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पित्त की पथरी यानि गॉलस्टोन छोटे पत्थर होते हैं, जो पित्ताशय की थैली में बनते हैं। पित्त की पथरी लीवर के नीचे होती है। पित्त की पथरी बहुत दर्दनाक हो सकता है यदि इसका समय पर इलाज (pit ki pathri ka ilaj) नहीं किया गया तो इसे निकालने के लिए एक ऑपरेशन की आवश्यकता हो सकती है। आपको बता दें कि पित्ताशय में जब कोलेस्ट्रोल जमने लगता है या फिर सख्त होने लगता है, तो हमें अक्सर पथरी की शिकायत हो जाती है। ऐसे में रोगी को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है और साथ में खाना पचने में भी दिक्कत आने लगती है।
लीवर और गॉल ब्लैडर के बीच बाइल डक्ट नामक एक छोटी-सी नली होती है, जिसके माध्यम से यह पित्त को गॉलब्लैडर तक पहुंचाता है। जब व्यक्ति के शरीर में भोजन जाता है तो यह ब्लैडर पित्त को पिचकारी की तरह खींच कर उसे छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में भेज देता है, जिसे डुओडेनियम कहा जाता है। इससे पाचन क्रिया की शुरुआत हो जाती है।

पित्ताशय की पथरी क्या होता है (What is Gall Bladder Stone)

पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम को सुरक्षित रखने वाले महत्वपूर्ण अंग यानी पित्ताशय (pittashay)से जुड़ी सबसे प्रमुख समस्या यह कि इसमें स्टोन बनने की आशंका बहुत अधिक होती है, जिन्हें गॉलस्टोन कहा जाता है। दरअसल जब गॉलब्लैडर में तरल पदार्थ की मात्रा सूखने लगती है तो उसमें मौजूद चीनी-नमक और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएट तत्व एक साथ जमा होकर छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़ों जैसा रूप धारण कर लेते हैं, जिन्हें गॉलस्टोन्स कहा जाता है।
कभी-कभी पित्ताशय में कोलेस्ट्रोल, बिलीरुबिन और पित्त लवणों का जमाव हो जाता है। 80 प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल की बनी होती (गॉल ब्लैडर स्टोन) है। धीरे-धीरे वे कठोर हो जाती हैं तथा पित्ताशय (pittashay)के अंदर पत्थर का रूप ले लेती है। कोलेस्ट्रॉल स्टोन पीले-हरे रंग के होते हैं।
जब ब्लैडर में ब्लैक या ब्राउन कलर के स्टोन्स नजर आते हैं तो उन्हें पिगमेंट स्टोन्स कहा जाता है। कई बार गॉल ब्लैडर में अनकॉन्जुगेटेड बिलिरुबिन नामक तत्व का संग्रह होने लगता है तो इससे पिगमेंट स्टोन्स की समस्या होती है। गॉलब्लैडर में गड़बड़ी की वजह से कई बार पित्त बाइल डक्ट में जमा होने लगता है, इससे लोगों को जॉन्डिस भी हो सकता है। अगर आंतों में जाने के बजाय बाइल पैनक्रियाज़ में चला जाए तो इससे क्रॉनिक पैनक्रिएटाइटिस नामक गंभीर समस्या हो सकती है। अगर सही समय पर उपचार (pit ki pathri ka ilaj) न कराया जाए तो इससे गॉलब्लैडर में कैंसर भी हो सकता है।
पित्त में पथरी का बनना एक भयंकर पीड़ादायक रोग है। पित्त में कोलेस्ट्रॉल और पिग्मेंट नामक दो तरह की बनती है। लेकिन लगभग 80 प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रॉल से ही बनती है। पित्त लिवर में बनता है और इसका संग्रह गॉल ब्लैडर में होता है। यह पित्त फैट युक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। लेकिन जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो पथरी का निर्माण होता है।
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गॉल ब्लैडर स्टोन क्यों होता है (Causes of Gall Bladder Stone)

पित्ताशय (pittashay)में पथरी का अभी तक कोई कारण सिद्ध नहीं हुआ है और यह किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ फैक्टर हैं जो गॉलस्टोन्स की संभावना को बढ़ा सकते हैं जैसे कि-
-मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes)
-मोटापा (Obesity)
-गर्भधारण (Pregnancy)
-मोटापे की सर्जरी के बाद (Post bariatric surgery)
-कुछ दवाओं का सेवन
-लंबे समय से किसी बीमारी के ग्रस्त होने के कारण
इसके सिवा और भी कारण होते हैं-
ब्रेड, रस्क और अन्य बेकरी उत्पाद- बेकरी में बने उत्पाद जैसे- ब्रेड, मफिन्स, कुकीज, कप केक आदि का सेवन पित्ताशय (pittashay)के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। दरअसल इन फूड्स में सैचुरेटेड और ट्रांस फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इनमें से ज्यादातर फूड्स मैदे से बने होते हैं। अगर आपको गॉल ब्लैडर से संबंधित कोई रोग है, तो इन उत्पादों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसकी जगह पर आप मोटे अनाज से बने आहारों का सेवन करें।

ज्यादा प्रोटीन भी है खतरनाक-अगर आपको अपने गॉल ब्लैडर को स्वस्थ रखना है, तो जानवरों में पाये जाने वाले प्रोटीन मात्रा सीमित कर देनी चाहिए। दरअसल जानवरों में पाए जाने वाले प्रोटीन से कैल्शियम स्टोन और यूरिक एसिड स्टोन के होने का खतरा बढ़ जाता है। मछली, मांस में प्रोटीन के साथ कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इनका सेवन बहुत अधिक नहीं करें। अगर आपको गॉल ब्लैडर स्टोन या किडनी में पथरी है, तब तो इनका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

मीठी चीजों का सेवन-मीठी चीजों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट काफी मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही चीनी के ज्यादा सेवन से कोलेस्ट्रॉल गाढ़ा होता है, जिससे दिल के रोगों के साथ-साथ गॉल ब्लैडर में पथरी का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए मीठी चीजों का बहुत अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भनिरोधक दवाएँ -ज्यादा मात्रा में या जल्दी-जल्दी गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग करने वाली महिलाओं में भी गॉल ब्लैडर की समस्या काफी पाई जाती है। इसलिए महिलाओं को चाहिए कि दवाओं के बजाय अन्य प्रकार के गर्भनिरोधक उपायों को अपनाएं, क्योंकि दवाओं का ज्यादा सेवन उन्हें गॉल ब्लैडर में पथरी का मरीज बना सकता है। इसके अलावा इन दवाओं का किडनी और लीवर पर भी बुरा असर पड़ता है।

कॉफी-अगर आप कॉफी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो भी आपको गॉल ब्लैडर की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जिन लोगों को गॉल ब्लैडर में पहले ही पथरी या अन्य कोई शिकायत है, उन्हें कॉफी का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। जो लोग स्वस्थ हैं, वो दिन में एक या दो कॉफी पी सकते हैं मगर इससे ज्यादा कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए।

सोडा का सेवन-पथरी होने पर पानी का अधिक सेवन करने की सलाह दी जाती है, लेकिन कुछ पेय पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो पथरी होने पर नहीं पीना चाहिए। स्टोन होने पर सोडा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, इसमें फॉस्फोरिक एसिड होता है जो स्टोन के खतरे को बढ़ाता है।

पित्ताशय में पथरी होने के लक्षण (Symptoms of Gall Bladder Stone)

कई बार पित्त की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के होती है और कई बार कुछ लक्षणों को दर्शाते हुए भी होती है। पित्ताशय की पथरी के लक्षण जो कुछ खास नजर में आते हैं वह हैं-
-बदहजमी
-खट्टी डकार
-पेट फुलाना
-एसिडिटी
-पेट में भारीपन
-उल्टी
-पसीना आना जैसे लक्षण नजर आते हैं।

पित्ताशय में पथरी होने से कैसे बचा जा सकता है (Prevention of Gall Bladder Stone)

पित्ताशय (pittashay)में पथरी से बचने के लिए जीवनशैली और आहार में बदलाव लाना आवश्यक होता है। चलिये जानते हैं कि पित्ताशय में पथरी होने पर पित्त की पथरी में क्या खाना चाहिए 
आहार
गाजर और ककड़ी का रस को 100 मि.ली. की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पित्त की पथरी में लाभ होता है।
-सुबह खाली पेट 50 मि.ली. नींबू का रस पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है।
-शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा शक्कर युक्त पेय हानिकारक है। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।
-नाशपाती पित्त की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाये जाने वाले रासायनिक तत्वों से पित्ताशय (pittashay)के रोग दूर होते हैं।
-विटामिन-सी अर्थात् एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रॉल को पित्त में बदल देता है। इसकी तीन से चार गोली रोज लेने पर पथरी में लाभ होता है।
-पित्त पथरी (gallbladder stone in hindi) के रोगी भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में हरी सब्जियां और फल लें। इनमें कोलेस्ट्रॉल कम मात्रा में होता है और प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।
-तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतुलित भोजन ही करें।
-खट्टे फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन-सी गॉलब्लैडर की पथरी दूर करने के लिए काफी मददगार साबित होता है।
-रोजाना एक चम्मच हल्दी का सेवन करने से पथरी दूर होती है।
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खाने से परहेज करनी चाहिए-
-पित्त की पथरी (gallbladder stone in hindi)होने पर चिकित्सकों ने आहार से अण्डों को हटाने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार इसमें काफी कोलेस्ट्रॉल होता है जो पित्ताशय (pittashay)में पथरी का कारण बनता है।
-यदि आपको तली हुई चीजें खाना पसंद है तो उसे तुरन्त छोड़ दीजिए। यह न केवल सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि इससे पित्त की पथरी की समस्या और भी बढ़ सकती है। इसलिए आप कोशिश करें कि ज्यादा तली हुई चीजें न खाएं। आपको बता दें कि तली हुई खाद्य पदार्थ में हाइड्रोजनीकृत वसा, ट्रांस वसा और सेचुरेटेड वसा होती है जो आपकी पित्ताशय (gallbladder stone in hindi)के दर्द को बढ़ा सकता है। तलने के लिए स्वस्थ विकल्प के रूप में आप जैतून या कैनोला तेल का उपयोग करें।
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-पित्त की पथरी में परहेज की बात करें तो आपको मांसाहारी से भी परहेज करना चाहिए जैसे, मीट, लाल मांस, सूअर का मांस और चिकन आदि। इसके अलावा आप तैलीय मदली भी न खाएं।
-प्रोसेस्ड फूड के पीछे लोग क्यों भाग रहें हैं इसकी एक वजह यह भी है कि ये खाने में अच्छे लगते हैं और इसे बनाने के लिए ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। लेकिन इसका स्वाद हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। यह न केवल शरीर के पाचन तंत्र को खराब कर सकता है बल्कि पित्त की पथरी की समस्या को भी बढ़ा सकता है। आमतौर पर ट्रांस फैटी एसिड, पैकेज्ड फूड में मौजूद होते हैं जो पित्त की पथरी के लक्षणों को बढ़ाने का काम करते हैं। आप चिप्स, कुकीज, डोनट्स, मिठाई या मिश्रित पैक वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
-पित्त की पथरी होने पर आप परिष्कृत अवयव वाले खाद्य पदार्थ से दूरी बनाएं। व्हाइट ब्रेड, परिष्कृत आटा पास्ता, सफेद चावल और परिष्कृत चीनी ये सभी चीजें फैट का रूप ले लेती है, जो पित्त में कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि कर सकती है।
-पित्त की पथरी (gallbladder stone in hindi) की समस्या है तो आप वसा वाले डेयरी उत्पादों का सेवन मत कीजिए। दूध, पनीर, दही, आइसक्रीम, भारी क्रीम और खट्टा क्रीम में उच्च स्तर के फैट होते हैं, जो पित्त की पथरी को बढ़ाने का काम करते हैं। अपने आहार में डेयरी की मात्रा कम करने की कोशिश करें या कम वसा वाले दूध को चुनें।
-पित्त की पथरी में परहेज के लिए या आपको अपने पित्ताशय की थैली की रक्षा करने के लिए कुछ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। सबसे बड़ी समस्या उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ से हैं। इसलिए इनसे दूरी बनाकर रखें। खाद्य पदार्थ जैसे वनस्पति तेल और मूंगफली का तेल चिकना या तला हुआ होता है, इन्हें छोड़ना अधिक मुश्किल होता है और इससे पित्ताशय की थैली की समस्या हो सकती है। प्रोसेस्ड या व्यावसायिक रूप से बेक्ड उत्पादों की तरह ट्रांस वसा वाले खाद्य पदार्थ, पित्ताशय की थैली के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। सफेद पास्ता, ब्रेड और शुगर जैसे परिष्कृत सफेद खाद्य पदार्थों से बचें, ये आपके पित्ताशय की थैली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आपको शराब और तंबाकू से भी बचना चाहिए।
-पित्त की पथरी (gallbladder stone in hindi) में अम्लीय फूड नहीं खाना चाहिए। खाद्य पदार्थ जो अम्लीय होते हैं, जैसे कि खट्टे फल, कॉफी और टमाटर सॉस न केवल आपके पेट के लिए जलन पैदा कर सकते हैं बल्कि इससे आपको पित्त की पथरी भी हो सकती है।
खाना चाहिए-
-फल और सब्जियों की अधिक मात्रा।
-स्टार्च युक्त कार्बोहाइड्रेट्स की अधिक मात्रा। उदाहरण के लिए ब्रेड, चावल, दालें, पास्ता, आलू, चपाती और प्लान्टेन (केले जैसा आहार)। जब सम्भव हो तब साबुत अनाजों से बनी वस्तुएं लें।
-थोड़ी मात्रा में दूध और डेयरी प्रोडक्ट लें। कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट लें।
-कुछ मात्रा में मांस, मछली,अण्डे और इनके विकल्प जैसे फलियाँ और दालें।
-वनस्पति तेलों जैसे सूरजमुखी, रेपसीड और जैतून का तेल, एवोकाडो, मेवों और गिरियों में पाए जाने वाली असंतृप्त वसा।
-रेशे की अधिकता से युक्त आहार ग्रहण करें। यह फलियों, दालों, फलों और सब्जियों, जई और होलवीट उत्पादों जैसे ब्रेड, पास्ता और चावल में पाया जाता है।
-तरल पदार्थ अधिक मात्रा में लें, जैसे कि पानी या औषधीय चाय आदि का प्रतिदिन कम से कम दो लीटर सेवन करें।
जीवनशैली-
योग और व्यायाम-नियमित व्यायाम रक्त ऊतकों में कोलेस्ट्रॉल को घटाता है, जो कि पित्ताशय की समस्या उत्पन्न कर सकता है। प्रतिदिन तीस मिनट तक, सप्ताह में पांच बार, अपेक्षाकृत मध्यम मात्रा की शारीरिक सक्रियता, व्यक्ति के पित्ताशय की पथरी के उत्पन्न होने के खतरे पर अत्यधिक प्रभावी होती है।
योग-पित्ताशय की पथरी के उपचार के लिए जिन योगासनों का अभ्यास करना चाहिए, वह हैं-
-सर्वांगासन
-शलभासन
-धनुरासन
-भुजंगासन

पथरी निकालने के बाद कौन-सी बातों का ध्यान देना चाहिए (Prevention after removing Gall Bladder Stone)

-सर्जरी के पहले पांच घण्टे पीने की अनुमति नहीं है। फिर आप प्रतिदिन 0.5 लीटर तक, हर 20 मिनट में गैर-कार्बोनेटेड पेयजल के एक-दो सिप पी सकते हैं। ऑपरेशन के एक दिन बाद, आप कॉफी, चाय, मीठे और कार्बोनेटेड पेय, अल्कोहल को छोड़कर, सामान्य पेय व्यवस्था जारी रख सकते हैं।
-आहार पर तीन दिनों से पानी पर ग्रेटेड पॉरेज, मैश किए हुए आलू, कम वसा वाले योग, कम वसा वाले कॉटेज पनीर, बेक्ड ग्राउंड ग्रेटिड सेब के रूप में उबले हुए सब्जियां शामिल हैं। पांचवे दिन, आप बिना किसी मांस के शोरबा में जर्दी, मैश किए हुए सूप के बिना उबले हुए आमलेट को खाना शुरु कर सकते हैं, आप उन्हें 100 ग्राम सफेद रोटी क्रूटोंस जोड़ सकते हैं। पहले सप्ताह के अंत तक, उबला हुआ मछली और जमीन के रूप में कम वसा वाले किस्मों का मांस, दूध के साथ तरल अनाज, मैश किए हुए केले की अनुमति है।
-इसके अलावा, पित्ताशय की थैली हटाने के बाद, परहेज डेढ़ महीने तक जारी रहता है। इसका मुख्य सिद्धांत यह है कि व्यंजनों को उबला हुआ या उबला जाना चाहिए, छोटे हिस्सों में भोजन, दिन में पांच-छ बार खाने की आवृत्ति। सभी धूम्रपान उत्पादों, मसालेदार उत्पाद, मसालेदार और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों को बाहर रखा गया है।
-डेढ़ महीनों के बाद, आप धीरे-धीरे चिकन जर्दी/सप्ताह में एक बार, उबला हुआ सॉसेज, शहद, हल्के पनीर, ताजा खट्टा क्रीम, ताजे फल और जामुन का स्वाद ले सकते हैं। चीनी के बजाय, स्वीटर्स का उपयोग करना बेहतर होता है। इस आहार को तालिका एन 5/हेपेटिक/कहा जाता है और इसे तीन महीने का पालन करने की आवश्यकता होगी। भविष्य में, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट की अनुमति के साथ, आहार धीरे-धीरे विस्तारित होता है, लेकिन फिर भी मांस, मसालेदार और डिब्बाबंद व्यंजनों को धूम्रपान किया जाता है, मसालेदार उत्पादों को त्याग दिया जाना चाहिए। यकृत के पित्त कार्य को बेहतर बनाने के लिए, सब्जी फाइबर का उपयोग करना आवश्यक होता है। कच्ची सब्जियां और फल, वनस्पति तेल उपयोगी होते हैं। शराब बाहर रखा गया है।

पित्ताशय की पथरी होने के साइड इफेक्ट (Side Effect of Gall Bladder Stone)

हालांकि पित्ताशय की थैली के सर्जरी के बाद पाचन समस्याएं ज्यादा होती हैं, इसके अलावा पित्ताशय की पथरी के लक्षण जैसे सर्जरी के बाद दस्त, कब्ज की परेशानी भी होती हैं। पित्ताशय की थैली हटाने के साइड इफेक्ट हटाने के रूप में कई प्रकार की समस्याएं होती है।
-फैटी खाद्य पदार्थों को पचाने में कठिनाई- सर्जरी के पहले महीने में कुछ लोगों को फैटी खाद्य पदार्थों को पचाने में थोड़ा मुश्किल होता है। कम वसा वाले आहार खाने से मदद मिल सकती है।
-अस्थायी दस्त- पित्ताशय, डाइजेस्टिव ट्रैक्ट से आने वाले बेकार तत्वों और लीवर से आने वाले बाइल को स्टोर करता है। जब पित्ताशय निकल जाता है तो लीवर से निकलने वाला बाइल सीधे छोटी आंतों में चला जाता है। पित्ताशय के न होने से छोटी आंत में इसके आने से लीवर और उसके बीच की प्रक्रिया में कुछ समय के लिए दिक्कत आती है। जिसकी वजह से कई बार रोगी को डायरिया भी हो  जाता है। इसे क्लेसिस्टॉमी सिंड्रोम भी कहा जाता है, जो कि पित्ताशय निकलने के बाद कुछ दिनों तक रहता है।
-अस्थायी कब्ज- कुछ लोग पित्ताशय की थैली सर्जरी के बाद वे दर्द दवाओं से कब्ज हो जाते हैं। एक आहार जो फाइबर में समृद्ध हैं- सेम, ब्रान, पूरे अनाज, फल और सब्जियां रोकथाम और कब्ज से छुटकारा पाने में मदद कर सकते हैं।
-पित्त नली में पथरी-कुछ मामलों में, पित्ताशय की थैली सर्जरी के बाद आपके सामान्य पित्त नलिका में पत्थर बने रहेंगे। यह आपकी छोटी आंत में पित्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर सकता है और इसके परिणामस्वरूप सर्जरी के तुरन्त बाद दर्द, बुखार, मतली, उल्टी, सूजन, और पीलिया हो सकता है। आपको अपने सामान्य पित्त नलिका में बनाए गए गैल्स्टोन को हटाने के लिए एक अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है।
-आंतों की चोट- हालांकि यह दुर्लभ है, आपके पित्ताशय की थैली सर्जरी के दौरान उपयोग किए जाने वाले यंत्र आपकी आंतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सर्जरी के दौरान इस जटिलता के जोखिम को कम करने के लिए डॉक्टर उपाय करेंगे। यदि ऐसा होता है तो आपको पेट दर्द, मतली, उल्टी और बुखार का अनुभव हो सकता है।
इसके अलावा गॉल ब्लाडैर स्टोन होने के साइड इफेक्ट के कारण दूसरे बीमारी के होने का संकेत होता है-
-पित्ताशय में पथरी होने से पीलिया और गंभीर सर्जिकल स्थिति भी उभर सकती है।
-इससे संक्रमण, मवाद बनने और गॉल ब्लैडर में छेद होने के कारण पेरिटनाइटिस (पेट की झिल्ली का रोग) भी सकता है।
-पेनक्रियाटाइटिस जैसी जानलेवा स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
-गॉल ब्लैडर में कैंसर हो सकता है। इस स्टोन से पीड़ित मरीजों के 6 से 18 प्रतिशत मामलों में आजीवन कैंसर पनपने का खतरा रहता है जो खासतौर पर उत्तर भारत में ज्यादा देखे गए हैं।
-बड़ी पथरियों से पीड़ित मरीजों में कैंसर विकसित होने की आंशका ज्यादा रहती है जबकि छोटी पथरियों से पीड़ितों में पीलिया या पेनक्रियाटाइटिस के मामले ज्यादा होते हैं।
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पित्ताशय की पथरी का घरेलू उपचार (Home Remedies for Gall Bladder Stone)

आम तौर पर पित्ताशय की पथरी या पित्त की थैली में स्टोन के लिए घरेलू नुस्ख़ों (home remedy for gall bladder stone) का ही ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। पित्ताशय की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज बहुत ही आम होता है-

एप्पल सिडार विनेगार पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Apple Cider Vinegar Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

सेब डॉक्टर को दूर रखने में मदद करता है। इसलिए एक गिलास सेब के रस में सेब साइडर सिरका का एक बड़ा चम्मच मिलाकर नियमित रूप दिन में एक बार सेवन करना चाहिए। सेब में मोलिक एसिड होता है जो पित्त पथरी नरमी में सहायता करता है और सिरका पत्थर के कारण कोलेस्ट्रॉल बनाने से लीवर को रोकता है। यह एक पित्त की पथरी के हमले के दौरान दर्द को कम करने के लिए एक त्वरित उपाय है। पित्ताशय की पथरी के लक्षण से आराम दिलाने  में सेब का सिरका बहुत ही फायदेमंद होता है।
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नाशपाती पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Pear Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

नाशपाती में पेक्टिन नामक यौगिक होता है जो कोलेस्ट्रॉल से बनी पथरी को नरम बनाता है ताकि वे शरीर से आसानी से बाहर निकल सकें। वे पथरी के कारण होने वाले दर्द तथा अन्य लक्षणों से आराम दिलाने में सहायक होता है।

चुकंदर, खीरा और गाजर का रस पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Beetroot Mixture Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

पित्ताशय की थैली को साफ और मजबूत करने और लीवर की सफाई के लिए चुकंदर का रस, ककड़ी का रस और गाजर के रस को बराबर मात्रा में मिलाये। यह संयोजन आपको पेट और खून की सफाई में भी मदद करता है। खीरे में मौजूद उच्च पानी सामग्री और गाजर में विटामिन-सी की उच्च मात्रा मूत्राशय से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है।

सिंहपर्णी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Dandelion Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

सिंहपर्णी के पत्ते लीवर और मूत्राशय के कामकाज में सहायता, पित्त उत्सर्जन को बढ़ावा और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच सिंहपर्णी के पत्तों को मिलाये। फिर इसे अवशोषित करने के लिए पांच मिनट के लिए रख दें। अब इसमें एक चम्मच शहद मिलायें। मधुमेह रोगियों को इस उपचार से बचना चाहिए।
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पुदीना पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Mint Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

यह पित्त तथा अन्य पाचक रसों को बढ़ाता है। इसमें टेरपिन नामक यौगिक पाया जाता है जो प्रभावी रूप से पथरी को तोड़ता है। आप पुदीने की पत्तियों को उबालकर पिपरमेंट टी भी बना सकते हैं।

इसबगोल पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Isabgol Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

एक उच्च फाइबर आहार, पित्ताशय की थैली की पथरी के इलाज (home remedy for gall bladder stone) के लिए बहुत आवश्यक है। इसबगोल घुलनशील फाइबर का अच्छा स्रोत होने के कारण पित्त में कोलेस्ट्रॉल को बांधता है और पथरी के गठन को रोकने में मदद करता है। आप इसे अपने अन्य फाइबर युक्त भोजन के साथ या रात को बिस्तर पर जाने से पहले एक गिलास पानी के साथ ले सकते हैं।

नींबू पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Lemon Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

नींबू का रस प्रकृतिक रूप से अम्लीय होने के कारण यह सिरके की तरह कार्य करता है और लीवर में कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है। हर रोज खाली पेट चार नींबू का रस लें। इस प्रक्रिया को एक हफ्ते तक अपनाएं। इससे पथरी की समस्या (home remedy for gall bladder stone) आसानी से दूर हो सकती है।
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लाल शिमला मिर्च पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Red Capsicum Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी पथरी की समस्या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में लगभग 95 मिलीग्राम विटामिन-सी होता है, यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होती है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च को शामिल करें।
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साबुत अनाज पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Grain Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

पानी में घुलनशील फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों जैसे साबुत अनाज और अन्य अनाज को अपने आहार में भरपूर मात्रा में शामिल करें। फाइबर कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम कर स्वाभाविक रूप से पथरी को बनने से रोकने (home remedy for gall bladder stone) में मदद करते हैं।
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हल्दी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Turmeric Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

पित्ताशय की पथरी के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है। यह एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेट्री (प्रदाहनाशक) होती है। हल्दी पित्त, पित्त यौगिकों और पथरी को आसानी से तोड़ने में मदद करती है। ऐसा माना जाता है कि एक चम्मच हल्दी लेने से लगभग 80 प्रतिशत पथरी खत्म हो जाती है।

विटामिन सी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (VitaminC Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

विटामिन-सी शरीर के कोलेस्ट्रॉल को पित्त अम्ल में परिवर्तित करती है जो पथरी को तोड़ता है। आप विटामिन-सी संपूरक ले सकते हैं या ऐसे खाद्य पदार्थ खा सकते हैं जिनमें विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में हो जैसे संतरा, टमाटर आदि। पथरी के दर्द के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपाय है।
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डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए ? (When to See a Doctor?)

पेट में दर्द इतना तेज होता है कि आप सीधे नहीं बैठ सकें। त्वचा और आंखों के सफेद भाग का पीला पड़ जाना। पेट में दर्द के साथ ठण्ड लगकर तेज बुखार आना या उल्टी आने जैसे लक्षण दृष्टिगोचर होने पर डॉक्टर के पास जायें।

पित्ताशय की पथरी का घरेलू उपचार : Home Remedies for Gall bladder Stone

पित्त की पथरी यानि गॉलस्टोन छोटे पत्थर होते हैं, जो पित्ताशय की थैली में बनते हैं। पित्त की पथरी लीवर के नीचे होती है। पित्त की पथरी बहुत दर्दनाक हो सकता है यदि इसका समय पर इलाज (pit ki pathri ka ilaj) नहीं किया गया तो इसे निकालने के लिए एक ऑपरेशन की आवश्यकता हो सकती है। आपको बता दें कि पित्ताशय में जब कोलेस्ट्रोल जमने लगता है या फिर सख्त होने लगता है, तो हमें अक्सर पथरी की शिकायत हो जाती है। ऐसे में रोगी को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है और साथ में खाना पचने में भी दिक्कत आने लगती है।
लीवर और गॉल ब्लैडर के बीच बाइल डक्ट नामक एक छोटी-सी नली होती है, जिसके माध्यम से यह पित्त को गॉलब्लैडर तक पहुंचाता है। जब व्यक्ति के शरीर में भोजन जाता है तो यह ब्लैडर पित्त को पिचकारी की तरह खींच कर उसे छोटी आंत के ऊपरी हिस्से में भेज देता है, जिसे डुओडेनियम कहा जाता है। इससे पाचन क्रिया की शुरुआत हो जाती है।

पित्ताशय की पथरी क्या होता है (What is Gall Bladder Stone)

पाचन के लिए आवश्यक एंजाइम को सुरक्षित रखने वाले महत्वपूर्ण अंग यानी पित्ताशय (pittashay)से जुड़ी सबसे प्रमुख समस्या यह कि इसमें स्टोन बनने की आशंका बहुत अधिक होती है, जिन्हें गॉलस्टोन कहा जाता है। दरअसल जब गॉलब्लैडर में तरल पदार्थ की मात्रा सूखने लगती है तो उसमें मौजूद चीनी-नमक और अन्य माइक्रोन्यूट्रिएट तत्व एक साथ जमा होकर छोटे-छोटे पत्थर के टुकड़ों जैसा रूप धारण कर लेते हैं, जिन्हें गॉलस्टोन्स कहा जाता है।
कभी-कभी पित्ताशय में कोलेस्ट्रोल, बिलीरुबिन और पित्त लवणों का जमाव हो जाता है। 80 प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रोल की बनी होती (गॉल ब्लैडर स्टोन) है। धीरे-धीरे वे कठोर हो जाती हैं तथा पित्ताशय (pittashay)के अंदर पत्थर का रूप ले लेती है। कोलेस्ट्रॉल स्टोन पीले-हरे रंग के होते हैं।
जब ब्लैडर में ब्लैक या ब्राउन कलर के स्टोन्स नजर आते हैं तो उन्हें पिगमेंट स्टोन्स कहा जाता है। कई बार गॉल ब्लैडर में अनकॉन्जुगेटेड बिलिरुबिन नामक तत्व का संग्रह होने लगता है तो इससे पिगमेंट स्टोन्स की समस्या होती है। गॉलब्लैडर में गड़बड़ी की वजह से कई बार पित्त बाइल डक्ट में जमा होने लगता है, इससे लोगों को जॉन्डिस भी हो सकता है। अगर आंतों में जाने के बजाय बाइल पैनक्रियाज़ में चला जाए तो इससे क्रॉनिक पैनक्रिएटाइटिस नामक गंभीर समस्या हो सकती है। अगर सही समय पर उपचार (pit ki pathri ka ilaj) न कराया जाए तो इससे गॉलब्लैडर में कैंसर भी हो सकता है।
पित्त में पथरी का बनना एक भयंकर पीड़ादायक रोग है। पित्त में कोलेस्ट्रॉल और पिग्मेंट नामक दो तरह की बनती है। लेकिन लगभग 80 प्रतिशत पथरी कोलेस्ट्रॉल से ही बनती है। पित्त लिवर में बनता है और इसका संग्रह गॉल ब्लैडर में होता है। यह पित्त फैट युक्त भोजन को पचाने में मदद करता है। लेकिन जब पित्त में कोलेस्ट्रॉल और बिलरुबिन की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो पथरी का निर्माण होता है।
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गॉल ब्लैडर स्टोन क्यों होता है (Causes of Gall Bladder Stone)

पित्ताशय (pittashay)में पथरी का अभी तक कोई कारण सिद्ध नहीं हुआ है और यह किसी भी उम्र में हो सकता है। कुछ फैक्टर हैं जो गॉलस्टोन्स की संभावना को बढ़ा सकते हैं जैसे कि-
-मधुमेह या डायबिटीज (Diabetes)
-मोटापा (Obesity)
-गर्भधारण (Pregnancy)
-मोटापे की सर्जरी के बाद (Post bariatric surgery)
-कुछ दवाओं का सेवन
-लंबे समय से किसी बीमारी के ग्रस्त होने के कारण
इसके सिवा और भी कारण होते हैं-
ब्रेड, रस्क और अन्य बेकरी उत्पाद- बेकरी में बने उत्पाद जैसे- ब्रेड, मफिन्स, कुकीज, कप केक आदि का सेवन पित्ताशय (pittashay)के स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। दरअसल इन फूड्स में सैचुरेटेड और ट्रांस फैट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है और इनमें से ज्यादातर फूड्स मैदे से बने होते हैं। अगर आपको गॉल ब्लैडर से संबंधित कोई रोग है, तो इन उत्पादों का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए। इसकी जगह पर आप मोटे अनाज से बने आहारों का सेवन करें।

ज्यादा प्रोटीन भी है खतरनाक-अगर आपको अपने गॉल ब्लैडर को स्वस्थ रखना है, तो जानवरों में पाये जाने वाले प्रोटीन मात्रा सीमित कर देनी चाहिए। दरअसल जानवरों में पाए जाने वाले प्रोटीन से कैल्शियम स्टोन और यूरिक एसिड स्टोन के होने का खतरा बढ़ जाता है। मछली, मांस में प्रोटीन के साथ कैल्शियम की मात्रा अधिक होती है, इसलिए इनका सेवन बहुत अधिक नहीं करें। अगर आपको गॉल ब्लैडर स्टोन या किडनी में पथरी है, तब तो इनका सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए।

मीठी चीजों का सेवन-मीठी चीजों में रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट काफी मात्रा में पाया जाता है। इसके साथ ही चीनी के ज्यादा सेवन से कोलेस्ट्रॉल गाढ़ा होता है, जिससे दिल के रोगों के साथ-साथ गॉल ब्लैडर में पथरी का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए मीठी चीजों का बहुत अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

गर्भनिरोधक दवाएँ -ज्यादा मात्रा में या जल्दी-जल्दी गर्भनिरोधक दवाओं का प्रयोग करने वाली महिलाओं में भी गॉल ब्लैडर की समस्या काफी पाई जाती है। इसलिए महिलाओं को चाहिए कि दवाओं के बजाय अन्य प्रकार के गर्भनिरोधक उपायों को अपनाएं, क्योंकि दवाओं का ज्यादा सेवन उन्हें गॉल ब्लैडर में पथरी का मरीज बना सकता है। इसके अलावा इन दवाओं का किडनी और लीवर पर भी बुरा असर पड़ता है।

कॉफी-अगर आप कॉफी का ज्यादा सेवन करते हैं, तो भी आपको गॉल ब्लैडर की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए जिन लोगों को गॉल ब्लैडर में पहले ही पथरी या अन्य कोई शिकायत है, उन्हें कॉफी का सेवन बिल्कुल बंद कर देना चाहिए। जो लोग स्वस्थ हैं, वो दिन में एक या दो कॉफी पी सकते हैं मगर इससे ज्यादा कॉफी का सेवन नहीं करना चाहिए।

सोडा का सेवन-पथरी होने पर पानी का अधिक सेवन करने की सलाह दी जाती है, लेकिन कुछ पेय पदार्थ ऐसे भी होते हैं जो पथरी होने पर नहीं पीना चाहिए। स्टोन होने पर सोडा का सेवन बिल्कुल नहीं करना चाहिए, इसमें फॉस्फोरिक एसिड होता है जो स्टोन के खतरे को बढ़ाता है।

पित्ताशय में पथरी होने के लक्षण (Symptoms of Gall Bladder Stone)

कई बार पित्त की थैली में पथरी बिना किसी लक्षण के होती है और कई बार कुछ लक्षणों को दर्शाते हुए भी होती है। पित्ताशय की पथरी के लक्षण जो कुछ खास नजर में आते हैं वह हैं-
-बदहजमी
-खट्टी डकार
-पेट फुलाना
-एसिडिटी
-पेट में भारीपन
-उल्टी
-पसीना आना जैसे लक्षण नजर आते हैं।

पित्ताशय में पथरी होने से कैसे बचा जा सकता है (Prevention of Gall Bladder Stone)

पित्ताशय (pittashay)में पथरी से बचने के लिए जीवनशैली और आहार में बदलाव लाना आवश्यक होता है। चलिये जानते हैं कि पित्ताशय में पथरी होने पर पित्त की पथरी में क्या खाना चाहिए 
आहार
गाजर और ककड़ी का रस को 100 मि.ली. की मात्रा में मिलाकर दिन में दो बार पीने से पित्त की पथरी में लाभ होता है।
-सुबह खाली पेट 50 मि.ली. नींबू का रस पीने से एक सप्ताह में लाभ होता है।
-शराब, सिगरेट, चाय, कॉफी तथा शक्कर युक्त पेय हानिकारक है। इनसे जितना हो सके बचने की कोशिश करें।
-नाशपाती पित्त की पथरी में फायदेमंद होती है, इसे खूब खायें। इसमें पाये जाने वाले रासायनिक तत्वों से पित्ताशय (pittashay)के रोग दूर होते हैं।
-विटामिन-सी अर्थात् एस्कोर्बिक एसिड के प्रयोग से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत बनती है। यह कोलेस्ट्रॉल को पित्त में बदल देता है। इसकी तीन से चार गोली रोज लेने पर पथरी में लाभ होता है।
-पित्त पथरी (gallbladder stone in hindi) के रोगी भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में हरी सब्जियां और फल लें। इनमें कोलेस्ट्रॉल कम मात्रा में होता है और प्रोटीन की जरूरत भी पूरी करते हैं।
-तली और मसालेदार चीजों से दूर रहें और संतुलित भोजन ही करें।
-खट्टे फलों का सेवन करें। इनमें मौजूद विटामिन-सी गॉलब्लैडर की पथरी दूर करने के लिए काफी मददगार साबित होता है।
-रोजाना एक चम्मच हल्दी का सेवन करने से पथरी दूर होती है।
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खाने से परहेज करनी चाहिए-
-पित्त की पथरी (gallbladder stone in hindi)होने पर चिकित्सकों ने आहार से अण्डों को हटाने का सुझाव दिया है। उनके अनुसार इसमें काफी कोलेस्ट्रॉल होता है जो पित्ताशय (pittashay)में पथरी का कारण बनता है।
-यदि आपको तली हुई चीजें खाना पसंद है तो उसे तुरन्त छोड़ दीजिए। यह न केवल सेहत को नुकसान पहुंचाते हैं बल्कि इससे पित्त की पथरी की समस्या और भी बढ़ सकती है। इसलिए आप कोशिश करें कि ज्यादा तली हुई चीजें न खाएं। आपको बता दें कि तली हुई खाद्य पदार्थ में हाइड्रोजनीकृत वसा, ट्रांस वसा और सेचुरेटेड वसा होती है जो आपकी पित्ताशय (gallbladder stone in hindi)के दर्द को बढ़ा सकता है। तलने के लिए स्वस्थ विकल्प के रूप में आप जैतून या कैनोला तेल का उपयोग करें।
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-पित्त की पथरी में परहेज की बात करें तो आपको मांसाहारी से भी परहेज करना चाहिए जैसे, मीट, लाल मांस, सूअर का मांस और चिकन आदि। इसके अलावा आप तैलीय मदली भी न खाएं।
-प्रोसेस्ड फूड के पीछे लोग क्यों भाग रहें हैं इसकी एक वजह यह भी है कि ये खाने में अच्छे लगते हैं और इसे बनाने के लिए ज्यादा मेहनत भी नहीं करनी पड़ती। लेकिन इसका स्वाद हमारे शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। यह न केवल शरीर के पाचन तंत्र को खराब कर सकता है बल्कि पित्त की पथरी की समस्या को भी बढ़ा सकता है। आमतौर पर ट्रांस फैटी एसिड, पैकेज्ड फूड में मौजूद होते हैं जो पित्त की पथरी के लक्षणों को बढ़ाने का काम करते हैं। आप चिप्स, कुकीज, डोनट्स, मिठाई या मिश्रित पैक वाले खाद्य पदार्थों से बचें।
-पित्त की पथरी होने पर आप परिष्कृत अवयव वाले खाद्य पदार्थ से दूरी बनाएं। व्हाइट ब्रेड, परिष्कृत आटा पास्ता, सफेद चावल और परिष्कृत चीनी ये सभी चीजें फैट का रूप ले लेती है, जो पित्त में कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि कर सकती है।
-पित्त की पथरी (gallbladder stone in hindi) की समस्या है तो आप वसा वाले डेयरी उत्पादों का सेवन मत कीजिए। दूध, पनीर, दही, आइसक्रीम, भारी क्रीम और खट्टा क्रीम में उच्च स्तर के फैट होते हैं, जो पित्त की पथरी को बढ़ाने का काम करते हैं। अपने आहार में डेयरी की मात्रा कम करने की कोशिश करें या कम वसा वाले दूध को चुनें।
-पित्त की पथरी में परहेज के लिए या आपको अपने पित्ताशय की थैली की रक्षा करने के लिए कुछ खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए। सबसे बड़ी समस्या उच्च वसा वाले खाद्य पदार्थ और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ से हैं। इसलिए इनसे दूरी बनाकर रखें। खाद्य पदार्थ जैसे वनस्पति तेल और मूंगफली का तेल चिकना या तला हुआ होता है, इन्हें छोड़ना अधिक मुश्किल होता है और इससे पित्ताशय की थैली की समस्या हो सकती है। प्रोसेस्ड या व्यावसायिक रूप से बेक्ड उत्पादों की तरह ट्रांस वसा वाले खाद्य पदार्थ, पित्ताशय की थैली के स्वास्थ्य को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। सफेद पास्ता, ब्रेड और शुगर जैसे परिष्कृत सफेद खाद्य पदार्थों से बचें, ये आपके पित्ताशय की थैली को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आपको शराब और तंबाकू से भी बचना चाहिए।
-पित्त की पथरी (gallbladder stone in hindi) में अम्लीय फूड नहीं खाना चाहिए। खाद्य पदार्थ जो अम्लीय होते हैं, जैसे कि खट्टे फल, कॉफी और टमाटर सॉस न केवल आपके पेट के लिए जलन पैदा कर सकते हैं बल्कि इससे आपको पित्त की पथरी भी हो सकती है।
खाना चाहिए-
-फल और सब्जियों की अधिक मात्रा।
-स्टार्च युक्त कार्बोहाइड्रेट्स की अधिक मात्रा। उदाहरण के लिए ब्रेड, चावल, दालें, पास्ता, आलू, चपाती और प्लान्टेन (केले जैसा आहार)। जब सम्भव हो तब साबुत अनाजों से बनी वस्तुएं लें।
-थोड़ी मात्रा में दूध और डेयरी प्रोडक्ट लें। कम फैट वाले डेयरी प्रोडक्ट लें।
-कुछ मात्रा में मांस, मछली,अण्डे और इनके विकल्प जैसे फलियाँ और दालें।
-वनस्पति तेलों जैसे सूरजमुखी, रेपसीड और जैतून का तेल, एवोकाडो, मेवों और गिरियों में पाए जाने वाली असंतृप्त वसा।
-रेशे की अधिकता से युक्त आहार ग्रहण करें। यह फलियों, दालों, फलों और सब्जियों, जई और होलवीट उत्पादों जैसे ब्रेड, पास्ता और चावल में पाया जाता है।
-तरल पदार्थ अधिक मात्रा में लें, जैसे कि पानी या औषधीय चाय आदि का प्रतिदिन कम से कम दो लीटर सेवन करें।
जीवनशैली-
योग और व्यायाम-नियमित व्यायाम रक्त ऊतकों में कोलेस्ट्रॉल को घटाता है, जो कि पित्ताशय की समस्या उत्पन्न कर सकता है। प्रतिदिन तीस मिनट तक, सप्ताह में पांच बार, अपेक्षाकृत मध्यम मात्रा की शारीरिक सक्रियता, व्यक्ति के पित्ताशय की पथरी के उत्पन्न होने के खतरे पर अत्यधिक प्रभावी होती है।
योग-पित्ताशय की पथरी के उपचार के लिए जिन योगासनों का अभ्यास करना चाहिए, वह हैं-
-सर्वांगासन
-शलभासन
-धनुरासन
-भुजंगासन

पथरी निकालने के बाद कौन-सी बातों का ध्यान देना चाहिए (Prevention after removing Gall Bladder Stone)

-सर्जरी के पहले पांच घण्टे पीने की अनुमति नहीं है। फिर आप प्रतिदिन 0.5 लीटर तक, हर 20 मिनट में गैर-कार्बोनेटेड पेयजल के एक-दो सिप पी सकते हैं। ऑपरेशन के एक दिन बाद, आप कॉफी, चाय, मीठे और कार्बोनेटेड पेय, अल्कोहल को छोड़कर, सामान्य पेय व्यवस्था जारी रख सकते हैं।
-आहार पर तीन दिनों से पानी पर ग्रेटेड पॉरेज, मैश किए हुए आलू, कम वसा वाले योग, कम वसा वाले कॉटेज पनीर, बेक्ड ग्राउंड ग्रेटिड सेब के रूप में उबले हुए सब्जियां शामिल हैं। पांचवे दिन, आप बिना किसी मांस के शोरबा में जर्दी, मैश किए हुए सूप के बिना उबले हुए आमलेट को खाना शुरु कर सकते हैं, आप उन्हें 100 ग्राम सफेद रोटी क्रूटोंस जोड़ सकते हैं। पहले सप्ताह के अंत तक, उबला हुआ मछली और जमीन के रूप में कम वसा वाले किस्मों का मांस, दूध के साथ तरल अनाज, मैश किए हुए केले की अनुमति है।
-इसके अलावा, पित्ताशय की थैली हटाने के बाद, परहेज डेढ़ महीने तक जारी रहता है। इसका मुख्य सिद्धांत यह है कि व्यंजनों को उबला हुआ या उबला जाना चाहिए, छोटे हिस्सों में भोजन, दिन में पांच-छ बार खाने की आवृत्ति। सभी धूम्रपान उत्पादों, मसालेदार उत्पाद, मसालेदार और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों को बाहर रखा गया है।
-डेढ़ महीनों के बाद, आप धीरे-धीरे चिकन जर्दी/सप्ताह में एक बार, उबला हुआ सॉसेज, शहद, हल्के पनीर, ताजा खट्टा क्रीम, ताजे फल और जामुन का स्वाद ले सकते हैं। चीनी के बजाय, स्वीटर्स का उपयोग करना बेहतर होता है। इस आहार को तालिका एन 5/हेपेटिक/कहा जाता है और इसे तीन महीने का पालन करने की आवश्यकता होगी। भविष्य में, गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट की अनुमति के साथ, आहार धीरे-धीरे विस्तारित होता है, लेकिन फिर भी मांस, मसालेदार और डिब्बाबंद व्यंजनों को धूम्रपान किया जाता है, मसालेदार उत्पादों को त्याग दिया जाना चाहिए। यकृत के पित्त कार्य को बेहतर बनाने के लिए, सब्जी फाइबर का उपयोग करना आवश्यक होता है। कच्ची सब्जियां और फल, वनस्पति तेल उपयोगी होते हैं। शराब बाहर रखा गया है।

पित्ताशय की पथरी होने के साइड इफेक्ट (Side Effect of Gall Bladder Stone)

हालांकि पित्ताशय की थैली के सर्जरी के बाद पाचन समस्याएं ज्यादा होती हैं, इसके अलावा पित्ताशय की पथरी के लक्षण जैसे सर्जरी के बाद दस्त, कब्ज की परेशानी भी होती हैं। पित्ताशय की थैली हटाने के साइड इफेक्ट हटाने के रूप में कई प्रकार की समस्याएं होती है।
-फैटी खाद्य पदार्थों को पचाने में कठिनाई- सर्जरी के पहले महीने में कुछ लोगों को फैटी खाद्य पदार्थों को पचाने में थोड़ा मुश्किल होता है। कम वसा वाले आहार खाने से मदद मिल सकती है।
-अस्थायी दस्त- पित्ताशय, डाइजेस्टिव ट्रैक्ट से आने वाले बेकार तत्वों और लीवर से आने वाले बाइल को स्टोर करता है। जब पित्ताशय निकल जाता है तो लीवर से निकलने वाला बाइल सीधे छोटी आंतों में चला जाता है। पित्ताशय के न होने से छोटी आंत में इसके आने से लीवर और उसके बीच की प्रक्रिया में कुछ समय के लिए दिक्कत आती है। जिसकी वजह से कई बार रोगी को डायरिया भी हो  जाता है। इसे क्लेसिस्टॉमी सिंड्रोम भी कहा जाता है, जो कि पित्ताशय निकलने के बाद कुछ दिनों तक रहता है।
-अस्थायी कब्ज- कुछ लोग पित्ताशय की थैली सर्जरी के बाद वे दर्द दवाओं से कब्ज हो जाते हैं। एक आहार जो फाइबर में समृद्ध हैं- सेम, ब्रान, पूरे अनाज, फल और सब्जियां रोकथाम और कब्ज से छुटकारा पाने में मदद कर सकते हैं।
-पित्त नली में पथरी-कुछ मामलों में, पित्ताशय की थैली सर्जरी के बाद आपके सामान्य पित्त नलिका में पत्थर बने रहेंगे। यह आपकी छोटी आंत में पित्त के प्रवाह को अवरुद्ध कर सकता है और इसके परिणामस्वरूप सर्जरी के तुरन्त बाद दर्द, बुखार, मतली, उल्टी, सूजन, और पीलिया हो सकता है। आपको अपने सामान्य पित्त नलिका में बनाए गए गैल्स्टोन को हटाने के लिए एक अतिरिक्त प्रक्रिया की आवश्यकता हो सकती है।
-आंतों की चोट- हालांकि यह दुर्लभ है, आपके पित्ताशय की थैली सर्जरी के दौरान उपयोग किए जाने वाले यंत्र आपकी आंतों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। सर्जरी के दौरान इस जटिलता के जोखिम को कम करने के लिए डॉक्टर उपाय करेंगे। यदि ऐसा होता है तो आपको पेट दर्द, मतली, उल्टी और बुखार का अनुभव हो सकता है।
इसके अलावा गॉल ब्लाडैर स्टोन होने के साइड इफेक्ट के कारण दूसरे बीमारी के होने का संकेत होता है-
-पित्ताशय में पथरी होने से पीलिया और गंभीर सर्जिकल स्थिति भी उभर सकती है।
-इससे संक्रमण, मवाद बनने और गॉल ब्लैडर में छेद होने के कारण पेरिटनाइटिस (पेट की झिल्ली का रोग) भी सकता है।
-पेनक्रियाटाइटिस जैसी जानलेवा स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।
-गॉल ब्लैडर में कैंसर हो सकता है। इस स्टोन से पीड़ित मरीजों के 6 से 18 प्रतिशत मामलों में आजीवन कैंसर पनपने का खतरा रहता है जो खासतौर पर उत्तर भारत में ज्यादा देखे गए हैं।
-बड़ी पथरियों से पीड़ित मरीजों में कैंसर विकसित होने की आंशका ज्यादा रहती है जबकि छोटी पथरियों से पीड़ितों में पीलिया या पेनक्रियाटाइटिस के मामले ज्यादा होते हैं।
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पित्ताशय की पथरी का घरेलू उपचार (Home Remedies for Gall Bladder Stone)

आम तौर पर पित्ताशय की पथरी या पित्त की थैली में स्टोन के लिए घरेलू नुस्ख़ों (home remedy for gall bladder stone) का ही ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। पित्ताशय की पथरी का आयुर्वेदिक इलाज बहुत ही आम होता है-

एप्पल सिडार विनेगार पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Apple Cider Vinegar Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

सेब डॉक्टर को दूर रखने में मदद करता है। इसलिए एक गिलास सेब के रस में सेब साइडर सिरका का एक बड़ा चम्मच मिलाकर नियमित रूप दिन में एक बार सेवन करना चाहिए। सेब में मोलिक एसिड होता है जो पित्त पथरी नरमी में सहायता करता है और सिरका पत्थर के कारण कोलेस्ट्रॉल बनाने से लीवर को रोकता है। यह एक पित्त की पथरी के हमले के दौरान दर्द को कम करने के लिए एक त्वरित उपाय है। पित्ताशय की पथरी के लक्षण से आराम दिलाने  में सेब का सिरका बहुत ही फायदेमंद होता है।
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नाशपाती पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Pear Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

नाशपाती में पेक्टिन नामक यौगिक होता है जो कोलेस्ट्रॉल से बनी पथरी को नरम बनाता है ताकि वे शरीर से आसानी से बाहर निकल सकें। वे पथरी के कारण होने वाले दर्द तथा अन्य लक्षणों से आराम दिलाने में सहायक होता है।

चुकंदर, खीरा और गाजर का रस पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Beetroot Mixture Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

पित्ताशय की थैली को साफ और मजबूत करने और लीवर की सफाई के लिए चुकंदर का रस, ककड़ी का रस और गाजर के रस को बराबर मात्रा में मिलाये। यह संयोजन आपको पेट और खून की सफाई में भी मदद करता है। खीरे में मौजूद उच्च पानी सामग्री और गाजर में विटामिन-सी की उच्च मात्रा मूत्राशय से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है।

सिंहपर्णी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Dandelion Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

सिंहपर्णी के पत्ते लीवर और मूत्राशय के कामकाज में सहायता, पित्त उत्सर्जन को बढ़ावा और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। एक कप पानी में एक बड़ा चम्मच सिंहपर्णी के पत्तों को मिलाये। फिर इसे अवशोषित करने के लिए पांच मिनट के लिए रख दें। अब इसमें एक चम्मच शहद मिलायें। मधुमेह रोगियों को इस उपचार से बचना चाहिए।
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पुदीना पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Mint Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

यह पित्त तथा अन्य पाचक रसों को बढ़ाता है। इसमें टेरपिन नामक यौगिक पाया जाता है जो प्रभावी रूप से पथरी को तोड़ता है। आप पुदीने की पत्तियों को उबालकर पिपरमेंट टी भी बना सकते हैं।

इसबगोल पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Isabgol Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

एक उच्च फाइबर आहार, पित्ताशय की थैली की पथरी के इलाज (home remedy for gall bladder stone) के लिए बहुत आवश्यक है। इसबगोल घुलनशील फाइबर का अच्छा स्रोत होने के कारण पित्त में कोलेस्ट्रॉल को बांधता है और पथरी के गठन को रोकने में मदद करता है। आप इसे अपने अन्य फाइबर युक्त भोजन के साथ या रात को बिस्तर पर जाने से पहले एक गिलास पानी के साथ ले सकते हैं।

नींबू पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Lemon Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

नींबू का रस प्रकृतिक रूप से अम्लीय होने के कारण यह सिरके की तरह कार्य करता है और लीवर में कोलेस्ट्रॉल को बनने से रोकता है। हर रोज खाली पेट चार नींबू का रस लें। इस प्रक्रिया को एक हफ्ते तक अपनाएं। इससे पथरी की समस्या (home remedy for gall bladder stone) आसानी से दूर हो सकती है।
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लाल शिमला मिर्च पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Red Capsicum Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

2013 में हुए एक अध्ययन के अनुसार, शरीर में भरपूर मात्रा में विटामिन-सी पथरी की समस्या कम करता है। एक लाल शिमला मिर्च में लगभग 95 मिलीग्राम विटामिन-सी होता है, यह मात्रा पथरी को रोकने के लिए काफी होती है। इसलिए अपने आहार में शिमला मिर्च को शामिल करें।
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साबुत अनाज पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Grain Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

पानी में घुलनशील फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों जैसे साबुत अनाज और अन्य अनाज को अपने आहार में भरपूर मात्रा में शामिल करें। फाइबर कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड के स्तर को कम कर स्वाभाविक रूप से पथरी को बनने से रोकने (home remedy for gall bladder stone) में मदद करते हैं।
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हल्दी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (Turmeric Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

पित्ताशय की पथरी के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपचार है। यह एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेट्री (प्रदाहनाशक) होती है। हल्दी पित्त, पित्त यौगिकों और पथरी को आसानी से तोड़ने में मदद करती है। ऐसा माना जाता है कि एक चम्मच हल्दी लेने से लगभग 80 प्रतिशत पथरी खत्म हो जाती है।

विटामिन सी पित्ताशय की पथरी निकालने में फायदेमंद (VitaminC Beneficial for Gall Bladder Stone Treatment)

विटामिन-सी शरीर के कोलेस्ट्रॉल को पित्त अम्ल में परिवर्तित करती है जो पथरी को तोड़ता है। आप विटामिन-सी संपूरक ले सकते हैं या ऐसे खाद्य पदार्थ खा सकते हैं जिनमें विटामिन-सी प्रचुर मात्रा में हो जैसे संतरा, टमाटर आदि। पथरी के दर्द के लिए यह एक उत्तम घरेलू उपाय है।
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डॉक्टर के पास कब जाना चाहिए ? (When to See a Doctor?)

पेट में दर्द इतना तेज होता है कि आप सीधे नहीं बैठ सकें। त्वचा और आंखों के सफेद भाग का पीला पड़ जाना। पेट में दर्द के साथ ठण्ड लगकर तेज बुखार आना या उल्टी आने जैसे लक्षण दृष्टिगोचर होने पर डॉक्टर के पास जायें।

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