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चिरौंजी का उपयोग आमतौर पर सूखे मेवों की तरह किया जाता है. कई लोग मिठाइयाँ बनाते समय या कोई भी मीठी डिश बनाते समय चिरौंजी का उपयोग करते हैं. छोटे से आकार वाली चिरौंजी कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होती है. आयुर्वेद में भी चिरौंजी के फायदों का वर्णन करते हुए लिखा गया है कि यह पुष्टिकारक है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों और डॉक्टरों का भी मानना है कि चिरौंजी शरीर की ताकत और यौन क्षमता बढ़ाने में यह बहुत उपयोगी है. इस लेख में हम आपको चिरौंजी के फायदे, नुकसान और औषधीय गुणों के बारे में बता रहे हैं. 

चिरौंजी क्या है? (What is Chironji?)

चिरौंजी का पेड़ लगभग 12-18 मी ऊँचा और साल भर हरा रहने वाला पौधा है. इसकी छाल बहुत ही मोटी और खुरदुरी होती है. इसकी पत्तियां 15-20 सेमी लम्बाई की गोल आकर में जालीदार सिरे युक्त होती हैं. इसके फल 8-12 मिमी के अंडाकार और गोलाकार होते हैं. इन फलों को तोड़कर अंदर से जो गुठली निकाली जाती है उसे ही चिरौंजी कहते हैं. 

अन्य भाषाओं में चिरौंजी के नाम (Name of Chironji in Different Languages)

चिरौंजी का वानस्पतिक नाम Buchanania cochinchinensis (Lour.) M.R. Almedia (बुकैनानिया कोचीनचाइनेन्सिस) Syn-Buchanania latifolia Roxb. Buchanania lanzan Spreng है. यह Anacardiaceae (ऐनाकार्डिऐसी) कुल का पौधा है. आइये जानते हैं कि अलग अलग भाषाओं में इसे किन नामों से पुकारा जाता है. 

Calumpang Nut Tree in : 

  • Hindi : चिरोंजी, चिरौंजी, चार, पियार
  • English : कुड्डापाह आल्मन्ड (Cuddapah almond), अल्मन्डेटे (Almondette), बुकनान्स मैंगों (Buchanan’s Mango)
  • Sanskrit : प्रियाल, खरस्कन्ध, बहुलवल्कल, तापसेष्ट, सन्नकद्रु,धनुष्पट, स्नेहबीज, चार, चारक, सन्नद्र, तापसप्रिय, उपवट, मोक्षवीर्य्य, द्रुसल्लक, वियल, धनुपट, प्रियालक, खद्रु;
  • Uttarakhand : मुरीआ (Muria), कटबहीलावा (Katbhulawa), पयाला (Payala)
  • Urdu : हब्ब-उस-समेना (Habb-us-samena), चिरौंजी (Chironji)
  • Odia : चारो (Charo), प्रियालो (Priyalo), चारकोली (Charkoli)
  • Kannad : चारा (Chaara), नुरुकल (Nurukkal)
  • Gujrati : चरोली (Charoli)
  • Telugu : सारापपु (Sarapappu), चार (Chara), चारुमामिदी (Charumamidi)
  • Tamil : तमिल-मुडइमा (Mudaima), सारइ (Sarai)
  • Bengali : चिरौंजी (Chironji), पियाल (Piyal);
  • Nepali : पियाल (Piyal), चिरौंजि (Chiraunjee), अचर (Acar), चिराउन्जी (Ciraaunji)
  • Punjabi : चिरोन्जी (Chironji)
  • Marathi : चारोली (Charoli), चरोली झाड (Charoli jhad), चार (Char)
  • Malyalam : प्रियालम् (Priyalam), मूरल (Mural)
  • Arabi : हाबुलसाम्नाह (Habulsamnah)
  • Persian : नुकुलेख्वाजह (Nakulekwajah)

चिरौंजी के औषधीय गुण (Medicinal Properties of Chironji in Hindi)

  • चिरौंजी का फल मधुर, अम्ल, कषाय, शीत, गुरु, स्निग्ध तथा कफपित्तशामक होता है।
  • यह वृष्य, हृद्य, बृंहण, तर्पण, बलकारक, विष्टम्भी, धातुवर्धक, वर्ण्य तथा संग्राही है।
  • यह तृष्णा, दाह, ज्वर, क्षत, क्षय, रक्तपित्त, योनिदोष तथा मेदोरोग नाशक होता है।
  • प्रियाल तैल मधुर, गुरु, श्लेष्मवर्धक, किञ्चित् उष्ण तथा वातपित्तज विकारों में हितकर होता है।
  • प्रियाल मज्जा मधुर, वृष्य, शुक्रल, स्निग्ध, शीत, मलस्तम्भक, आमवर्धक, दुर्जर, हृद्य, शुक्रल, दाह तथा वातपित्त शामक होती है।
  • पक्वफल वृष्य, गुरु, मधुर, अम्ल तथा  देर से पचने वाला होता है।
  • इसके बीज मधुर, वृष्य, दाह, पीड़ा तथा पित्त-शामक होते हैं।
  • इसकी मूल कषाय, कफपित्त तथा रुधिर-विकार-शामक होती है।
  • चिरौंजी के बीज का गोंद अतिसार-नाशक होता है।

चिरौंजी के फायदे और उपयोग (Uses and Benefits of Chironji in Hindi)

स्वादिष्ट होने के साथ-साथ चिरौंजी सेहत के काफी फायदेमंद भी है. सर्दी-खांसी दूर करने के अलावा यह गठिया और यौन क्षमता से जुड़े रोगों के इलाज में उपयोगी है. आइये चिरौंजी के फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं. 

सिरदर्द दूर करने में मदद करता है चिरौंजी (Chironji Benefits for Headache in Hindi)

सिरदर्द से परेशान होने पर पेनकिलर खाने की बजाय घरेलू उपायों को अपनाना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है. आयुर्वेद के अनुसार, चिरौंजी की गिरी के साथ, बादाम गिरी, खजूर, ककड़ी बीज और तिल को मिलाकर पीस लें. इस मिश्रण को दूध या पानी के साथ 5 ग्राम की मात्रा में लें. इससे सिरदर्द ठीक हो जाता है. 

सर्दी-खांसी से आराम दिलाता है चिरौंजी ( Chironji Benefits in Cold and Cough in Hindi)

अगर आप सर्दी से परेशान हैं तो नियमित तौर पर सीमित मात्रा में चिरौंजी खाना शुरू कर दें. इसके सेवन से सर्दी दूर होती है. 
इसी तरह खांसी से आराम पाने के लिए चिरौंजी की 5-10 ग्राम गिरी को घी में भूनकर पीस लें. इसके बाद इसे  200 मिली दूध में मिलाकर उबाल लें। उबालने के बाद इसमें 500 मिग्रा इलायची पाउडर और चीनी मिलाकर पीने से सर्दी-जुकाम और खांसी से आराम मिलता है।

पेचिश के इलाज में उपयोगी है चिरौजी (Chironji Benefits in Dysentry in Hindi)

दस्त के साथ खून आने की समस्या को अनदेखा ना करें बल्कि जितनी जल्दी हो सके 
  1. यदि अतिसार के साथ खून आ रहा हो तो चिरौंजी की छाल को बकरी के दूध से पीसकर मधु मिला कर पीने से लाभ होता है।
  2. 1-4 ग्राम चिरौंजी मूल एवं पत्र को पीसकर उसमें मक्खन मिलाकर सेवन करने से अतिसार का शमन होता है।
  3. 1-4 ग्राम चिरौंजी मूल चूर्ण को खाने से अतिसार बंद हो जाते हैं।

यौन क्षमता बढ़ाता है चिरौंजी (Chironji Increases Sexual Stamina in Hindi)

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों की यौन क्षमता कमजोर है उसके लिए चिरौंजी काफी उपयोगी है.  5-10 ग्राम चिरौंजी के बीजों को पीसकर उसमें मिश्री मिलाकर दूध के साथ खाएं. इसके नियमित सेवन से वीर्य को पोषण मिलता है और यौन क्षमता बढ़ती है।

गठिया के दर्द और सूजन से आराम दिलाता है चिरौंजी (Benefits of Chironji in Gout in Hindi)

तिल, चिरौंजी, मुलेठी, कमलनाल और बेंत-मूल इन सब को आवश्यकतानुसार लेकर बकरी के दूध में पीसकर लेप बना लें. अब इस लेप को जोड़ों पर लगाएं, इससे दर्द और सूजन से जल्दी आराम मिलता है. 

घाव को ठीक करता है चिरौंजी (Chironji Helps in Healing of Wounds in Hindi)

त्वचा में कहीं पर घाव हो जाए तो चिरौंजी के उपयोग से आप उसे ठीक कर सकते हैं. इसके लिए मंजीठ, हल्दी, भार्गी, हरीतकी, नीला थोथा, तालीसपत्र, प्रियाल आदि को पीसकर तेल में पका लें. तेल में पकाने के बाद इसे छानकर घाव पर लगाएं. इससे घाव जल्दी ठीक होता है. 

खुजली दूर करता है चिरौंजी (Chironji Help to Releive Itching in Hindi)

खुजली दूर करने के चिरौंजी को निम्न तरीकों से उपयोग कर सकते हैं. 
चिरौंजी की गिरी को गुलाब जल में पीसकर उसमें सुहागा मिलाकर खुजली वाली जगह पर लगाएं. इससे खुजली जल्दी दूर होती है.
प्रियाल गिरी और काले तिल को 10-10 ग्राम लेकर 250 मिली गाय के दूध में पीकर छान लें. अब इसमें मिश्री मिलाकर सुबह शाम पीने से साथ ही चिरौंजी और तिल को को दूध में पीसकर प्रभावित हिस्से में लगाने से खुजली और जलन से राहत मिलती है. 

मुंहासे हटाने में मदद करता है चिरौंजी (Chironji Helps in removing Pimples in Hindi) 

अगर आप बार बार मुंहासे निकलने से परेशान हैं और कोई उपाय नहीं सूझ रहा है तो एक बार चिरौंजी का उपयोग करके देखें. विशेषज्ञों का मानना है कि चिरौंजी को गुलाब जल में पीसकर चेहरे पर लगाने से मुंहासे जल्दी ठीक होते हैं. 

नाक कान से खून बहने की समस्या (रक्तपित्त) को ठीक करता है चिरौंजी (Chironji Hepls in reducing Nose and Ear Bleeding in Hindi)

गर्मियों के मौसम में कई लोग नाक, कान से खून निकलने की समस्या से परेशान रहते हैं. अगर आप भी उनमें से एक हैं तो चिरौंजी से पकाए दूध का सेवन करें. इसके सेवन से नाक कान से खून बहने (रक्तपित्त) की समस्या ठीक हो जाती है. 

शरीर की ताकत बढ़ाता है चिरौंजी (Chironji Improves Body Strength in Hindi)

अगर आप शारीरिक रुप से कमजोर हैं या थोड़ी सी मेहनत करने के बाद थक जाते हैं तो चिरौंजी का सेवन आपके लिए फायदेमंद है. ताज़ी चिरौंजी खाने से या दूध में चिरौंजी की खीर बनाकर खाने से शरीर को ताकत और पोषण मिलता है. 

बच्चों को पोषण प्रदान करता है चिरौंजी (Chironji gives Nutritional Value to Infants in Hindi)

स्तनपान छुड़ा देने पर शिशु को चिरौंजी की मींगी, मुलेठी, मधु, धान का लावा तथा मिश्री से बनाए गए लड्डू (मोदक) खिलाने से शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है।

चिरौंजी के उपयोगी भाग (Useful Parts of Chironji in Hindi)

आयुर्वेद के अनुसार चिरौंजी के निम्न भाग सेहत के लिए उपयोगी हैं. 

  • पञ्चाङ्ग
  • फल
  • पत्तियां  
  • तने की छाल
  • गोंद
  • बीज का तेल 
  • जड़ 

चिरौंजी का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Chironji in Hindi?)

आमतौर पर चिरौंजी की छाल का काढ़ा का सेवन 50-100 मिली मात्रा में करना चाहिए. अगर आप किसी गंभीर बीमारी के घरेलू इलाज के रूप में चिरौंजी का उपयोग करना चाहते हैं तो पहले डॉक्टर से सलाह लें. 

चिरौंजी का पौधा कहां पाया या उगाया जाता है?(Where is Chironji Found or Grown in Hindi?)

यह भारत के शुष्क राज्यों में 900 मी की ऊँचाई पर एवं मध्य भारत से पश्चिमी प्रायद्वीप एवं उत्तराखण्ड में 450 मी की ऊँचाई तक पाया जाता है।

Chironji: नव जीवन दे सकती है चिरौंजी

चिरौंजी का उपयोग आमतौर पर सूखे मेवों की तरह किया जाता है. कई लोग मिठाइयाँ बनाते समय या कोई भी मीठी डिश बनाते समय चिरौंजी का उपयोग करते हैं. छोटे से आकार वाली चिरौंजी कई तरह के पोषक तत्वों से भरपूर होती है. आयुर्वेद में भी चिरौंजी के फायदों का वर्णन करते हुए लिखा गया है कि यह पुष्टिकारक है. आयुर्वेदिक विशेषज्ञों और डॉक्टरों का भी मानना है कि चिरौंजी शरीर की ताकत और यौन क्षमता बढ़ाने में यह बहुत उपयोगी है. इस लेख में हम आपको चिरौंजी के फायदे, नुकसान और औषधीय गुणों के बारे में बता रहे हैं. 

चिरौंजी क्या है? (What is Chironji?)

चिरौंजी का पेड़ लगभग 12-18 मी ऊँचा और साल भर हरा रहने वाला पौधा है. इसकी छाल बहुत ही मोटी और खुरदुरी होती है. इसकी पत्तियां 15-20 सेमी लम्बाई की गोल आकर में जालीदार सिरे युक्त होती हैं. इसके फल 8-12 मिमी के अंडाकार और गोलाकार होते हैं. इन फलों को तोड़कर अंदर से जो गुठली निकाली जाती है उसे ही चिरौंजी कहते हैं. 

अन्य भाषाओं में चिरौंजी के नाम (Name of Chironji in Different Languages)

चिरौंजी का वानस्पतिक नाम Buchanania cochinchinensis (Lour.) M.R. Almedia (बुकैनानिया कोचीनचाइनेन्सिस) Syn-Buchanania latifolia Roxb. Buchanania lanzan Spreng है. यह Anacardiaceae (ऐनाकार्डिऐसी) कुल का पौधा है. आइये जानते हैं कि अलग अलग भाषाओं में इसे किन नामों से पुकारा जाता है. 

Calumpang Nut Tree in : 

  • Hindi : चिरोंजी, चिरौंजी, चार, पियार
  • English : कुड्डापाह आल्मन्ड (Cuddapah almond), अल्मन्डेटे (Almondette), बुकनान्स मैंगों (Buchanan’s Mango)
  • Sanskrit : प्रियाल, खरस्कन्ध, बहुलवल्कल, तापसेष्ट, सन्नकद्रु,धनुष्पट, स्नेहबीज, चार, चारक, सन्नद्र, तापसप्रिय, उपवट, मोक्षवीर्य्य, द्रुसल्लक, वियल, धनुपट, प्रियालक, खद्रु;
  • Uttarakhand : मुरीआ (Muria), कटबहीलावा (Katbhulawa), पयाला (Payala)
  • Urdu : हब्ब-उस-समेना (Habb-us-samena), चिरौंजी (Chironji)
  • Odia : चारो (Charo), प्रियालो (Priyalo), चारकोली (Charkoli)
  • Kannad : चारा (Chaara), नुरुकल (Nurukkal)
  • Gujrati : चरोली (Charoli)
  • Telugu : सारापपु (Sarapappu), चार (Chara), चारुमामिदी (Charumamidi)
  • Tamil : तमिल-मुडइमा (Mudaima), सारइ (Sarai)
  • Bengali : चिरौंजी (Chironji), पियाल (Piyal);
  • Nepali : पियाल (Piyal), चिरौंजि (Chiraunjee), अचर (Acar), चिराउन्जी (Ciraaunji)
  • Punjabi : चिरोन्जी (Chironji)
  • Marathi : चारोली (Charoli), चरोली झाड (Charoli jhad), चार (Char)
  • Malyalam : प्रियालम् (Priyalam), मूरल (Mural)
  • Arabi : हाबुलसाम्नाह (Habulsamnah)
  • Persian : नुकुलेख्वाजह (Nakulekwajah)

चिरौंजी के औषधीय गुण (Medicinal Properties of Chironji in Hindi)

  • चिरौंजी का फल मधुर, अम्ल, कषाय, शीत, गुरु, स्निग्ध तथा कफपित्तशामक होता है।
  • यह वृष्य, हृद्य, बृंहण, तर्पण, बलकारक, विष्टम्भी, धातुवर्धक, वर्ण्य तथा संग्राही है।
  • यह तृष्णा, दाह, ज्वर, क्षत, क्षय, रक्तपित्त, योनिदोष तथा मेदोरोग नाशक होता है।
  • प्रियाल तैल मधुर, गुरु, श्लेष्मवर्धक, किञ्चित् उष्ण तथा वातपित्तज विकारों में हितकर होता है।
  • प्रियाल मज्जा मधुर, वृष्य, शुक्रल, स्निग्ध, शीत, मलस्तम्भक, आमवर्धक, दुर्जर, हृद्य, शुक्रल, दाह तथा वातपित्त शामक होती है।
  • पक्वफल वृष्य, गुरु, मधुर, अम्ल तथा  देर से पचने वाला होता है।
  • इसके बीज मधुर, वृष्य, दाह, पीड़ा तथा पित्त-शामक होते हैं।
  • इसकी मूल कषाय, कफपित्त तथा रुधिर-विकार-शामक होती है।
  • चिरौंजी के बीज का गोंद अतिसार-नाशक होता है।

चिरौंजी के फायदे और उपयोग (Uses and Benefits of Chironji in Hindi)

स्वादिष्ट होने के साथ-साथ चिरौंजी सेहत के काफी फायदेमंद भी है. सर्दी-खांसी दूर करने के अलावा यह गठिया और यौन क्षमता से जुड़े रोगों के इलाज में उपयोगी है. आइये चिरौंजी के फायदों के बारे में विस्तार से जानते हैं. 

सिरदर्द दूर करने में मदद करता है चिरौंजी (Chironji Benefits for Headache in Hindi)

सिरदर्द से परेशान होने पर पेनकिलर खाने की बजाय घरेलू उपायों को अपनाना सेहत के लिए ज्यादा फायदेमंद है. आयुर्वेद के अनुसार, चिरौंजी की गिरी के साथ, बादाम गिरी, खजूर, ककड़ी बीज और तिल को मिलाकर पीस लें. इस मिश्रण को दूध या पानी के साथ 5 ग्राम की मात्रा में लें. इससे सिरदर्द ठीक हो जाता है. 

सर्दी-खांसी से आराम दिलाता है चिरौंजी ( Chironji Benefits in Cold and Cough in Hindi)

अगर आप सर्दी से परेशान हैं तो नियमित तौर पर सीमित मात्रा में चिरौंजी खाना शुरू कर दें. इसके सेवन से सर्दी दूर होती है. 
इसी तरह खांसी से आराम पाने के लिए चिरौंजी की 5-10 ग्राम गिरी को घी में भूनकर पीस लें. इसके बाद इसे  200 मिली दूध में मिलाकर उबाल लें। उबालने के बाद इसमें 500 मिग्रा इलायची पाउडर और चीनी मिलाकर पीने से सर्दी-जुकाम और खांसी से आराम मिलता है।

पेचिश के इलाज में उपयोगी है चिरौजी (Chironji Benefits in Dysentry in Hindi)

दस्त के साथ खून आने की समस्या को अनदेखा ना करें बल्कि जितनी जल्दी हो सके 
  1. यदि अतिसार के साथ खून आ रहा हो तो चिरौंजी की छाल को बकरी के दूध से पीसकर मधु मिला कर पीने से लाभ होता है।
  2. 1-4 ग्राम चिरौंजी मूल एवं पत्र को पीसकर उसमें मक्खन मिलाकर सेवन करने से अतिसार का शमन होता है।
  3. 1-4 ग्राम चिरौंजी मूल चूर्ण को खाने से अतिसार बंद हो जाते हैं।

यौन क्षमता बढ़ाता है चिरौंजी (Chironji Increases Sexual Stamina in Hindi)

विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों की यौन क्षमता कमजोर है उसके लिए चिरौंजी काफी उपयोगी है.  5-10 ग्राम चिरौंजी के बीजों को पीसकर उसमें मिश्री मिलाकर दूध के साथ खाएं. इसके नियमित सेवन से वीर्य को पोषण मिलता है और यौन क्षमता बढ़ती है।

गठिया के दर्द और सूजन से आराम दिलाता है चिरौंजी (Benefits of Chironji in Gout in Hindi)

तिल, चिरौंजी, मुलेठी, कमलनाल और बेंत-मूल इन सब को आवश्यकतानुसार लेकर बकरी के दूध में पीसकर लेप बना लें. अब इस लेप को जोड़ों पर लगाएं, इससे दर्द और सूजन से जल्दी आराम मिलता है. 

घाव को ठीक करता है चिरौंजी (Chironji Helps in Healing of Wounds in Hindi)

त्वचा में कहीं पर घाव हो जाए तो चिरौंजी के उपयोग से आप उसे ठीक कर सकते हैं. इसके लिए मंजीठ, हल्दी, भार्गी, हरीतकी, नीला थोथा, तालीसपत्र, प्रियाल आदि को पीसकर तेल में पका लें. तेल में पकाने के बाद इसे छानकर घाव पर लगाएं. इससे घाव जल्दी ठीक होता है. 

खुजली दूर करता है चिरौंजी (Chironji Help to Releive Itching in Hindi)

खुजली दूर करने के चिरौंजी को निम्न तरीकों से उपयोग कर सकते हैं. 
चिरौंजी की गिरी को गुलाब जल में पीसकर उसमें सुहागा मिलाकर खुजली वाली जगह पर लगाएं. इससे खुजली जल्दी दूर होती है.
प्रियाल गिरी और काले तिल को 10-10 ग्राम लेकर 250 मिली गाय के दूध में पीकर छान लें. अब इसमें मिश्री मिलाकर सुबह शाम पीने से साथ ही चिरौंजी और तिल को को दूध में पीसकर प्रभावित हिस्से में लगाने से खुजली और जलन से राहत मिलती है. 

मुंहासे हटाने में मदद करता है चिरौंजी (Chironji Helps in removing Pimples in Hindi) 

अगर आप बार बार मुंहासे निकलने से परेशान हैं और कोई उपाय नहीं सूझ रहा है तो एक बार चिरौंजी का उपयोग करके देखें. विशेषज्ञों का मानना है कि चिरौंजी को गुलाब जल में पीसकर चेहरे पर लगाने से मुंहासे जल्दी ठीक होते हैं. 

नाक कान से खून बहने की समस्या (रक्तपित्त) को ठीक करता है चिरौंजी (Chironji Hepls in reducing Nose and Ear Bleeding in Hindi)

गर्मियों के मौसम में कई लोग नाक, कान से खून निकलने की समस्या से परेशान रहते हैं. अगर आप भी उनमें से एक हैं तो चिरौंजी से पकाए दूध का सेवन करें. इसके सेवन से नाक कान से खून बहने (रक्तपित्त) की समस्या ठीक हो जाती है. 

शरीर की ताकत बढ़ाता है चिरौंजी (Chironji Improves Body Strength in Hindi)

अगर आप शारीरिक रुप से कमजोर हैं या थोड़ी सी मेहनत करने के बाद थक जाते हैं तो चिरौंजी का सेवन आपके लिए फायदेमंद है. ताज़ी चिरौंजी खाने से या दूध में चिरौंजी की खीर बनाकर खाने से शरीर को ताकत और पोषण मिलता है. 

बच्चों को पोषण प्रदान करता है चिरौंजी (Chironji gives Nutritional Value to Infants in Hindi)

स्तनपान छुड़ा देने पर शिशु को चिरौंजी की मींगी, मुलेठी, मधु, धान का लावा तथा मिश्री से बनाए गए लड्डू (मोदक) खिलाने से शरीर को पर्याप्त पोषण मिलता है।

चिरौंजी के उपयोगी भाग (Useful Parts of Chironji in Hindi)

आयुर्वेद के अनुसार चिरौंजी के निम्न भाग सेहत के लिए उपयोगी हैं. 

  • पञ्चाङ्ग
  • फल
  • पत्तियां  
  • तने की छाल
  • गोंद
  • बीज का तेल 
  • जड़ 

चिरौंजी का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Chironji in Hindi?)

आमतौर पर चिरौंजी की छाल का काढ़ा का सेवन 50-100 मिली मात्रा में करना चाहिए. अगर आप किसी गंभीर बीमारी के घरेलू इलाज के रूप में चिरौंजी का उपयोग करना चाहते हैं तो पहले डॉक्टर से सलाह लें. 

चिरौंजी का पौधा कहां पाया या उगाया जाता है?(Where is Chironji Found or Grown in Hindi?)

यह भारत के शुष्क राज्यों में 900 मी की ऊँचाई पर एवं मध्य भारत से पश्चिमी प्रायद्वीप एवं उत्तराखण्ड में 450 मी की ऊँचाई तक पाया जाता है।

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