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केला (Banana) से कौन परिचित नहीं होगा। भारत सहित पूरे विश्व में केला को लोग बहुत ही पसंद से खाते हैं। केला और दूध अनेकों लोगों का पसंदीदा भोजन है। बहुत सारी जगहों पर केले के फूल की सब्जी भी बनाई जाती है, तो कई स्थानों पर केले के पत्तों में भोजन किया जाता है। क्या आप यह जानते हैं कि केला एक जड़ी-बूटी भी है, और अधिक प्यास लगने की समस्या, घाव, सर्दी-खांसी, जैसी बीमारियों में केला के इस्तेमाल से फायदे (Banana benefits and uses) मिलते हैं। इतना ही नहीं, कुष्ठ रोग, कान के रोग, दस्त आदि रोगों में भी केला के औषधीय गुण से लाभ मिलता है।
आयुर्वेद के अनुसार, केला को कदली, केरा भी बोला जाता है। आप आंखों के रोग, आग से जलने पर, और पेचिश रोग में केला के औषधीय गुण के फायदे ले सकते हैं। आप गोनोरिया, बुखार, और शारीरिक कमजोरी होने पर भी केला से लाभ ले सकते हैं। आइए यहां एक-एक कर जानते हैं कि केला के सेवन या उपयोग करने से कितनी सारी बीमारियों में फायदा होता है, साथ ही यह भी जानते हैं कि केला से क्या-क्या नुकसान (Banana side effects) हो सकता है। 

केला क्या है? (What is Banana in Hindi?)

प्राचीन काल से केले का प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है। केले के वृक्ष को पवित्र मानकर उसकी पूजा भी की जाती है। कई आयुर्वेदिक किताबों में केले की कई प्रजातियों का जिक्र किया गया है। धन्वन्तरी निघण्टु के मतानुसार, केले की दो प्रजातियां होती हैं, जो ये हैंः-
  1. कदली 
  2. काष्ठकदली होती हैं। 
राजनिघण्टु के मतानुसार केले की चार प्रजातियां होती हैं, जो ये हैंः-
  1. कदली
  2. काष्ठकदली
  3. गिरीकदली
  4. सुवर्णमोचा 
भावप्रकाश-निघण्टु के मतानुसार भी केले की कई प्रजातियां होती हैं, जो ये हैंः-
1.माणिक्य
2.मर्त्य 
3.अमृत 
4.चम्पकादि
यहां केला के फायदे और नुकसान की जानकारी बहुत ही आसान भाषा (Banana benefits and side effects in Hindi) में लिखी गई है ताकि आप केला के औषधीय गुण से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं।

अन्य भाषाओं में केला के नाम (Name of Banana in Different Languages)

केला का वानस्पतिक नाम Musa paradisiaca Linn.(म्यूजा पैराडिजिएका) Syn-Musa sapientum Linn. है, और यह Musaceae (म्यूजेसी) कुल का है। केला के अन्य ये नाम भी हैंः-
Banana in –
  • Hindi- केला, कदली, केरा
  • Sanskrit- कदली, वारणा, मोचा, अम्बुसारा, अंशुमतीफला, वारणबुसा, रम्भा, काष्ठीला 
  • English- प्लेन्टेन (Plantain), बनाना (Banana), ऐडम्स् फिग (Adam’s Fig), Banana tree (बनाना ट्री)
  • Assamese- कोल (Kol), तल्हा (Talha)
  • Oriya- कोदोली (Kodoli), रामोकोदिली (Ramokodili) 
  • Urdu- केला (Kela)
  • Kannada- बालेहन्नु (Balehannu), कदली (Kadali)
  • Gujarati- केला (Kela)
  • Tamil- कदली (Kadali), वलई (Valai)
  • Telugu- अरटि (Arati), कदलमु (Kadalamu)
  • Bengali- केला (Kela), कोला (Kola), कोदली (Kodali)
  • Nepali- केरा (Kera)
  • Punjabi- केला (Kela), खेला (Khela)
  • Marathi- केला (Kela), कदली (Kadali)
  • Malayalam- वला (Vala),  क्षेत्रकदली (Chetrakadali), कदलम (Kadalam)
  • Arabic- शाजरातुल्ताह्ल (Shajratultahl)
  • Persian- तुहलतुला (Tuhltula), मौज (Mouz), मौज (Mouz)

केला के औषधीय गुण (Medicinal Properties of Banana in Hindi)

केला के आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव ये हैंः-
केला कषाय, मधुर, शीत, गुरु, कफवर्धक; वातशामक, रुचिकारक, विष्टम्भि, बृंहण, वृष्य, शुक्रल, दीपन, सन्तर्पण, ग्राही, संग्राही, बलकारक, हृद्य, स्निग्ध और तृप्तिदायक होता है। यह अधिक प्यास लगने की समस्या, जलन, चोट लगने पर, आंखों की बीमारी में लाभ पहुंचाता है। केला से कान के रोग, दस्त, रक्तपितत्त, कफ, योनि दोष आदि में भी फायदा होता है।
केले का फूल तिक्त, कषाय, ग्राही, दीपन, उष्ण, स्निग्ध, बलकारक, केश्य, हृद्य, वस्तिशोधक, कफपित्त-शामक, वातकारक, कृमिशामक; रक्तपित्त, प्लीहाविकार, क्षय, तृष्णा, ज्वर और शूल-नाशक होता है।
केले के पत्ते शूल शामक, वृष्य, हृद्य, बलकारक और कान्तिवर्धक होते हैं। यह रक्तपित्त, रक्तदोष, योनिदोष, अश्मरी, मेह, नेत्ररोग और कर्णरोग-नाशक होते हैं।
केले का कच्चा फल मधुर, कषाय, शीतल; गुरु, स्निग्ध, विष्टम्भि, बलकारक, दुर्जर (देर से पचने वाला), दाह, क्षत, क्षय शामक और वात पित्तशामक होता है।

केला के फायदे और उपयोग (Banana Benefits and Uses in Hindi)

केला के औषधीय गुण, प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

केला के औषधीय गुण से आंखों की जलन का इलाज (Benefits of Banana to Treat Eye Irritating in Hindi)

आंखों में जलन होना एक आम समस्या है। जब कभी आपके आंखों में जलन हो तो केले के पत्तों को आंखों के ऊपर बांधें। इससे आंखों की जलन ठीक होती है।

और पढ़ेंः आंखों के रोग में करेला के फायदे

नाक से खून निकलने पर केला के सेवन से लाभ (Benefits of Banana to Stop Nasal Bleeding in Hindi)

कई लोगों को नाक से खून बहने की परेशानी रहती है। ऐसे में केले के पत्ते का रस निकाल लें। 1-2 बूंद नाक में डालने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है।
और पढ़ेंः नाक से खून बहने पर अंगूर के फायदे

कान के दर्द में केला का औषधीय गुण फायेदमंद (Banana Benefits for Ear Pain in Hindi)

कान में दर्द हो तो केला से लाभ ले सकते हैं। लहसुन, अदरक, सहिजन, मूली और केले के पत्ते का रस निकाल  लें। इसे थोड़ा गुनगुना कर 1-2 बूंद कान में डालें। इससे कान का दर्द ठीक हो जाता है।
और पढ़ेंः कान दर्द के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज

दांतों के रोग में केला के सेवन से लाभ (Benefits of Banana for Dental Disease in Hindi)

आपके दांत कमजोर हैं तो आप केला के सेवन से लाभ ले सकते हैं। केले के फल का पेस्ट बना लें। इसे दांतों पर मलें। इससे दांत मजबूत होते हैं।
और पढ़ेंः दांत दर्द का घरेलू इलाज

सांसों की बीमारी में केला का औषधीय गुण फायेदमंद (Banana Benefits for Respiratory Disease in Hindi)

  • केला, कुन्द, शिरीष और पिप्पली का पेस्ट बना लें। 2-4 ग्राम पेस्ट को चावल के धोवन के साथ पिएँ। इससे श्वास रोग ठीक होता है।
  • गोमूत्र में पकाए हुए या अंगार पर भूने हुए 1 केले का सेवन करने से सांसों के रोग में लाभ होता है।
  • पके केले को बीच से लम्बाई में काट लें। इसके बीच के सिरा को हटा दें। इसमें 1-2 ग्राम मरिच चूर्ण डालकर, दोनों भाग को मिला लें। इसे अंगारों पर पकाकर, छिलका हटाकर सेवन करने से सांसों के रोग में लाभ होता है।
और पढ़ें: सांसों की बीमारी में मूली खाने के फायदे

आंतों के रोग में केला के सेवन से लाभ (Benefits of Banana for Intestine Disease in Hindi)

  • कच्चे केले को उबालकर, उसके गुद्दे में गेहूँ का आटा मिलाकर गूथ लें। इसकी रोटी बनाकर, बिना मलाई वाली दही के साथ खाएं। इससे आंतों के रोग में लाभ होता है।
  • केले की जड़ का काढ़ा बना लें। काढ़ा को 10-15 मिली की मात्रा में पिएं। इससे आंतों के कीड़े निकल जाते हैं।
और पढ़ेंः आंतों में कीड़े होने पर गंभारी के फायदे

पेचिश की आयुर्वेदिक दवा है केला (Uses of Banana to Treat Dysentry in Hindi)

केले के 5-10 मिली पूल के रस में 20-50 मिली दही मिला लें। इसे खाने से दस्त, पेचिश और मासिक धर्म के समय अधिक खून बहने की परेशानी में लाभ होता है।
और पढ़ेंः पेचिश में शमी का उपयोग 

दस्त में केला के सेवन से लाभ (Banana Benefits to Stop Diarrhea in Hindi)

1 पके हुए केले को दही में मथें। अपनी पसंद के अनुसार शक्कर, नमक और मरिच चूर्ण मिलाकर खाएं। इससे दस्त पर रोक लगती है।
और पढ़ेंः दस्त में अभ्यारिष्ट के फायदे

एसीडिटी की आयुर्वेदिक दवा है केला (Uses of Banana to Cure Acidity in Hindi)

हरे कच्चे केले को धूप में सुखाकर, पीस लें। इसे आटे में मिलाकर, रोटी बना लेंं। इसे खाने से एसिडिटी और पेट के फूलने की परेशानी ठीक होती है। इससे खट्टी डकारें नहीं आती हैं।
और पढ़ेंः एसिडिटी में लौंग के फायदे

मूत्र रोग (पेशाब रुक-रुक कर आना और दर्द होना) आयुर्वेदिक दवा है केला (Uses of Banana for Urinal Disease in Hindi)

  • 500 मिग्रा छोटी इलायची के बीज चूर्ण में मधु मिला लें। इसका सेवन करें। इसके बाद केले के पत्ते के बीच में रहने वाली नली का रस निकालकर पिएं। इससे मूत्र रोग जैसे पेशाब रुक-रुक कर आने और पेशाब में दर्द होने की समस्या में लाभ होता है। 
  • 5-10 मिली केले की जड़ के रस में 10-20 मिली लौकी का रस मिला लें। इसे पीने से कम पेशाब होने की समस्या में लाभ होता है।
  • पके हुए केले को खाने से अधिक पेशाब होने की समस्या,  पाचनतंत्र संबंधी समस्या, किडनी विकार, पेशाब में जलन की समस्या, ल्यूकोरिया, शारीरिक कमजोरी ठीक होती है।
  • 1 पके कदली फल में घी मिलाकर खाने से मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव की समस्या में तुरंत लाभ होता है।
और पढ़ें: मूत्र रोग में लाभ दिलाता है भुई-आंवला का सेवन

गोनोरिया में केला के सेवन से लाभ (Banana Uses for Gonorrhea Treatment in Hindi)

गोनोरिया के रोगी केले के औषधीय गुण से फायदा ले सकते हैं। आप केले को निचोड़ लें। इसमें लौकी का रस मिला लें। इसे पिएं। इससे गोनोरिया रोग में फायदा मिलता है।
और पढ़ेंः गोनोरिया में फायदेमंद भुई आवंला का प्रयोग 

केला के औषधीय गुण से सिफलिस रोग का इलाज (Benefits of Banana to Treat Syphilis Disease in Hindi)

सिफलिस एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में रोगी को बहुत तकलीफ झेलनी पड़ती है। सिफलिस के इलाज के लिए केले को उबालकर, मसल लें। इसे घाव पर बांधें। इससे बहुत अत्यन्त लाभ होता है।
और पढ़ेंः सिफलिस रोग में विधारा से लाभ

केला के औषधीय गुण से कुष्ठ रोग का इलाज (Benefits of Banana to Treat Leprosy in Hindi)

अधिकांश लोग कुष्ठ रोग को कभी ठीक ना होने वाली बीमारी मानते हैं। आप केले से कुष्ठ रोग में लाभ ले सकते हैं। 65 मिग्रा केले के पत्ते के क्षार में हल्दी का चूर्ण मिला लें। इसका लेप करने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
और पढ़ेंः कुष्ठ रोग में करंज के फायदे

घाव में केला के फायदे (Banana Uses in Healing Wound in Hindi)

आप घाव को ठीक करने के लिए केला का उपयोग कर सकते हैं। केले के पके हुए साफ पत्तों को घाव पर बाँधें। इससे घाव ठीक होता है, और पस के साथ दुर्गन्ध दूर होता है।
और पढ़ेंः घाव के इलाज में निर्गुण्डी के फायदे

हेयर रिमूवल की तरह काम करता है केला (Banana Uses like Hair Removal in Hindi)

आप केले को हेयर रिमूवल की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं। सेमल के कांटे, हरताल और चूने को केले के पत्ते के रस से पीस लें। इसे शरीर में जहां भी अनचाहे बाल हों, वहा लगाएं। इससे बाल हट जाते हैं।
और पढ़ेंः चेहरे से अनचाहे बाल को हटाने के घरेलू उपाय

आग से जलने पर में केला के फायदे (Banana Uses to Treat Fire Burning in Hindi)

आग से जल जाने पर केला का प्रयोग बहुत लाभ देता है। आग से जले हुए स्थान पर केले के फल को मसलकर लगाएं। इससे बहुत लाभ होता है।
और पढ़ेंः आग से जलने पर जीरा का प्रयोग फायदेमंद

मानसिक रोगों (मैनिया, मिर्गी और अनिद्रा) में केला के फायदे (Banana Uses to Treat Mania, Epilepsy and Insomnia Disease in Hindi)

10-20 मिली कदली के तने के रस को नारिकेल जल के साथ मिला लें। इसका सेवन करने से मिर्गी, अनिद्रा, और मैनिया जैसी बीमारी में फायदा मिलता है।
और पढ़ेंः गोरखमुंडी के उपयोग से मिर्गी का इलाज

केला के उपयोगी भाग (Beneficial Part of Banana in Hindi)

केला के इन भागों का इस्तेमाल किया जाता हैः-
  • पंचांग
  • जड़
  • तना
  • फूल
  • फल
  • पत्ते

केला का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Banana in Hindi?)

केला को इतनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिएः-
  • रस- 10-20 मिली
  • चूर्ण- 10-20 ग्राम 

केला से नुकसान (Banana Side Effects in Hindi)

यहां केला के फायदे और नुकसान की जानकारी बहुत ही आसान भाषा (Banana benefits and side effects in Hindi) में लिखी गई है ताकि आप केला के औषधीय गुण से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं, लेकिन किसी बीमारी के लिए केला का सेवन करने या केला का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

केला कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Banana Found or Grown?)

केला की खेती मूलतः बिहार एवं पूर्वी हिमालयी क्षेत्रों में की जाती है। यह 1400 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है। भारत में विशेषतः उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडू और आँध्र प्रदेश में भी केला की खेती की जाती है।
और पढ़ेंः बला के सेवन से गर्भवती महिलाओं को लाभ
और पढ़ेंः पेट में कीड़े होने पर अपनाएं ये घरेलू उपाय
और पढ़ेंः अंडकोष के दर्द के कारण और घरेलू उपाय
और पढ़ेंः गंजेपन की सम्सया को दूर करने के घरेलू उपाय
और पढ़ेंः मासिक धर्म में कम ब्लीडिंग होने पर पपीता फायदेमंद
और पढ़ेंः पीठ के नीचले हिस्से के दर्द से राहत पाने के घरेलू उपाय

Banana: केला के हैं ढेर सारे फायदे

केला (Banana) से कौन परिचित नहीं होगा। भारत सहित पूरे विश्व में केला को लोग बहुत ही पसंद से खाते हैं। केला और दूध अनेकों लोगों का पसंदीदा भोजन है। बहुत सारी जगहों पर केले के फूल की सब्जी भी बनाई जाती है, तो कई स्थानों पर केले के पत्तों में भोजन किया जाता है। क्या आप यह जानते हैं कि केला एक जड़ी-बूटी भी है, और अधिक प्यास लगने की समस्या, घाव, सर्दी-खांसी, जैसी बीमारियों में केला के इस्तेमाल से फायदे (Banana benefits and uses) मिलते हैं। इतना ही नहीं, कुष्ठ रोग, कान के रोग, दस्त आदि रोगों में भी केला के औषधीय गुण से लाभ मिलता है।
आयुर्वेद के अनुसार, केला को कदली, केरा भी बोला जाता है। आप आंखों के रोग, आग से जलने पर, और पेचिश रोग में केला के औषधीय गुण के फायदे ले सकते हैं। आप गोनोरिया, बुखार, और शारीरिक कमजोरी होने पर भी केला से लाभ ले सकते हैं। आइए यहां एक-एक कर जानते हैं कि केला के सेवन या उपयोग करने से कितनी सारी बीमारियों में फायदा होता है, साथ ही यह भी जानते हैं कि केला से क्या-क्या नुकसान (Banana side effects) हो सकता है। 

केला क्या है? (What is Banana in Hindi?)

प्राचीन काल से केले का प्रयोग चिकित्सा के लिए किया जाता है। केले के वृक्ष को पवित्र मानकर उसकी पूजा भी की जाती है। कई आयुर्वेदिक किताबों में केले की कई प्रजातियों का जिक्र किया गया है। धन्वन्तरी निघण्टु के मतानुसार, केले की दो प्रजातियां होती हैं, जो ये हैंः-
  1. कदली 
  2. काष्ठकदली होती हैं। 
राजनिघण्टु के मतानुसार केले की चार प्रजातियां होती हैं, जो ये हैंः-
  1. कदली
  2. काष्ठकदली
  3. गिरीकदली
  4. सुवर्णमोचा 
भावप्रकाश-निघण्टु के मतानुसार भी केले की कई प्रजातियां होती हैं, जो ये हैंः-
1.माणिक्य
2.मर्त्य 
3.अमृत 
4.चम्पकादि
यहां केला के फायदे और नुकसान की जानकारी बहुत ही आसान भाषा (Banana benefits and side effects in Hindi) में लिखी गई है ताकि आप केला के औषधीय गुण से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं।

अन्य भाषाओं में केला के नाम (Name of Banana in Different Languages)

केला का वानस्पतिक नाम Musa paradisiaca Linn.(म्यूजा पैराडिजिएका) Syn-Musa sapientum Linn. है, और यह Musaceae (म्यूजेसी) कुल का है। केला के अन्य ये नाम भी हैंः-
Banana in –
  • Hindi- केला, कदली, केरा
  • Sanskrit- कदली, वारणा, मोचा, अम्बुसारा, अंशुमतीफला, वारणबुसा, रम्भा, काष्ठीला 
  • English- प्लेन्टेन (Plantain), बनाना (Banana), ऐडम्स् फिग (Adam’s Fig), Banana tree (बनाना ट्री)
  • Assamese- कोल (Kol), तल्हा (Talha)
  • Oriya- कोदोली (Kodoli), रामोकोदिली (Ramokodili) 
  • Urdu- केला (Kela)
  • Kannada- बालेहन्नु (Balehannu), कदली (Kadali)
  • Gujarati- केला (Kela)
  • Tamil- कदली (Kadali), वलई (Valai)
  • Telugu- अरटि (Arati), कदलमु (Kadalamu)
  • Bengali- केला (Kela), कोला (Kola), कोदली (Kodali)
  • Nepali- केरा (Kera)
  • Punjabi- केला (Kela), खेला (Khela)
  • Marathi- केला (Kela), कदली (Kadali)
  • Malayalam- वला (Vala),  क्षेत्रकदली (Chetrakadali), कदलम (Kadalam)
  • Arabic- शाजरातुल्ताह्ल (Shajratultahl)
  • Persian- तुहलतुला (Tuhltula), मौज (Mouz), मौज (Mouz)

केला के औषधीय गुण (Medicinal Properties of Banana in Hindi)

केला के आयुर्वेदीय गुण-कर्म एवं प्रभाव ये हैंः-
केला कषाय, मधुर, शीत, गुरु, कफवर्धक; वातशामक, रुचिकारक, विष्टम्भि, बृंहण, वृष्य, शुक्रल, दीपन, सन्तर्पण, ग्राही, संग्राही, बलकारक, हृद्य, स्निग्ध और तृप्तिदायक होता है। यह अधिक प्यास लगने की समस्या, जलन, चोट लगने पर, आंखों की बीमारी में लाभ पहुंचाता है। केला से कान के रोग, दस्त, रक्तपितत्त, कफ, योनि दोष आदि में भी फायदा होता है।
केले का फूल तिक्त, कषाय, ग्राही, दीपन, उष्ण, स्निग्ध, बलकारक, केश्य, हृद्य, वस्तिशोधक, कफपित्त-शामक, वातकारक, कृमिशामक; रक्तपित्त, प्लीहाविकार, क्षय, तृष्णा, ज्वर और शूल-नाशक होता है।
केले के पत्ते शूल शामक, वृष्य, हृद्य, बलकारक और कान्तिवर्धक होते हैं। यह रक्तपित्त, रक्तदोष, योनिदोष, अश्मरी, मेह, नेत्ररोग और कर्णरोग-नाशक होते हैं।
केले का कच्चा फल मधुर, कषाय, शीतल; गुरु, स्निग्ध, विष्टम्भि, बलकारक, दुर्जर (देर से पचने वाला), दाह, क्षत, क्षय शामक और वात पित्तशामक होता है।

केला के फायदे और उपयोग (Banana Benefits and Uses in Hindi)

केला के औषधीय गुण, प्रयोग की मात्रा एवं विधियां ये हैंः-

केला के औषधीय गुण से आंखों की जलन का इलाज (Benefits of Banana to Treat Eye Irritating in Hindi)

आंखों में जलन होना एक आम समस्या है। जब कभी आपके आंखों में जलन हो तो केले के पत्तों को आंखों के ऊपर बांधें। इससे आंखों की जलन ठीक होती है।

और पढ़ेंः आंखों के रोग में करेला के फायदे

नाक से खून निकलने पर केला के सेवन से लाभ (Benefits of Banana to Stop Nasal Bleeding in Hindi)

कई लोगों को नाक से खून बहने की परेशानी रहती है। ऐसे में केले के पत्ते का रस निकाल लें। 1-2 बूंद नाक में डालने से नाक से खून बहना बंद हो जाता है।
और पढ़ेंः नाक से खून बहने पर अंगूर के फायदे

कान के दर्द में केला का औषधीय गुण फायेदमंद (Banana Benefits for Ear Pain in Hindi)

कान में दर्द हो तो केला से लाभ ले सकते हैं। लहसुन, अदरक, सहिजन, मूली और केले के पत्ते का रस निकाल  लें। इसे थोड़ा गुनगुना कर 1-2 बूंद कान में डालें। इससे कान का दर्द ठीक हो जाता है।
और पढ़ेंः कान दर्द के लक्षण, कारण और घरेलू इलाज

दांतों के रोग में केला के सेवन से लाभ (Benefits of Banana for Dental Disease in Hindi)

आपके दांत कमजोर हैं तो आप केला के सेवन से लाभ ले सकते हैं। केले के फल का पेस्ट बना लें। इसे दांतों पर मलें। इससे दांत मजबूत होते हैं।
और पढ़ेंः दांत दर्द का घरेलू इलाज

सांसों की बीमारी में केला का औषधीय गुण फायेदमंद (Banana Benefits for Respiratory Disease in Hindi)

  • केला, कुन्द, शिरीष और पिप्पली का पेस्ट बना लें। 2-4 ग्राम पेस्ट को चावल के धोवन के साथ पिएँ। इससे श्वास रोग ठीक होता है।
  • गोमूत्र में पकाए हुए या अंगार पर भूने हुए 1 केले का सेवन करने से सांसों के रोग में लाभ होता है।
  • पके केले को बीच से लम्बाई में काट लें। इसके बीच के सिरा को हटा दें। इसमें 1-2 ग्राम मरिच चूर्ण डालकर, दोनों भाग को मिला लें। इसे अंगारों पर पकाकर, छिलका हटाकर सेवन करने से सांसों के रोग में लाभ होता है।
और पढ़ें: सांसों की बीमारी में मूली खाने के फायदे

आंतों के रोग में केला के सेवन से लाभ (Benefits of Banana for Intestine Disease in Hindi)

  • कच्चे केले को उबालकर, उसके गुद्दे में गेहूँ का आटा मिलाकर गूथ लें। इसकी रोटी बनाकर, बिना मलाई वाली दही के साथ खाएं। इससे आंतों के रोग में लाभ होता है।
  • केले की जड़ का काढ़ा बना लें। काढ़ा को 10-15 मिली की मात्रा में पिएं। इससे आंतों के कीड़े निकल जाते हैं।
और पढ़ेंः आंतों में कीड़े होने पर गंभारी के फायदे

पेचिश की आयुर्वेदिक दवा है केला (Uses of Banana to Treat Dysentry in Hindi)

केले के 5-10 मिली पूल के रस में 20-50 मिली दही मिला लें। इसे खाने से दस्त, पेचिश और मासिक धर्म के समय अधिक खून बहने की परेशानी में लाभ होता है।
और पढ़ेंः पेचिश में शमी का उपयोग 

दस्त में केला के सेवन से लाभ (Banana Benefits to Stop Diarrhea in Hindi)

1 पके हुए केले को दही में मथें। अपनी पसंद के अनुसार शक्कर, नमक और मरिच चूर्ण मिलाकर खाएं। इससे दस्त पर रोक लगती है।
और पढ़ेंः दस्त में अभ्यारिष्ट के फायदे

एसीडिटी की आयुर्वेदिक दवा है केला (Uses of Banana to Cure Acidity in Hindi)

हरे कच्चे केले को धूप में सुखाकर, पीस लें। इसे आटे में मिलाकर, रोटी बना लेंं। इसे खाने से एसिडिटी और पेट के फूलने की परेशानी ठीक होती है। इससे खट्टी डकारें नहीं आती हैं।
और पढ़ेंः एसिडिटी में लौंग के फायदे

मूत्र रोग (पेशाब रुक-रुक कर आना और दर्द होना) आयुर्वेदिक दवा है केला (Uses of Banana for Urinal Disease in Hindi)

  • 500 मिग्रा छोटी इलायची के बीज चूर्ण में मधु मिला लें। इसका सेवन करें। इसके बाद केले के पत्ते के बीच में रहने वाली नली का रस निकालकर पिएं। इससे मूत्र रोग जैसे पेशाब रुक-रुक कर आने और पेशाब में दर्द होने की समस्या में लाभ होता है। 
  • 5-10 मिली केले की जड़ के रस में 10-20 मिली लौकी का रस मिला लें। इसे पीने से कम पेशाब होने की समस्या में लाभ होता है।
  • पके हुए केले को खाने से अधिक पेशाब होने की समस्या,  पाचनतंत्र संबंधी समस्या, किडनी विकार, पेशाब में जलन की समस्या, ल्यूकोरिया, शारीरिक कमजोरी ठीक होती है।
  • 1 पके कदली फल में घी मिलाकर खाने से मासिक धर्म में अधिक रक्तस्राव की समस्या में तुरंत लाभ होता है।
और पढ़ें: मूत्र रोग में लाभ दिलाता है भुई-आंवला का सेवन

गोनोरिया में केला के सेवन से लाभ (Banana Uses for Gonorrhea Treatment in Hindi)

गोनोरिया के रोगी केले के औषधीय गुण से फायदा ले सकते हैं। आप केले को निचोड़ लें। इसमें लौकी का रस मिला लें। इसे पिएं। इससे गोनोरिया रोग में फायदा मिलता है।
और पढ़ेंः गोनोरिया में फायदेमंद भुई आवंला का प्रयोग 

केला के औषधीय गुण से सिफलिस रोग का इलाज (Benefits of Banana to Treat Syphilis Disease in Hindi)

सिफलिस एक गंभीर बीमारी है। इस बीमारी में रोगी को बहुत तकलीफ झेलनी पड़ती है। सिफलिस के इलाज के लिए केले को उबालकर, मसल लें। इसे घाव पर बांधें। इससे बहुत अत्यन्त लाभ होता है।
और पढ़ेंः सिफलिस रोग में विधारा से लाभ

केला के औषधीय गुण से कुष्ठ रोग का इलाज (Benefits of Banana to Treat Leprosy in Hindi)

अधिकांश लोग कुष्ठ रोग को कभी ठीक ना होने वाली बीमारी मानते हैं। आप केले से कुष्ठ रोग में लाभ ले सकते हैं। 65 मिग्रा केले के पत्ते के क्षार में हल्दी का चूर्ण मिला लें। इसका लेप करने से कुष्ठ रोग में लाभ होता है।
और पढ़ेंः कुष्ठ रोग में करंज के फायदे

घाव में केला के फायदे (Banana Uses in Healing Wound in Hindi)

आप घाव को ठीक करने के लिए केला का उपयोग कर सकते हैं। केले के पके हुए साफ पत्तों को घाव पर बाँधें। इससे घाव ठीक होता है, और पस के साथ दुर्गन्ध दूर होता है।
और पढ़ेंः घाव के इलाज में निर्गुण्डी के फायदे

हेयर रिमूवल की तरह काम करता है केला (Banana Uses like Hair Removal in Hindi)

आप केले को हेयर रिमूवल की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं। सेमल के कांटे, हरताल और चूने को केले के पत्ते के रस से पीस लें। इसे शरीर में जहां भी अनचाहे बाल हों, वहा लगाएं। इससे बाल हट जाते हैं।
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आग से जलने पर में केला के फायदे (Banana Uses to Treat Fire Burning in Hindi)

आग से जल जाने पर केला का प्रयोग बहुत लाभ देता है। आग से जले हुए स्थान पर केले के फल को मसलकर लगाएं। इससे बहुत लाभ होता है।
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मानसिक रोगों (मैनिया, मिर्गी और अनिद्रा) में केला के फायदे (Banana Uses to Treat Mania, Epilepsy and Insomnia Disease in Hindi)

10-20 मिली कदली के तने के रस को नारिकेल जल के साथ मिला लें। इसका सेवन करने से मिर्गी, अनिद्रा, और मैनिया जैसी बीमारी में फायदा मिलता है।
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केला के उपयोगी भाग (Beneficial Part of Banana in Hindi)

केला के इन भागों का इस्तेमाल किया जाता हैः-
  • पंचांग
  • जड़
  • तना
  • फूल
  • फल
  • पत्ते

केला का इस्तेमाल कैसे करें? (How to Use Banana in Hindi?)

केला को इतनी मात्रा में इस्तेमाल करना चाहिएः-
  • रस- 10-20 मिली
  • चूर्ण- 10-20 ग्राम 

केला से नुकसान (Banana Side Effects in Hindi)

यहां केला के फायदे और नुकसान की जानकारी बहुत ही आसान भाषा (Banana benefits and side effects in Hindi) में लिखी गई है ताकि आप केला के औषधीय गुण से पूरा-पूरा लाभ ले पाएं, लेकिन किसी बीमारी के लिए केला का सेवन करने या केला का उपयोग करने से पहले किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से जरूर सलाह लें।

केला कहां पाया या उगाया जाता है? (Where is Banana Found or Grown?)

केला की खेती मूलतः बिहार एवं पूर्वी हिमालयी क्षेत्रों में की जाती है। यह 1400 मीटर की ऊँचाई पर पाया जाता है। भारत में विशेषतः उत्तर प्रदेश, केरल, तमिलनाडू और आँध्र प्रदेश में भी केला की खेती की जाती है।
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