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मूली (muli or mooli) तो आप खाते ही होंगे। मूली को मिलाकर कई तरह की सब्जियां बनाई जाती हैं। लंबी और पतली-सी दिखने वाली मूली को लोग बहुत पसंद से खाते हैं क्योंकि लोगों को यह पता है कि मूली के अनेक फायदे हैं। क्या आपको जानकारी है कि मूली एक औषधि भी है। कई रोगों के इलाज में मूली के औषधीय गुण से लाभ मिलता है। आप भी अगर मूली का इस्तेमाल करते हैं, और मूली के फायदे के बारे में नहीं जानते हैं तो आपको जरूर मूली से होने वाले लाभ (radish benefits) के बारे में जानना चाहिए।
आप कई बीमारियों में मूली के सेवन से स्वास्थ्य लाभ पा सकते हैं, और अनेक रोगों की रोकथाम (muli khane ke fayde) कर सकते हैं। आयुर्वेद में मूली के बारे में बहुत सारी बातें बताई गई हैं। आइए सबके बारे में जानते हैं।

मूली क्या है? (What is Radish in Hindi?)

भारत में मूली (mooli) को सब्जी के साथ-साथ सलाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। मूली के नए पत्ते देखने में सरसों के पत्तों जैसे होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं। फूल दिखने में सरसों के फूलों की तरह ही होते हैं।
रंगों के अनुसार, मूली दो प्रकार की होती है।
  1. सफेद मूली
  2. लाल मूली
इसके बीज और जड़ से सफेद रंग का तेल निकाला जाता है।


अन्य भाषाओं में मूली के नाम (Name of Radish in Different Languages)

मूली (mooligai) का वानस्पतिक नाम रॅफेनस् सेटाइवस ( Raphanus sativus Linn.,) है, और यह ब्रैसिकेसी (Brassicaceae) कुल की है। मूली को इसे देश-विदेश में इन नामों से भी बुलाया जाता हैः-
Muli in-
  • Hindi – मूली, मुरई
  • English – रेडिश ( Radish)
  • Sanskrit – लघुमूलक, मरुसंभव, चाणक्यमूलक, मूलिका, मूलक, दीर्घकन्दक, मृत्तिकाक्षार, हस्तिदन्त, भूमिकाक्षार, हस्तिदन्तक, दीर्घमूलक, दीर्घपत्तेक, मृक्षार, कन्दमूल
  • Urdu – मूली (Muli), मूलेकेबीज (Mulekebija);
  • Konkani – मूल्लो (Mullo);
  • Kannada – मुखङ्खी (Mukhangkhi), मूलांगी (Mulangi);
  • Gujarati – मुरा (Mura);
  • Tamil – मुल्लंगि (Mullangi), मूलिन्थी (Mulinthhi);
  • Telugu – मुल्लगिं (Mullangi), मूलांगी (Mulangi);
  • Bengali – मूला (Mula), मूली (Muli);
  • Nepali – मूला (Mula), मूलासिंकी (Mulasinki);
  • Punjabi – मूली (Muli), मुंग्रा (Mungra);
  • Marathi – मुला (Mula), मूरी (Muri);
  • Malayalam – मूल्लांगी (Mullangi)।
  • Arabic – फूजल (Fujl), हुजल (Hujal), बोकेल (Bokel), फिडजेल (Fidgel);
  • Persian – तुख (Tukh), तुर्ब (Turb), तुरूप (Turup), तुख्मेतुरूब (Tukhmeturub)

मूली के फायदे और उपयोग (Radish Benefits and Uses in Hindi)

मूली के फायदे (muli ke fayde) और औषधीय गुण, प्रयोग की मात्रा एवं विधियाँ ये हैंः-

हिचकी की परेशानी में मूली के फायदे (White Radish Benefits in Relief from Hiccup in Hindi)

मूली के फायदे हिचकी से राहत दिलाने में लाभकारी होते हैं।  मूली से बने जूस बनाएं, या सूखी मूली से काढ़ा बनाएं। इसे 50-100 मिली की मात्रा में 1-1 घंटे के बाद पिएं। इससे हिचकी की समस्या में लाभ (radish juice benefits) होता है।
और पढ़ें: हिचकी में चना के फायदे

दाद-खाज-खुजली में मूली के औषधीय गुण से लाभ (Benefits of White Radish to Treat Ringworm in Hindi)

दाद-खाज-खुजली के इलाज के लिए मूली के बीजों को नींबू के रस में पीस लें। इसे बीमार अंग पर लगाएं। इससे दाद-खाज-खुजली ठीक (mooli ke fayde) होती है।
और पढ़ें – दाद या खुजली में अजवाइन से लाभ

मूली के सेवन से सूजन का इलाज (Benefits of Radish to Reduce Inflammation in Hindi)

मूली खाने के फायदे सूजन की समस्या में भी मिलती है। सूजन के इलाज के लिए 5 ग्राम तिल के साथ मूली के 1-2 ग्राम बीजों का सेवन करें। ऐसा दिन में दो-तीन बार करने से सूजन ठीक होती है।

आंखों के रोग में मूली का औषधीय गुण फायदेमंद (White Radish Benefits to Treat Eye Disorder in Hindi)

आंखों की कई तरह की बीमारियों में मूली के इस्तेमाल से लाभ मिलता है। मूली के रस को काजल की तरह आंखों में लगाएं। इससे आंखों की बीमारी ठीक होती है। 
और पढ़ें: आंखों की बीमारी में रजः प्रवर्तिनी वटी के फायदे

कान के रोग में मूली के फायदे (Mullangi Benefits to Get Relief from Ear Disease in Hindi)

  • मूली और तिल के तेल को कान में 2-2 बूंद डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
  • 3 ग्राम मूली क्षार और 20 ग्राम शहद को मिलाएं। इसमें बत्ती भिगोकर कान में रखने से मवाद आना बन्द हो जाता है।
  • मूली के रस को थोड़ा गर्म करें। इसमें मधु, तेल एवं सेंधा नमक मिलाकर कान में डालने से कान के दर्द (mooli benefits) से आराम मिलता है।
  • मूली कंद के रस या पत्ते के रस से पकाए हुए तिल के तेल को 1-2 बूंद की मात्रा में कान में डालें। इससे कान का दर्द ठीक होता है।

मूली के सेवन से कंठ के रोग का इलाज (Benefits of Radish for Throat Disorder in Hindi)

मूली के 5-10 ग्राम बीजों को पीस लें। इसे गर्म जल के साथ दिन में 3-4 बार सेवन करने से कंठ का रोग ठीक होता है। इससे गला साफ होता है।
और पढ़ें: कंठ रोग में वन तुलसी के फायदे

सांस संबंधी रोग में मूली का औषधीय गुण फायदेमंद (Radish Juice Benefits in Respiratory Disease in Hindi)

  • छाया में सुखाई हुई छोटी मूली का भस्म बना लें। इसे 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से सांसों की बीमारी में लाभ होता है। इसके साथ चीनी और गुनगुना हलवा का सेवन करना अधिक गुणकारक होता है।
  • 5 मिली मूली के रस में बराबर मात्रा में मधु और सेंधा नमक मिलाएं। इसका सेवन करने से सांस की नली से संबंधित परेशानी में आराम मिलता है।
  • 500 मिग्रा मूली क्षार में 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटने से सांसों के रोग में लाभ (muli khane ke fayde) होता है।
  • मूली से बने जूस या सूखी मूली से बने काढ़ा को 50-100 मिली की मात्रा में सेवन करें। इससे सांसों की बीमारी ठीक होती है।
  • सूखी मूली से बने जूस का सेवन करने से भी सांसों के रोग में लाभ होता है।
और पढ़ें: सांस की बीमारी में अशोक वृक्ष के फायदे

खांसी की आयुर्वेदिक दवा है मूली (Benefits of Radish to Get Relief from Cough and Cold in Hindi)

  • वात दोष के कारण होने वाली खाांसी को ठीक करने के लिए मूली की सब्जी का सेवन करें।
  • छाया में सुखाई हुई छोटी मूली का भस्म बना लें। इसे 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से खांसी की बीमारी में लाभ होता है। इसके साथ चीनी और गुनगुना हलवा का सेवन करना अधिक फायदेमंद होता है।
  • कच्ची मूली का जूस बनाकर 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से सर्दी-जुकाम में लाभ होता है।
और पढ़ें – सर्दी-जुकाम में अजवाइन का उपयोग

पाचनतंत्र विकार में मूली के फायदे (Benefits of Radish for Digestive System in Hindi)

पाचनतंत्र को मजबूत बनाने के लिए खाने के बाद मूली का प्रयोग करें। भोजन से पहले खाने पर मूली पचने में अधिक समय लेती है, लेकिन भोजन के बाद भोजन को पचाने में मदद करती है।
और पढ़ें: पाचनतंत्र ठीक करने में जायफल के फायदे

एसिडिटी में मूली के औषधीय गुण से लाभ (Benefits of Mullangi in Fighting with Acidity in Hindi)

  • कोमल मूली को मिश्री में मिलाकर खाएं। इससे एसिडिटी में लाभ मिलता है।
  • मूली के पत्तों के 10-20 मिली रस में मिश्री मिलाकर सेवन करें। इससे एसिडिटी में लाभ (muli khane ke fayde) होता है।
र पढ़ें: एसिडिटी की परेशानी में अजवाइन का इस्तेमाल

मूली के सेवन से पेट के दर्द का इलाज (Mullangi Benefits to Relief form Abdominal Pain in Hindi)

  • मूली के 25 मिली रस में आवश्यकतानुसार नमक मिलाएं। इसके साथ ही तीन-चार काली मिर्च का चूर्ण डालें। इसे 3-4 बार पिलाने से पेट का दर्द ठीक होता है।
  • मूली की सब्जी (mooli ke fayde) का सेवन करना भी पेट के लिए अच्छा होता है।
  • 60 मिली मूली के रस को सुबह सेवन करने से जलोदर रोग में लाभ होता है।
और पढ़ें: जलोदर में केवांच के फायदे

दस्त में मूली का औषधीय गुण फायदेमंद (Benefits of Mullangi to Stop Diarrhea in Hindi)

दस्त की समस्या में मूली के औषधीय गुण से फायदा मिलता है। कोमल मूली से बने 10-30 मिली काढ़ा में 1-2 ग्राम पीपर का चूर्ण मिला लें। इसे पीकर दस्त को रोक सकते हैं।
और पढ़ें: दस्त रोकने में गोखरू के फायदे

बवासीर की आयुर्वेदिक दवा है मूली (Mullangi Benefits Treat Hemorrhoids in Hindi)

  • मूली का 20 मिली रस निकालें, और इसमें 50 ग्राम गाय का घी मिलाकर सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।
  • मूली की सब्जी (mooli benefits) का सेवन करने से वात दोष के कारण होने वाले बवासीर में लाभ मिलता है।
  • मूली के पत्तों को छाया में सुखाकर पीस लें। इसमे समान मात्रा में चीनी मिलाकर 40 दिन तक 25 से 50 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा होता है।
और पढ़ें: बवासीर में अभयारिष्ट के फायदे

खूनी बवासीर में मूली के फायदे (White Radish Benefits for Piles Treatment in Hindi)

  • मूली कन्दों के ऊपर का सफेद मोटा छिलका उतार लें, और पत्तों को अलगकर रस (radish juice) निकालें। इसमें छह ग्राम घी मिलाकर रोज सुबह-सुबह सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  • इसके साथ ही 10 ग्राम फिटकरी को एक लीटर मूली के पत्ते के रस में उबालें। जब यह गाढ़ा हो जाए तो बेर के समान गोलियां बना लें। एक गोली मक्खन में लपेटकर खाएं। ऊपर से 125 ग्राम दही पिला दें। इससे खूनी बवासीर में फायदा मिलता है।
और पढ़ें: एलोवेरा के प्रयोग से खूनी बवासीर का इलाज

मूली के औषधीय गुण से मूत्र रोग का इलाज (Benefits of Radish Juice in Urinary Disease in Hindi)

  • जिस रोगी को पेशाब रुक-रुक कर आता है उसे मूली का सेवन करना चाहिए। रुक-रुक कर पेशाब आने की बीमारी में लाभ होता है।
  • 10-20 मिली मूली के पत्ते के रस में 1-2 ग्राम कलमी शोरा मिलाकर पीने से भी मूत्र संबंधी विकारों में लाभ (mooli benefits) होता है।
और पढ़ें : मूत्र रोग में मरिच फायदेमंद

लकवा की आयुर्वेदिक दवा है मूली (Benefits of Muli Juice for Paralysis in Hindi)

लकवा एक गंभीर बीमारी है। प्रायः ऐसा माना जाता है कि लकवा का पूरा इलाज नहीं हो सकता। आप लकवाव में मूली से लाभ (muli khane ke fayde) ले सकते हैं। मूली के 20-40 मिली रस को दिन में तीन बार पीने से लकवा रोग में लाभ होता है। 
और पढ़े: लकवा की समस्‍या में तिंदुक के फायदे

मूली के सेवन से पीलिया का इलाज (Radish Health Benefits to Treat Jaundice in Hindi)

  • मूली के ताजे पत्तों को जल के साथ पीसकर उबालें। इसमें दूध की तरह झाग ऊपर आता है। इसको छानकर दिन में तीन बार पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
  • मूली की सब्जी का सेवन करने से भी वात दोष के कारण होने वाले पीलिया रोग में फायदा (mooli benefits) होता है।
और पढ़ें: पीलिया रोग में गिलोय से फायदा

पथरी की बीमारी में मूली के सेवन से लाभ (Benefits of Radish for Stone Disease in Hindi)

  • 100 मिली मूली के पत्ते के रस को दिन में तीन बार (30-30 मिली) पिएं। इससे पथरी का इलाज होता है। पथरी टूट कर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।
  • मूली के पत्तों के 10 मिली रस में 3 ग्राम अजमोदा मिलाएं। इसे दिन में तीन बार पीने से पथरी का उपचार होता है, और पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल (mooli ke fayde) जाती है।
  • मूली के बीजों को 1 से 6 ग्राम तक दिन में तीन से चार बार खाने से भी पथरी रोग में फायदा होता है। मूत्राशय से पथरी निकल जाती है।
और पढ़ें: पथरी में गोखरू के फायदे

लिंग के तनाव (पेनिस में तनाव) की कमी में मूली के सेवन से लाभ (Muli Benefits for Erectile Dysfunction in Hindi)

कई लोग यह शिकायत करते हैं कि सेक्स के दौरान लिंग में तनाव नहीं रहता, या लिंग के तनाव में कमी आ गई है। ऐसे लोग मूली से फायदे ले सकते हैं। मूली के बीजों को तेल में उबाल (खौला) लें। इस तेल से लिंग (पेनिस) पर मालिश करें। इससे लिंग के ढीलेपन की बीमारी ठीक (muli khane ke fayde) होती है।

मूली के औषधीय गुण से कुष्ठ रोग का इलाज (Benefits of Muli in Fighting with Leprosy in Hindi)

कुष्ठ रोग को ठीक करने के लिए मूली के 10-20 ग्राम बीज को बहेड़ा के पत्ते के रस में पीस लें। इससे बीमार अंगों पर लगाएं। इस उपाय से कुष्ठ रोग का इलाज होता है। अधिक लाभ (muli khane ke fayde) के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

और पढ़ें – कुष्ठ रोग में बाकुची के फायदे

मासिक धर्म विकार की आयुर्वेदिक दवा है मूली (Benefits of  Muli in Menstrual Disorder in Hindi)

महिलाओं को बराबर मासिक धर्म संबंधी विकार के कारण परेशानी होती है। मासिक धर्म विकार में मूली बीजों के चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में पिएं। इससे मासिक धर्म संबंधी विकार ठीक होता है।
और पढ़ें: मासिक धर्म विकार में गुड़हल के इस्तेमाल से फायदा

सूजाक में मूली के सेवन से फायदा (Muli Benefits for Gonorrhea Treatment in Hindi)

मूली को चार टुकड़ा कर लें। इन पर छह ग्राम भूनी फिटकरी डालें। इन्हें रात में ओस में रख दें। सुबह मूली को खा लें, और मूली के ऊपर से जो पानी निकलता है, उसे पी लें। इससे सूजाक रोग में लाभ होता है।

एनीमिया के इलाज में मूली का औषधीय गुण फायदेमंद (Benefits of Radishes for Anemia Treatment in Hindi)

  • मूली के पत्ते सहित मूली के रस को निकाल लें। इसे दिन में तीन बार 20-20 मिली की मात्रा में पीने से एनीमिया रोग में लाभ होता है।
  • इसी तरह 70 मिली मूली के रस में 40 ग्राम चीनी मिलाकर पीने से एनीमिया रोग में फायदा होता है।
  • मूली के पत्ते के रस (60 मिली) में 15 ग्राम खांड मिलाकर पीने से भी एनीमिया की बीमारी ठीक होती है।

ग्रन्थि विसर्प (एक तरह का रैशेज) रोग में मूली के औषधीय गुण से फायदा (Muli Benefits to Cure Erysipelas in Hindi)

ग्रंथि विसर्प रोग में पैर, मुंह, हाथों या अंगुलियों की त्वचा संबंधी रैशेज हो जाते हैं। इसके लिए मूली को पीसकर कुछ गर्म कर लें। इसका लेप करने से ग्रन्थि विसर्प (mooli benefits) में लाभ होता है। 
और पढ़ें – त्वचा रोग में चांदनी के फायदे

किडनी विकार में मूली के सेवन से फायदा (Benefits of Mooli for Kidney Disorder in Hindi)

  • किडनी की खराबी के कारण अगर पेशाब बनना बंद हो जाए तो 20-40 मिली मूली के रस (radish juice) को दिन में दो-तीन बार पीने से बहुत लाभ होता है।
  • 120 मिली मूली के रस में 10 ग्राम कलमी शोरा को मिलाकर सुखा दें। इसकी 500 मिग्रा की गोलियां बना लें। इसकी 1-2 गोली दिन में दो बार सेवन करें। 

लीवर या तिल्ली विकार में मूली के सेवन से फायदा (Mooli Benefits for Liver and Spleen Disorder in Hindi )

  • मूली के चार टुकड़ों को चीनी मिट्टी के बरतन में रखें। ऊपर से छह ग्राम पिसा नौसादर छिड़ककर रात को ओस में रखें। सुबह जो पानी निकले, उसको पीकर ऊपर से मूली के टुकड़े खा लें। इससे लीवर और तिल्ली से संबंधित विकारों में लाभ होता है।
  • इसके लिए एक ग्राम मूली बीजों को पीसकर सुबह शाम खाने से भी लिवर और तिल्ली की बीमारी में लाभ (muli khane ke fayde) होता है।
और पढ़ें: तिल्ली के बढ़ने की समस्या में करंज के फायदे

मूली के उपयोगी भाग (Useful Parts of Radish (Muli) in Hindi)

आप मूली के इन भागों का प्रयोग कर सकते हैंः-
  • मूली की जड़
  • मूली के पत्ते
  • मूली की बीज
  • मूली फल

मूली का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Radish (Muli) in Hindi)

मूली का इस्तेमाल इतनी मात्रा में करना चाहिएः-
  • मूली का रस- 20-40 मिली
  • मूली का काढ़ा
अधिक लाभ के लिए चिकित्सक के परामर्शानुसार सेवन करें।

मूली कहां पाई या उगाई जाती है? (Where is Radish (Muli) Found or Grown?)

मूली एक सब्जी है। इसकी खेती पूरे भारत में की जाती है।
और पढ़ें: अश्वगंधा के इस्तेमाल से खांसी का इलाज

मूली खाने के फायदे, नुकसान व मूली से रोगों का इलाज (Radish Benefits and Side Effects in Hindi)

मूली (muli or mooli) तो आप खाते ही होंगे। मूली को मिलाकर कई तरह की सब्जियां बनाई जाती हैं। लंबी और पतली-सी दिखने वाली मूली को लोग बहुत पसंद से खाते हैं क्योंकि लोगों को यह पता है कि मूली के अनेक फायदे हैं। क्या आपको जानकारी है कि मूली एक औषधि भी है। कई रोगों के इलाज में मूली के औषधीय गुण से लाभ मिलता है। आप भी अगर मूली का इस्तेमाल करते हैं, और मूली के फायदे के बारे में नहीं जानते हैं तो आपको जरूर मूली से होने वाले लाभ (radish benefits) के बारे में जानना चाहिए।
आप कई बीमारियों में मूली के सेवन से स्वास्थ्य लाभ पा सकते हैं, और अनेक रोगों की रोकथाम (muli khane ke fayde) कर सकते हैं। आयुर्वेद में मूली के बारे में बहुत सारी बातें बताई गई हैं। आइए सबके बारे में जानते हैं।

मूली क्या है? (What is Radish in Hindi?)

भारत में मूली (mooli) को सब्जी के साथ-साथ सलाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। मूली के नए पत्ते देखने में सरसों के पत्तों जैसे होते हैं। इसके फूल सफेद रंग के होते हैं। फूल दिखने में सरसों के फूलों की तरह ही होते हैं।
रंगों के अनुसार, मूली दो प्रकार की होती है।
  1. सफेद मूली
  2. लाल मूली
इसके बीज और जड़ से सफेद रंग का तेल निकाला जाता है।


अन्य भाषाओं में मूली के नाम (Name of Radish in Different Languages)

मूली (mooligai) का वानस्पतिक नाम रॅफेनस् सेटाइवस ( Raphanus sativus Linn.,) है, और यह ब्रैसिकेसी (Brassicaceae) कुल की है। मूली को इसे देश-विदेश में इन नामों से भी बुलाया जाता हैः-
Muli in-
  • Hindi – मूली, मुरई
  • English – रेडिश ( Radish)
  • Sanskrit – लघुमूलक, मरुसंभव, चाणक्यमूलक, मूलिका, मूलक, दीर्घकन्दक, मृत्तिकाक्षार, हस्तिदन्त, भूमिकाक्षार, हस्तिदन्तक, दीर्घमूलक, दीर्घपत्तेक, मृक्षार, कन्दमूल
  • Urdu – मूली (Muli), मूलेकेबीज (Mulekebija);
  • Konkani – मूल्लो (Mullo);
  • Kannada – मुखङ्खी (Mukhangkhi), मूलांगी (Mulangi);
  • Gujarati – मुरा (Mura);
  • Tamil – मुल्लंगि (Mullangi), मूलिन्थी (Mulinthhi);
  • Telugu – मुल्लगिं (Mullangi), मूलांगी (Mulangi);
  • Bengali – मूला (Mula), मूली (Muli);
  • Nepali – मूला (Mula), मूलासिंकी (Mulasinki);
  • Punjabi – मूली (Muli), मुंग्रा (Mungra);
  • Marathi – मुला (Mula), मूरी (Muri);
  • Malayalam – मूल्लांगी (Mullangi)।
  • Arabic – फूजल (Fujl), हुजल (Hujal), बोकेल (Bokel), फिडजेल (Fidgel);
  • Persian – तुख (Tukh), तुर्ब (Turb), तुरूप (Turup), तुख्मेतुरूब (Tukhmeturub)

मूली के फायदे और उपयोग (Radish Benefits and Uses in Hindi)

मूली के फायदे (muli ke fayde) और औषधीय गुण, प्रयोग की मात्रा एवं विधियाँ ये हैंः-

हिचकी की परेशानी में मूली के फायदे (White Radish Benefits in Relief from Hiccup in Hindi)

मूली के फायदे हिचकी से राहत दिलाने में लाभकारी होते हैं।  मूली से बने जूस बनाएं, या सूखी मूली से काढ़ा बनाएं। इसे 50-100 मिली की मात्रा में 1-1 घंटे के बाद पिएं। इससे हिचकी की समस्या में लाभ (radish juice benefits) होता है।
और पढ़ें: हिचकी में चना के फायदे

दाद-खाज-खुजली में मूली के औषधीय गुण से लाभ (Benefits of White Radish to Treat Ringworm in Hindi)

दाद-खाज-खुजली के इलाज के लिए मूली के बीजों को नींबू के रस में पीस लें। इसे बीमार अंग पर लगाएं। इससे दाद-खाज-खुजली ठीक (mooli ke fayde) होती है।
और पढ़ें – दाद या खुजली में अजवाइन से लाभ

मूली के सेवन से सूजन का इलाज (Benefits of Radish to Reduce Inflammation in Hindi)

मूली खाने के फायदे सूजन की समस्या में भी मिलती है। सूजन के इलाज के लिए 5 ग्राम तिल के साथ मूली के 1-2 ग्राम बीजों का सेवन करें। ऐसा दिन में दो-तीन बार करने से सूजन ठीक होती है।

आंखों के रोग में मूली का औषधीय गुण फायदेमंद (White Radish Benefits to Treat Eye Disorder in Hindi)

आंखों की कई तरह की बीमारियों में मूली के इस्तेमाल से लाभ मिलता है। मूली के रस को काजल की तरह आंखों में लगाएं। इससे आंखों की बीमारी ठीक होती है। 
और पढ़ें: आंखों की बीमारी में रजः प्रवर्तिनी वटी के फायदे

कान के रोग में मूली के फायदे (Mullangi Benefits to Get Relief from Ear Disease in Hindi)

  • मूली और तिल के तेल को कान में 2-2 बूंद डालने से कान का दर्द ठीक होता है।
  • 3 ग्राम मूली क्षार और 20 ग्राम शहद को मिलाएं। इसमें बत्ती भिगोकर कान में रखने से मवाद आना बन्द हो जाता है।
  • मूली के रस को थोड़ा गर्म करें। इसमें मधु, तेल एवं सेंधा नमक मिलाकर कान में डालने से कान के दर्द (mooli benefits) से आराम मिलता है।
  • मूली कंद के रस या पत्ते के रस से पकाए हुए तिल के तेल को 1-2 बूंद की मात्रा में कान में डालें। इससे कान का दर्द ठीक होता है।

मूली के सेवन से कंठ के रोग का इलाज (Benefits of Radish for Throat Disorder in Hindi)

मूली के 5-10 ग्राम बीजों को पीस लें। इसे गर्म जल के साथ दिन में 3-4 बार सेवन करने से कंठ का रोग ठीक होता है। इससे गला साफ होता है।
और पढ़ें: कंठ रोग में वन तुलसी के फायदे

सांस संबंधी रोग में मूली का औषधीय गुण फायदेमंद (Radish Juice Benefits in Respiratory Disease in Hindi)

  • छाया में सुखाई हुई छोटी मूली का भस्म बना लें। इसे 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से सांसों की बीमारी में लाभ होता है। इसके साथ चीनी और गुनगुना हलवा का सेवन करना अधिक गुणकारक होता है।
  • 5 मिली मूली के रस में बराबर मात्रा में मधु और सेंधा नमक मिलाएं। इसका सेवन करने से सांस की नली से संबंधित परेशानी में आराम मिलता है।
  • 500 मिग्रा मूली क्षार में 1 चम्मच शहद मिलाकर दिन में 3-4 बार चाटने से सांसों के रोग में लाभ (muli khane ke fayde) होता है।
  • मूली से बने जूस या सूखी मूली से बने काढ़ा को 50-100 मिली की मात्रा में सेवन करें। इससे सांसों की बीमारी ठीक होती है।
  • सूखी मूली से बने जूस का सेवन करने से भी सांसों के रोग में लाभ होता है।
और पढ़ें: सांस की बीमारी में अशोक वृक्ष के फायदे

खांसी की आयुर्वेदिक दवा है मूली (Benefits of Radish to Get Relief from Cough and Cold in Hindi)

  • वात दोष के कारण होने वाली खाांसी को ठीक करने के लिए मूली की सब्जी का सेवन करें।
  • छाया में सुखाई हुई छोटी मूली का भस्म बना लें। इसे 1 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से खांसी की बीमारी में लाभ होता है। इसके साथ चीनी और गुनगुना हलवा का सेवन करना अधिक फायदेमंद होता है।
  • कच्ची मूली का जूस बनाकर 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से सर्दी-जुकाम में लाभ होता है।
और पढ़ें – सर्दी-जुकाम में अजवाइन का उपयोग

पाचनतंत्र विकार में मूली के फायदे (Benefits of Radish for Digestive System in Hindi)

पाचनतंत्र को मजबूत बनाने के लिए खाने के बाद मूली का प्रयोग करें। भोजन से पहले खाने पर मूली पचने में अधिक समय लेती है, लेकिन भोजन के बाद भोजन को पचाने में मदद करती है।
और पढ़ें: पाचनतंत्र ठीक करने में जायफल के फायदे

एसिडिटी में मूली के औषधीय गुण से लाभ (Benefits of Mullangi in Fighting with Acidity in Hindi)

  • कोमल मूली को मिश्री में मिलाकर खाएं। इससे एसिडिटी में लाभ मिलता है।
  • मूली के पत्तों के 10-20 मिली रस में मिश्री मिलाकर सेवन करें। इससे एसिडिटी में लाभ (muli khane ke fayde) होता है।
र पढ़ें: एसिडिटी की परेशानी में अजवाइन का इस्तेमाल

मूली के सेवन से पेट के दर्द का इलाज (Mullangi Benefits to Relief form Abdominal Pain in Hindi)

  • मूली के 25 मिली रस में आवश्यकतानुसार नमक मिलाएं। इसके साथ ही तीन-चार काली मिर्च का चूर्ण डालें। इसे 3-4 बार पिलाने से पेट का दर्द ठीक होता है।
  • मूली की सब्जी (mooli ke fayde) का सेवन करना भी पेट के लिए अच्छा होता है।
  • 60 मिली मूली के रस को सुबह सेवन करने से जलोदर रोग में लाभ होता है।
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दस्त में मूली का औषधीय गुण फायदेमंद (Benefits of Mullangi to Stop Diarrhea in Hindi)

दस्त की समस्या में मूली के औषधीय गुण से फायदा मिलता है। कोमल मूली से बने 10-30 मिली काढ़ा में 1-2 ग्राम पीपर का चूर्ण मिला लें। इसे पीकर दस्त को रोक सकते हैं।
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बवासीर की आयुर्वेदिक दवा है मूली (Mullangi Benefits Treat Hemorrhoids in Hindi)

  • मूली का 20 मिली रस निकालें, और इसमें 50 ग्राम गाय का घी मिलाकर सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।
  • मूली की सब्जी (mooli benefits) का सेवन करने से वात दोष के कारण होने वाले बवासीर में लाभ मिलता है।
  • मूली के पत्तों को छाया में सुखाकर पीस लें। इसमे समान मात्रा में चीनी मिलाकर 40 दिन तक 25 से 50 ग्राम की मात्रा में सेवन करें। इससे बवासीर में फायदा होता है।
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खूनी बवासीर में मूली के फायदे (White Radish Benefits for Piles Treatment in Hindi)

  • मूली कन्दों के ऊपर का सफेद मोटा छिलका उतार लें, और पत्तों को अलगकर रस (radish juice) निकालें। इसमें छह ग्राम घी मिलाकर रोज सुबह-सुबह सेवन करने से खूनी बवासीर में लाभ होता है।
  • इसके साथ ही 10 ग्राम फिटकरी को एक लीटर मूली के पत्ते के रस में उबालें। जब यह गाढ़ा हो जाए तो बेर के समान गोलियां बना लें। एक गोली मक्खन में लपेटकर खाएं। ऊपर से 125 ग्राम दही पिला दें। इससे खूनी बवासीर में फायदा मिलता है।
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मूली के औषधीय गुण से मूत्र रोग का इलाज (Benefits of Radish Juice in Urinary Disease in Hindi)

  • जिस रोगी को पेशाब रुक-रुक कर आता है उसे मूली का सेवन करना चाहिए। रुक-रुक कर पेशाब आने की बीमारी में लाभ होता है।
  • 10-20 मिली मूली के पत्ते के रस में 1-2 ग्राम कलमी शोरा मिलाकर पीने से भी मूत्र संबंधी विकारों में लाभ (mooli benefits) होता है।
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लकवा की आयुर्वेदिक दवा है मूली (Benefits of Muli Juice for Paralysis in Hindi)

लकवा एक गंभीर बीमारी है। प्रायः ऐसा माना जाता है कि लकवा का पूरा इलाज नहीं हो सकता। आप लकवाव में मूली से लाभ (muli khane ke fayde) ले सकते हैं। मूली के 20-40 मिली रस को दिन में तीन बार पीने से लकवा रोग में लाभ होता है। 
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मूली के सेवन से पीलिया का इलाज (Radish Health Benefits to Treat Jaundice in Hindi)

  • मूली के ताजे पत्तों को जल के साथ पीसकर उबालें। इसमें दूध की तरह झाग ऊपर आता है। इसको छानकर दिन में तीन बार पीने से पीलिया रोग में लाभ होता है।
  • मूली की सब्जी का सेवन करने से भी वात दोष के कारण होने वाले पीलिया रोग में फायदा (mooli benefits) होता है।
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पथरी की बीमारी में मूली के सेवन से लाभ (Benefits of Radish for Stone Disease in Hindi)

  • 100 मिली मूली के पत्ते के रस को दिन में तीन बार (30-30 मिली) पिएं। इससे पथरी का इलाज होता है। पथरी टूट कर पेशाब के रास्ते बाहर निकल जाती है।
  • मूली के पत्तों के 10 मिली रस में 3 ग्राम अजमोदा मिलाएं। इसे दिन में तीन बार पीने से पथरी का उपचार होता है, और पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल (mooli ke fayde) जाती है।
  • मूली के बीजों को 1 से 6 ग्राम तक दिन में तीन से चार बार खाने से भी पथरी रोग में फायदा होता है। मूत्राशय से पथरी निकल जाती है।
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लिंग के तनाव (पेनिस में तनाव) की कमी में मूली के सेवन से लाभ (Muli Benefits for Erectile Dysfunction in Hindi)

कई लोग यह शिकायत करते हैं कि सेक्स के दौरान लिंग में तनाव नहीं रहता, या लिंग के तनाव में कमी आ गई है। ऐसे लोग मूली से फायदे ले सकते हैं। मूली के बीजों को तेल में उबाल (खौला) लें। इस तेल से लिंग (पेनिस) पर मालिश करें। इससे लिंग के ढीलेपन की बीमारी ठीक (muli khane ke fayde) होती है।

मूली के औषधीय गुण से कुष्ठ रोग का इलाज (Benefits of Muli in Fighting with Leprosy in Hindi)

कुष्ठ रोग को ठीक करने के लिए मूली के 10-20 ग्राम बीज को बहेड़ा के पत्ते के रस में पीस लें। इससे बीमार अंगों पर लगाएं। इस उपाय से कुष्ठ रोग का इलाज होता है। अधिक लाभ (muli khane ke fayde) के लिए किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

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मासिक धर्म विकार की आयुर्वेदिक दवा है मूली (Benefits of  Muli in Menstrual Disorder in Hindi)

महिलाओं को बराबर मासिक धर्म संबंधी विकार के कारण परेशानी होती है। मासिक धर्म विकार में मूली बीजों के चूर्ण को 3 ग्राम की मात्रा में पिएं। इससे मासिक धर्म संबंधी विकार ठीक होता है।
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सूजाक में मूली के सेवन से फायदा (Muli Benefits for Gonorrhea Treatment in Hindi)

मूली को चार टुकड़ा कर लें। इन पर छह ग्राम भूनी फिटकरी डालें। इन्हें रात में ओस में रख दें। सुबह मूली को खा लें, और मूली के ऊपर से जो पानी निकलता है, उसे पी लें। इससे सूजाक रोग में लाभ होता है।

एनीमिया के इलाज में मूली का औषधीय गुण फायदेमंद (Benefits of Radishes for Anemia Treatment in Hindi)

  • मूली के पत्ते सहित मूली के रस को निकाल लें। इसे दिन में तीन बार 20-20 मिली की मात्रा में पीने से एनीमिया रोग में लाभ होता है।
  • इसी तरह 70 मिली मूली के रस में 40 ग्राम चीनी मिलाकर पीने से एनीमिया रोग में फायदा होता है।
  • मूली के पत्ते के रस (60 मिली) में 15 ग्राम खांड मिलाकर पीने से भी एनीमिया की बीमारी ठीक होती है।

ग्रन्थि विसर्प (एक तरह का रैशेज) रोग में मूली के औषधीय गुण से फायदा (Muli Benefits to Cure Erysipelas in Hindi)

ग्रंथि विसर्प रोग में पैर, मुंह, हाथों या अंगुलियों की त्वचा संबंधी रैशेज हो जाते हैं। इसके लिए मूली को पीसकर कुछ गर्म कर लें। इसका लेप करने से ग्रन्थि विसर्प (mooli benefits) में लाभ होता है। 
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किडनी विकार में मूली के सेवन से फायदा (Benefits of Mooli for Kidney Disorder in Hindi)

  • किडनी की खराबी के कारण अगर पेशाब बनना बंद हो जाए तो 20-40 मिली मूली के रस (radish juice) को दिन में दो-तीन बार पीने से बहुत लाभ होता है।
  • 120 मिली मूली के रस में 10 ग्राम कलमी शोरा को मिलाकर सुखा दें। इसकी 500 मिग्रा की गोलियां बना लें। इसकी 1-2 गोली दिन में दो बार सेवन करें। 

लीवर या तिल्ली विकार में मूली के सेवन से फायदा (Mooli Benefits for Liver and Spleen Disorder in Hindi )

  • मूली के चार टुकड़ों को चीनी मिट्टी के बरतन में रखें। ऊपर से छह ग्राम पिसा नौसादर छिड़ककर रात को ओस में रखें। सुबह जो पानी निकले, उसको पीकर ऊपर से मूली के टुकड़े खा लें। इससे लीवर और तिल्ली से संबंधित विकारों में लाभ होता है।
  • इसके लिए एक ग्राम मूली बीजों को पीसकर सुबह शाम खाने से भी लिवर और तिल्ली की बीमारी में लाभ (muli khane ke fayde) होता है।
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मूली के उपयोगी भाग (Useful Parts of Radish (Muli) in Hindi)

आप मूली के इन भागों का प्रयोग कर सकते हैंः-
  • मूली की जड़
  • मूली के पत्ते
  • मूली की बीज
  • मूली फल

मूली का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Radish (Muli) in Hindi)

मूली का इस्तेमाल इतनी मात्रा में करना चाहिएः-
  • मूली का रस- 20-40 मिली
  • मूली का काढ़ा
अधिक लाभ के लिए चिकित्सक के परामर्शानुसार सेवन करें।

मूली कहां पाई या उगाई जाती है? (Where is Radish (Muli) Found or Grown?)

मूली एक सब्जी है। इसकी खेती पूरे भारत में की जाती है।
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