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बड़ानल को नरकट (Giant bamboo reed or Narakat) भी कहा जाता है। नरकट एक जड़ी-बूटी है, और इसके कई सारे औषधीय गुण हैं। क्या आप यह जानते हैं कि मूत्र रोगमासिक धर्म विकारदाद-खाज-खुजली आदि में नरकट के इस्तेमाल से फायदे (Giant bamboo reed benefits and uses) मिलते हैं। इतना ही नहीं, त्वचा रोगविसर्प रोगटाइफाइ़ड, कुत्ते या कीड़े-मकौड़ों के काटने पर भी नरकट के औषधीय गुण से लाभ मिलता है।
आयुर्वेद में नरकट के गुण के बारे में कई सारी अच्छी बातें बताई गई हैं। आइए यहां नरकट से फायदे और नुकसान (Giant bamboo reed benefits and side effects) के बारे में जानते हैं।

नरकट (बड़ानल) क्या है? (What is Giant bamboo reed or Narakat in Hindi?)

आयुर्वेदिक ग्रंथों में नरकट के दो भेद किए हैं जो ये हैंः–
  1. नल
  2. महानल
इसमें से नल को शीतवीर्य एवं रक्तपित्तहर कहा है। इसके पौधे जल प्रचुर, दलदली स्थानों में अधिक पाए जाते हैं। इसके झुप 3-8 मीटर ऊँचे, बांस जैसे, लेकिन बांस से थोड़े छोटे होते हैं। यहां नरकट के फायदे और नुकसान की जानकारी बहुत ही आसान भाषा (Giant bamboo reed benefits and side effects in Hindi) में लिखी गई है ताकि आप नरकट के औषधीय गुण से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं।

अन्य भाषाओं में नरकट (बड़ानल) के नाम (Name of Giant bamboo reed or Narakat in Different Languages)

बड़ानल का वानस्पतिक नाम Phragmites karka (Retz.) Trin. ex Steud. (प्रैंग्माइटीज कर्का) है, और यह Poaceae (पोएसी) कुल का है। इसके अन्य ये भी नाम हैंः-
Giant bamboo reed or Narakat in –
  • Hindi- बड़ानल, नरकट
  • Sanskrit- नल, पोटगल, शून्यमध्य, धमन, रन्धी, कुक्षिरन्ध्र, कीचक
  • English- Giant bamboo reed (जाएन्ट बेम्बैरीड), इटैलिएन या ग्रेट बैम्बू रीड (Italian or Great bamboo reed)
  • Gujarati- नाली (Nali), नाइरी (Nairi)
  • Tamil- कोरुक्कोई (Korukkoi)
  • Telugu- अदाविकीकसागड्डी (Adavikiksagddi)
  • Bengali- गहानाल (Gahanal)
  • Nepali- नर्कट (Narkat), धुलो नरकट (Dhulo narkat)
  • Punjabi- बन्षि (Banshi)
  • Marathi- नल (Nal)
  • Malayalam- नादम (Nadam)

नरकट (बड़ानल) के औषधीय गुण (Medicinal Properties of Giant bamboo reed or Narakat in Hindi)

नरकट के आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव ये हैंः-
नल मधुर, तिक्त, कषाय, शीत, किञ्चित् उष्ण, लघु, स्निग्ध और त्रिदोषहर होता है। यह दीपन, मूत्रशोधक, वृष्य, वीर्यवर्धक और रुचिकारक होता है। इसका प्रकन्द मृदुकारी, मूत्रल, बलकारक, उत्तेजक और स्तन्यस्रावनाशक होता है।

नरकट (बड़ानल) के फायदे और उपयोग (Giant bamboo reed (Narakat) Benefits and Uses in Hindi)

नरकट के फायदे, प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

कीड़े-मकौड़े के काटने पर नरकट (बड़ानल) के सेवन से लाभ (Giant bamboo reed (Narakat) is Beneficial for Insect Bite in Hindi)

चन्दन, रास्ना, इलायची, हरेणु, नल, वञ्जुल, कूठ, लामज्जक लें। इसके साथ ही तगर, नल लें। इससे बने अगद का इस्तेमाल करने से कीड़े-मकौड़ों के काटने से होने वाली परेशानी में फायदा होता है। लूता दंशजन्य विषाक्त प्रभावों ठीक होता है।
और पढ़ेंः कीड़े-मकौडों या कीटों के काटने पर कनेक के फायदे

मूत्र रोग में नरकट (बड़ानल) के सेवन से लाभ (Giant bamboo reed (Narakat) Benefits for Urinary Disease in Hindi)

  • पेशाब में संबंधित कई बीमारियों में नरकट के औषधीय गुण से फायदा होता है। आप बराबर मात्रा में नल, कूठ, कास, ईख और बला की जड़ लें। इसका काढ़ा बनायें। 10-20 मिली काढ़ा में मिश्री मिलाकर रोज सुबह ठंडा कर पीने से पेशाब के रुक-रुक कर होने की समस्या में लाभ होता है।
  • नल, पाषाणभेद, दर्भ, गन्ना, खीरा और विजयसार को समान मात्रा में लेकर कूट लें। इसे दूध में पकाएं। जब यह एक चौथाई बच जाए तो घी मिलाकर पिलाने से पेशाब में दर्द और रुक-रुक कर पेशाब होने की बीमारी में लाभ होता है।
  • नल की जड़ का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से मूत्र के कई विकारों में लाभ होता है।

और पढ़ें : मूत्र रोग में मरिच फायदेमंद

मासिक धर्म विकार में नरकट (बड़ानल) के फायदे (Giant bamboo reed (Narakat) Uses to Treat Menstrual Disorder in Hindi)

मासिक धर्म विकार में बड़ानल के सेवन से फायदा मिलता है। इसके लिए 20 मिली नल की जड़ काढ़ा में 2 पिप्पली मिला लें। इसका सेवन करें। इससे लाभ होता है।

और पढ़ेंः मासिक धर्म में कम ब्लीडिंग होने पर पपीता फायदेमंद

नरकट (बड़ानल) के औषधीय गुण से गठिया का इलाज (Benefits of Giant bamboo reed (Narakat) to Treat Arthritis in Hindi)

गठिया के रोग में भी नरकट से फायदा ले सकते हैं। इसके लिए आपको नल की जड़ को पीस लेना है। इसे गुनगुना करके दर्द वाले स्थान पर लेप करना है। इससे बीमारी ठीक होती है।


और पढ़ेंः अनंतमूल (कृष्णसारिवा) के गुण से जोड़ों के दर्द और गठिया में फायदा

त्वचा रोग के इलाज की आयुर्वेदिक दवा है बड़ानल (नरकट): Uses of Ayurvedic Medicine Giant bamboo reed (Narakat) for Skin Disease in Hindi

त्वचा रोग जैसे दाद-खाज या खुजली होने पर नरकट के गुण लाभ पहुंचाते हैं। इसके लिए नरकट की जड़ को पीसकर बीमारी वाले अंग पर लगाएं। इससे दाद-खाज- खुजली आदि त्वचा विकार ठीक होते हैं।


और पढ़ेंः त्वचा रोग में मूली के फायदे

टाइफाइड रोग के इलाज की आयुर्वेदिक दवा है नरकट (बड़ानल): Uses of Ayurvedic Medicine Giant bamboo reed (Narakat) for Typhoid Treatment in Hindi

बराबर मात्रा में नल, वेतस, मूर्वा और देवदारु की जड़ लें। इससे काढ़ा बना लें। 10-20 मिली काढ़ा का सेवन करने से टाइफाइड बुखार में लाभ होता है। उपाय करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।

और पढ़ेंः टाइफाइड के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज

कुत्ते के काटने पर नरकट (बड़ानल) के फायदे (Giant bamboo reed (Narakat) is Beneficial for Dog Bite in Hindi)

कुत्ते के काटने पर शरीर में जो विष आता है उसके उपचार के लिए नरकट का इस्तेमाल कर सकते हैं। 2-4 ग्राम नल की जड़ को पीस लें। इसका सेवन करें। इसके साथ ही कुत्ते के काटने वाले स्थान पर लेप करें। इससे विष के असर को कम करने में मदद मिलती है।


और पढ़ेंः बिच्छू के काटने पर पपीते का प्रयोग

स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए नरकट (बड़ानल) का सेवन लाभदायक (Giant bamboo reed (Narakat) is Beneficial for Increasing Breast Milk in Hindi)

कई महिलाओं को स्तनों में दूध की कमी होती है। आप बड़ानल (नरकट) के सेवन में दूध को बढ़ा सकती हैं। नल की जड़ का काढ़ा बना लें। 10-30 मिली मात्रा में सेवन करें। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।


और पढ़ेंः बला के सेवन से गर्भवती महिलाओं को लाभ

नरकट (बड़ानल) के औषधीय गुण से विसर्प रोग का इलाज (Benefits of Giant bamboo reed (Narakat) to Treat Erysipelas in Hindi)

  • शैवाल, नल की जड़, वीरा और गंधप्रियंगु का पेस्ट बना लें। पेस्ट में थोड़ा घी मिलाकर लेप करने से कफज दोष के कारण होने वाले विसर्प रोग में लाभ होता है।
  • हरड़, बहेड़ा, आँवला, पद्मकाष्ठ, खस, मंजीठ, कनेर लें। इसके साथ ही नल की जड़ और अनन्तमूल लें। सभी को जल से पीसकर लेप करने से कफज दोष के कारण होने वाले विसर्प रोग में लाभ होता है।
  • नल की जड़ को पीसकर थोड़ा घी मिलाकर लेप करने से भी विसर्प में लाभ होता है।
और पढ़ेंः विसर्प रोग में चिरायता के फायदे

नरकट (बड़ानल) के उपयोगी भाग (Beneficial Part of Giant bamboo reed (Narakat) in Hindi)

नरकट के इन भागों का इस्तेमाल किया जाता हैः-
जड़

नरकट (बड़ानल) का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Giant bamboo reed (Narakat) in Hindi?)

नरकट को इतनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिएः-
  • काढ़ा- 10-20 मिली
  • पेस्ट- 2-4 ग्राम 
हां नरकट के फायदे और नुकसान की जानकारी बहुत ही आसान भाषा (Giant bamboo reed benefits and side effects in Hindi) में लिखी गई है ताकि आप नरकट के औषधीय गुण से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं, लेकिन किसी बीमारी के लिए नरकट का सेवन करने या नरकट का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

नरकट (बड़ानल) कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Giant bamboo reed (Narakat) Found or Grown?)

बड़ानल भारत के हिमालय क्षेत्र में पाया जाता है। यह उष्ण घाटियों में 1000 मीटर की ऊँचाई तक एवं दलदलों में या नदियों के किनारे पर पाया जाता है।

नरकट (बड़ानल) के फायदे हैरान कर देंगे आपको

बड़ानल को नरकट (Giant bamboo reed or Narakat) भी कहा जाता है। नरकट एक जड़ी-बूटी है, और इसके कई सारे औषधीय गुण हैं। क्या आप यह जानते हैं कि मूत्र रोगमासिक धर्म विकारदाद-खाज-खुजली आदि में नरकट के इस्तेमाल से फायदे (Giant bamboo reed benefits and uses) मिलते हैं। इतना ही नहीं, त्वचा रोगविसर्प रोगटाइफाइ़ड, कुत्ते या कीड़े-मकौड़ों के काटने पर भी नरकट के औषधीय गुण से लाभ मिलता है।
आयुर्वेद में नरकट के गुण के बारे में कई सारी अच्छी बातें बताई गई हैं। आइए यहां नरकट से फायदे और नुकसान (Giant bamboo reed benefits and side effects) के बारे में जानते हैं।

नरकट (बड़ानल) क्या है? (What is Giant bamboo reed or Narakat in Hindi?)

आयुर्वेदिक ग्रंथों में नरकट के दो भेद किए हैं जो ये हैंः–
  1. नल
  2. महानल
इसमें से नल को शीतवीर्य एवं रक्तपित्तहर कहा है। इसके पौधे जल प्रचुर, दलदली स्थानों में अधिक पाए जाते हैं। इसके झुप 3-8 मीटर ऊँचे, बांस जैसे, लेकिन बांस से थोड़े छोटे होते हैं। यहां नरकट के फायदे और नुकसान की जानकारी बहुत ही आसान भाषा (Giant bamboo reed benefits and side effects in Hindi) में लिखी गई है ताकि आप नरकट के औषधीय गुण से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं।

अन्य भाषाओं में नरकट (बड़ानल) के नाम (Name of Giant bamboo reed or Narakat in Different Languages)

बड़ानल का वानस्पतिक नाम Phragmites karka (Retz.) Trin. ex Steud. (प्रैंग्माइटीज कर्का) है, और यह Poaceae (पोएसी) कुल का है। इसके अन्य ये भी नाम हैंः-
Giant bamboo reed or Narakat in –
  • Hindi- बड़ानल, नरकट
  • Sanskrit- नल, पोटगल, शून्यमध्य, धमन, रन्धी, कुक्षिरन्ध्र, कीचक
  • English- Giant bamboo reed (जाएन्ट बेम्बैरीड), इटैलिएन या ग्रेट बैम्बू रीड (Italian or Great bamboo reed)
  • Gujarati- नाली (Nali), नाइरी (Nairi)
  • Tamil- कोरुक्कोई (Korukkoi)
  • Telugu- अदाविकीकसागड्डी (Adavikiksagddi)
  • Bengali- गहानाल (Gahanal)
  • Nepali- नर्कट (Narkat), धुलो नरकट (Dhulo narkat)
  • Punjabi- बन्षि (Banshi)
  • Marathi- नल (Nal)
  • Malayalam- नादम (Nadam)

नरकट (बड़ानल) के औषधीय गुण (Medicinal Properties of Giant bamboo reed or Narakat in Hindi)

नरकट के आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव ये हैंः-
नल मधुर, तिक्त, कषाय, शीत, किञ्चित् उष्ण, लघु, स्निग्ध और त्रिदोषहर होता है। यह दीपन, मूत्रशोधक, वृष्य, वीर्यवर्धक और रुचिकारक होता है। इसका प्रकन्द मृदुकारी, मूत्रल, बलकारक, उत्तेजक और स्तन्यस्रावनाशक होता है।

नरकट (बड़ानल) के फायदे और उपयोग (Giant bamboo reed (Narakat) Benefits and Uses in Hindi)

नरकट के फायदे, प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

कीड़े-मकौड़े के काटने पर नरकट (बड़ानल) के सेवन से लाभ (Giant bamboo reed (Narakat) is Beneficial for Insect Bite in Hindi)

चन्दन, रास्ना, इलायची, हरेणु, नल, वञ्जुल, कूठ, लामज्जक लें। इसके साथ ही तगर, नल लें। इससे बने अगद का इस्तेमाल करने से कीड़े-मकौड़ों के काटने से होने वाली परेशानी में फायदा होता है। लूता दंशजन्य विषाक्त प्रभावों ठीक होता है।
और पढ़ेंः कीड़े-मकौडों या कीटों के काटने पर कनेक के फायदे

मूत्र रोग में नरकट (बड़ानल) के सेवन से लाभ (Giant bamboo reed (Narakat) Benefits for Urinary Disease in Hindi)

  • पेशाब में संबंधित कई बीमारियों में नरकट के औषधीय गुण से फायदा होता है। आप बराबर मात्रा में नल, कूठ, कास, ईख और बला की जड़ लें। इसका काढ़ा बनायें। 10-20 मिली काढ़ा में मिश्री मिलाकर रोज सुबह ठंडा कर पीने से पेशाब के रुक-रुक कर होने की समस्या में लाभ होता है।
  • नल, पाषाणभेद, दर्भ, गन्ना, खीरा और विजयसार को समान मात्रा में लेकर कूट लें। इसे दूध में पकाएं। जब यह एक चौथाई बच जाए तो घी मिलाकर पिलाने से पेशाब में दर्द और रुक-रुक कर पेशाब होने की बीमारी में लाभ होता है।
  • नल की जड़ का काढ़ा बनाकर 10-30 मिली मात्रा में सेवन करने से मूत्र के कई विकारों में लाभ होता है।

और पढ़ें : मूत्र रोग में मरिच फायदेमंद

मासिक धर्म विकार में नरकट (बड़ानल) के फायदे (Giant bamboo reed (Narakat) Uses to Treat Menstrual Disorder in Hindi)

मासिक धर्म विकार में बड़ानल के सेवन से फायदा मिलता है। इसके लिए 20 मिली नल की जड़ काढ़ा में 2 पिप्पली मिला लें। इसका सेवन करें। इससे लाभ होता है।

और पढ़ेंः मासिक धर्म में कम ब्लीडिंग होने पर पपीता फायदेमंद

नरकट (बड़ानल) के औषधीय गुण से गठिया का इलाज (Benefits of Giant bamboo reed (Narakat) to Treat Arthritis in Hindi)

गठिया के रोग में भी नरकट से फायदा ले सकते हैं। इसके लिए आपको नल की जड़ को पीस लेना है। इसे गुनगुना करके दर्द वाले स्थान पर लेप करना है। इससे बीमारी ठीक होती है।


और पढ़ेंः अनंतमूल (कृष्णसारिवा) के गुण से जोड़ों के दर्द और गठिया में फायदा

त्वचा रोग के इलाज की आयुर्वेदिक दवा है बड़ानल (नरकट): Uses of Ayurvedic Medicine Giant bamboo reed (Narakat) for Skin Disease in Hindi

त्वचा रोग जैसे दाद-खाज या खुजली होने पर नरकट के गुण लाभ पहुंचाते हैं। इसके लिए नरकट की जड़ को पीसकर बीमारी वाले अंग पर लगाएं। इससे दाद-खाज- खुजली आदि त्वचा विकार ठीक होते हैं।


और पढ़ेंः त्वचा रोग में मूली के फायदे

टाइफाइड रोग के इलाज की आयुर्वेदिक दवा है नरकट (बड़ानल): Uses of Ayurvedic Medicine Giant bamboo reed (Narakat) for Typhoid Treatment in Hindi

बराबर मात्रा में नल, वेतस, मूर्वा और देवदारु की जड़ लें। इससे काढ़ा बना लें। 10-20 मिली काढ़ा का सेवन करने से टाइफाइड बुखार में लाभ होता है। उपाय करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर परामर्श लें।

और पढ़ेंः टाइफाइड के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज

कुत्ते के काटने पर नरकट (बड़ानल) के फायदे (Giant bamboo reed (Narakat) is Beneficial for Dog Bite in Hindi)

कुत्ते के काटने पर शरीर में जो विष आता है उसके उपचार के लिए नरकट का इस्तेमाल कर सकते हैं। 2-4 ग्राम नल की जड़ को पीस लें। इसका सेवन करें। इसके साथ ही कुत्ते के काटने वाले स्थान पर लेप करें। इससे विष के असर को कम करने में मदद मिलती है।


और पढ़ेंः बिच्छू के काटने पर पपीते का प्रयोग

स्तनों में दूध बढ़ाने के लिए नरकट (बड़ानल) का सेवन लाभदायक (Giant bamboo reed (Narakat) is Beneficial for Increasing Breast Milk in Hindi)

कई महिलाओं को स्तनों में दूध की कमी होती है। आप बड़ानल (नरकट) के सेवन में दूध को बढ़ा सकती हैं। नल की जड़ का काढ़ा बना लें। 10-30 मिली मात्रा में सेवन करें। इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।


और पढ़ेंः बला के सेवन से गर्भवती महिलाओं को लाभ

नरकट (बड़ानल) के औषधीय गुण से विसर्प रोग का इलाज (Benefits of Giant bamboo reed (Narakat) to Treat Erysipelas in Hindi)

  • शैवाल, नल की जड़, वीरा और गंधप्रियंगु का पेस्ट बना लें। पेस्ट में थोड़ा घी मिलाकर लेप करने से कफज दोष के कारण होने वाले विसर्प रोग में लाभ होता है।
  • हरड़, बहेड़ा, आँवला, पद्मकाष्ठ, खस, मंजीठ, कनेर लें। इसके साथ ही नल की जड़ और अनन्तमूल लें। सभी को जल से पीसकर लेप करने से कफज दोष के कारण होने वाले विसर्प रोग में लाभ होता है।
  • नल की जड़ को पीसकर थोड़ा घी मिलाकर लेप करने से भी विसर्प में लाभ होता है।
और पढ़ेंः विसर्प रोग में चिरायता के फायदे

नरकट (बड़ानल) के उपयोगी भाग (Beneficial Part of Giant bamboo reed (Narakat) in Hindi)

नरकट के इन भागों का इस्तेमाल किया जाता हैः-
जड़

नरकट (बड़ानल) का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Giant bamboo reed (Narakat) in Hindi?)

नरकट को इतनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिएः-
  • काढ़ा- 10-20 मिली
  • पेस्ट- 2-4 ग्राम 
हां नरकट के फायदे और नुकसान की जानकारी बहुत ही आसान भाषा (Giant bamboo reed benefits and side effects in Hindi) में लिखी गई है ताकि आप नरकट के औषधीय गुण से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं, लेकिन किसी बीमारी के लिए नरकट का सेवन करने या नरकट का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

नरकट (बड़ानल) कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Giant bamboo reed (Narakat) Found or Grown?)

बड़ानल भारत के हिमालय क्षेत्र में पाया जाता है। यह उष्ण घाटियों में 1000 मीटर की ऊँचाई तक एवं दलदलों में या नदियों के किनारे पर पाया जाता है।

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