयोग करें तो यह बुखार को दूर करने में भी लाभकारी होता है।
  • गोक्षुर तथा छोटी कटेरी के काढ़े से लाल शालि-चावल की पेय बनाकर सेवन करें। इससे बुखार के कारण उत्पन्न होने वाली पसलियों के दर्द, पेट के निचले हिस्से में होने वाले दर्द तथा सरदर्द की समस्या आदि में लाभ (brown rice benefits) होता है।
  • जलन, उल्टी तथा अत्यधिक प्यास से पीड़ित रोगी को धान के लावे के सत्तू में शक्कर तथा मधु मिलाकर सेवन कराने से लाभ होता है।
  • पुराने शालि चावल तथा साठी चावल से बनाए गए दलिया तथा भात आदि का सेवन बुखार में फायदेमंद होता है।

दस्त होने पर चावल खाने के फायदे (Benefits of Rice to Get Relief from Diarrhoea in Hindi)

अगर आप को डायरिया की समस्या है और आप कुछ ऐसा खाने की सोच रहे है जो कि  आपको फ़ायदा करे तो चावल का सेवन फायदेमंद साबित हो सकता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार मधुर और कषाय रस होता है जो कि डायरिया होने वाली मल प्रवृति को नियंत्रित करता है साथ ही लघु होने  से जल्दी पच भी जाता है । 


ग्लूटेन मुक्त होने में चावल फायदेमंद (Rice Beneficial in Gluten free Diet in Hindi)

जिन लोगों को ग्लूटेन से एलर्जी होती है वो ग्लूटेन मुक्त खाने की खोज करते है।  उनके लिए चावल एक अच्छा ग्लूटेन मुक्त आहार है यानि वह चावल को अपनी खाने की सूची में जोड़ सकते है। 

बॉडी बिल्डिंग में चावल खाने के फायदे (Benefits of Rice in Body Building in Hindi)

चावल का प्रयोग आप शरीर को पुष्ट बनाने के लिए कर सकते है, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार चावल में वृष्य और बृहण गुण होते है जो कि शरीर को पुष्ट करने में मदद करते है। 

पाचन समस्याओं में चावल खाने के फायदे (Rice Beneficial in Digestive System in Hindi)

अगर आपको पाचन संबंधी समस्या है तो चावल का प्रयोग आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकता है क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार चावल लघु यानि पचने में हल्के होते है जो कि पाचक अग्नि के कमजोर होने पर भी शीघ्र पच कर आपको फायदा पहुंचा सकते हैं।

पेचिश में फायदेमंद चावल (Benefit of Rice in Dysentry in Hindi)

आप पेचिश की समस्या से परेशान है और खाने में क्या ले, ये सोच रहे है तो आपके लिए चावल का सेवन फ़ायदा दे सकता है। इसमें कषाय और लघु गुण होने से ये पेचिश में मल प्रवृति को नियंत्रित करता है साथ ही लघु यानि हल्का होने से ये जल्दी  पच जाता है।

ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में चावल खाने के फायदे (Rice Beneficial to Treat High Blood Pressure in Hindi)


ब्लड प्रेशर की समस्या वाले लोगों के लिए चावल का सेवन फायदेमंद हो सकता है। एक रिसर्च के अनुसार चावल का सेवन ब्लड प्रेशर में फ़ायदेमंद होता है। 

बालों के लिए चावल के पानी के फायदे (Benefit of Rice Water for Hair in Hindi)

बालों से संबंधी समस्याओं को दू करने के लिए चावल के पानी का प्रयोग फायदेमंद होता है, क्योंकि चावल के कषाय गुण के कारण चावल का पानी बालों की जड़ों को मजबूती प्रदान करता है। 

चावल के उपयोगी हिस्से (Useful Parts of Rice in Hindi)

आप चावल के पेड़ इन भागों का इस्तेमाल कर सकते हैंः-
  • धान के पौधे की जड़
  • बीज यानी चावल
  • चावल का आटा (rice flour)

सफेद चावल या ब्राउन राइस का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Rice or Brown Rice?)

यहां चावल या  ब्राउन राइस से होने वाले सभी फायदे के बारे को बहुत ही आसान शब्दों (Brown rice in hindi) में लिखा गया है ताकि आप चावल से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं, लेकिन औषधि के रूप में चावल का प्रयोग करने के लिए चिकित्सक की सलाह जरूर लें।

सफेद चावल या ब्राउन राइस के नुकसान और सावधानियाँ (Chawal ke Nuksan in Hindi)

हालांकि चावल काफी लाभकारी धान्य है, लेकिन चावल को खाने के कुछ नुकसान (Rice Khane Ke Nuksan) भी हैं, जो ये हैंः-
  • पथरी तथा मधुमेह के रोगियों को चावल नहीं खाना चाहिए।
  • हालांकि चावल खून में रक्तशर्करा यानी चीनी के स्तर को नियंत्रित करता है, लेकिन मधुमेह के रोगियों को चावल का सेवन बहुत ही सीमित मात्रा में करना चाहिए। उन्हें केवल लाल या भूरे चावल (brown rice) ही खाने चाहिए।
  • मधुमेह (डायबिटीज) रोगियों को सफेद चावल बिल्कुल भी नहीं खाने चाहिए।
  • चावल खाने से शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है, इसलिए यह मोटापे को नियंत्रित करने में सहयोगी होता है, लेकिन इसका अधिक सेवन करने से मोटापा बढ़ भी सकता है।

चावल कहाँ पाया या उपजाया जाता है? (Where to Rice Found or Grown?)

चावल के कई अलग-अलग प्रकार के चावल जैसे-लम्बे चावल, सफेद चावल, ब्राउन चावल, बासमती चावल आदि होते हैं। अकेले भारत में लगभग 4000 प्रकार के चावल उपजाए जाते हैं। चावल मूलतः भारत एवं चीन में पाया जाता है। विश्व के सभी उष्णकटिबंधीय एवं उपोष्ण-कटिबंधीय देशों में धान यानी चावल की खेती की जाती है। भारत में सर्वत्र उष्ण प्रदेशों में मुख्यत उत्तर भारत, राजस्थान, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा, पहाड़ी क्षेत्रों एवं मध्य भारत में इसकी खेती की जाती है।

No comments